शिवपुरी । त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सोमवार को नामांकन का अंतिम दिन था। आखिरी दिन जिला पंचायत सदस्य के पद के लिए 135, जनपद सदस्य के लिए 625, सरपंच के लिए 1615 और पंच के लिए 3997 नामांकन आए। इस बार पंचायत चुनाव में करीब सात पंचायतों में निर्विरोध सरपंच चुने जाएंगे क्योंकि इन सात पंचायतों से सिर्फ एक ही उम्मीदवार ने नामांकन भरा है। जनपद पंचायत कोलारस में पड़ोरा सड़क, बदरवास जनपद में रामखेड़ी व बीजरी, करैरा जनपद में ग्राम पंचायत बरौदी, खनियांधाना जनपद में कफार और पिछोर जनपद में दो ग्राम पंचायत करारखेड़ा व पारेश्वर में निर्विरोध सरंपच चुने जाएंगे। मंगलवार को इनकी स्क्रूटनी की गई। पंचायत चुनाव में जिले में करीब 10553 पद हैं जिनके लिए 10937 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसमें जिला पंचायत सदस्य के 309 आवेदन आए हैं। पंच के 9500 से अधिक पद हैं, लेकिन इसके लिए आवेदन महज 5012 आए हैं। ऐसी स्थिति में करीब आधी पंचायतों में पंच पद के लिए छह महीने बाद दोबारा चुनाव कराना होगा।
प्रेक्षक पहुंचे संवीक्षा में
प्रेक्षक अनूप तिवारी ने त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन जिला मुख्यालय पर जिला पंचायत सदस्यों, जनपद पंचायत सदस्यों, सरपंच, पंच के नाम निर्देशन पत्रों की, की जा रही संवीक्षा (जांच) का निरीक्षण किया। प्रेक्षक तिवारी मुख्यालय से रवाना होकर पोहरी पहुंचकर अनुविभागीय कार्यालय में अनुविभागीय अधिकारी/रिटर्निंग ऑफीसर पोहरी द्वारा जनपद सदस्य के नाम निर्देशन पत्रों की संवीक्षा एवं तहसीलदार / सहायक रिटर्निंग आफिसर द्वारा तहसील कार्यालय में पंच/सरपंच के नाम निर्देशन पत्रों की संवीक्षा कार्य का अवलोकन किया गया। इसके उपरांत नरवर तहसील कार्यालय, दोपहर में जिला मुख्यालय में संवीक्षा कार्य का अवलोकन किया।
पड़ोरा सड़क में लगातार चौथी बार निर्विरोध सरपंच
कोलारस जनपद की ग्राम पंचायत पड़ोरा सड़क में लगातार चौथी बार निर्विरोध सरपंच निर्वाचित होगा। यहां पर पूर्व सरपंच हिम्मत सिंह रावत और पूर्व मंडी अध्यक्ष सीताराम रावत के परिवार का दबदवा है। पिछले चार चुनावों से इनके परिवार का सदस्य या इनके द्वारा नामित प्रत्याशी ही यहां चुनाव जीत रहा है। गांव में कोई भी इनके विरोध में चुनाव नहीं लड़ता है। इसके पहले यहां पर महादेवी पत्नी हिम्मत सिंह रावत सरपंच थीं। इस बार सीट आदिवासी हुई तो महेंद्र आदिवासी से नामांकन भरवाया। रावत परिवार से समर्थित होने के कारण कोई अन्य व्यक्ति इनके खिलाफ खड़ा नहीं हुआ और एक बार फिर सीट निर्विरोध रही। यह लगातार चौथी बार है जब जहां निर्विरोध सरपंच चुना जाएगा।






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