शिवपुरी। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार ने शनिवार को जिला जेल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बंदियों को मिलने वाली सुविधाओं जैसे भोजन, स्वल्पहार, स्वास्थ्य, परिवारजनों से मुलाकात पेशी आदि के संबंध में पूछताछ की। तत्पश्चात जेल के सभाग्रह में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार की अध्यक्षता में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।
इस दौरान माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने बंदियों को बताया कि ऐसे विचाराधीन बंदी जिनका मामला 7 वर्ष तक या 7 वर्ष से कम की सजा से दण्डनीय है वे प्ली-बानिंग प्रावधान के अंतर्गत अपराध स्वीकृति के परिणामस्वरूप उन अपराध में दी जाने वाली अधिकतम सजा के एक चौथाई सजा भोग कर मामले का त्वरित निराकरण करा सकते है। इसके फलस्वरूप वह बंदी उस मामले में न्यायालयीन प्रक्रिया में लगने वाले समय को बचाकर लाभ ले सकता है। साथ ही उस मामले का निराकरण प्लीबार्गेनिंग प्रक्रिया अंतर्गत मामलों का निराकरण दोनों पक्षकारों बिना किसी दबाव के व उभयपक्षों की सहमति से हाने के कारण मामले का अंतिम और स्थाई तौर पर समाधान हो जाता है। साथ ही अपीलीय प्रक्रिया से भी छुटकारा मिल जाता है।
जिला न्यायाधीश अर्चना सिंह ने बताया कि कारागार केवल सजा काटने का स्थान नहीं बल्कि प्राश्चित करने का स्थान है। भगवान श्री कृष्णा, उनके पिता वसुदेव एवं महर्षि बालगीकि व अंगुलीमार आदि का उदाहरण देते हुए बताया कि हम सभी को इनके जीवन से सीख लेकर कारागार से बाहर जाकर एक नए जीवन की शुरूआत कर सकते हैं और अपने आप को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर व अपने जीवन को उन्नाति के मार्ग में लगा सकते है। व्यवहार न्यायाधीश नेहा प्रधान ने जेल लोक अदालत पर जानकारी देते हुए बताया कि बंदी जेल लोक अदालत के माध्यम से मामले का निराकरण कराकर लाभ ले सकते है जैसे-न्यायालय फीस, पेशी से छुटकारा, न्यायालय प्रक्रिया में लगने वाला पैसा अपीलीय प्रावधानों से छुटकारा आदि।
मैनुअल के अनुरूप सुविधाएं बंदियों का अधिकार हैं
इस अवसर पर व्यवहार न्यायाधीश रूपम तौमर ने बताया कि प्रत्येक बंदी को अधिकार है कि उन्हें जेल मेनुअल अनुसार भोजन, पानी, स्वास्थ्य संबंधी सुविधा मिले बंदियों को उनके परिवार जनों से मुलाकात हो। बंदी को अपना मामला चलवाने के लिए निशुल्क वकील मिले। गर्भवती महिलाओं और उनके साथ रह रहे छः वर्ष से कम उम्र के बच्चों आहार व समुचित उपचार मिले। संचालन जिला विधिक सहायता अधिकारी डा. वीरेंद्र चढ़ार ने किया। आभार जेल में पदस्थ शिक्षक रामगोपाल ने माना।






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