शिवपुरी के नरवर को राजा नल की नगरी के नाम से जाना जाता है। नरवर में स्थित राजा नल के ऐतिहासिक किले पर इन दिनों तेंदुओं की आमद से दहशत का माहौल बना हुआ है। राजा नल का किला 14 किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। इस किले के पिछले तीन हिस्सों में घनगोर जंगल क्षेत्र की सीमा लगी हुई है।
नरवर किले पर 8 कुआं, 9 बावड़ी पर स्थित हनुमान जी के मंदिर के पुजारी बलराम दास का कहना है कि पिछले दिनों से तेंदुओं की आमद नरवर किले पर देखी जा रही है। पुजारी ने बताया कि वह स्वयं इसके प्रत्यक्ष दर्शी हैं। पुजारी का कहना है कि मैंने खुद गाय का शिकार करते हुए शेर को देखा है। किले के तालकटोरा, नोंन गड़ा क्षेत्र में भी शेर ने गायों का शिकार किया है। नरवर किले के पिछले हिस्से में बसे सुल्तानपुर उरबाये गांव के जंगल क्षेत्र में भी लोगों ने चीतों को गाय का शिकार करते हुए देखा है।
नरवर किले पर शेर चीतों की आमद के कारण क्षेत्र के आसपास के किले पर जाने वाले लोग और बाहर से किला देखने वाले आने वाले पर्यटकों में भी भय का माहौल बना हुआ है। नरवर किले पर पदस्थ चौकीदारों का कहना है कि हम फॉरेस्ट विभाग को सूचना करेंगे। जिससे फॉरेस्ट विभाग नरवर किले पर गायों का शिकार करने वाले तेंदुओं को रेस्क्यू कर अन्य क्षेत्र में या नेशनल पार्क क्षेत्र में छोड़ दिया जाए, जिससे किले पर रहने वाले संत महात्माओं और क्षेत्र की जनता और पर्यटकों को किले पर आने-जाने में कोई परेशानी न हो सके साथ ही अन्य जानवरों को भी कोई खतरा न रहे।






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