शिवपुरी। महिला पिछड़ा वर्ग कांग्रेस ने देवी अहिल्याबाई की जन्म जयंती मनाकर उनको नमन किया। जिलाध्यक्ष शिवानी राठौर महिला पिछड़ा वर्ग कांग्रेस ने बताया कि नारी शक्ति कितनी महान होती है, वह अपने जीवन में क्या कर सकती है इसका उदाहरण अहिल्या बाई होल्कर से बेहतर नहीं हो सकता। जीवन में परेशानियाँ कितनी भी हो, उनसे कैसे निपटना है यह हमें अहिल्या बाई के जीवन से सीखना चाहिए। अपने जीवन काल में अहिल्या बाई होल्कर ने बहुत परेशानियों का सामना किया है लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी, यही वजह है की भारत सरकार ने भी उनको सम्मानित किया, उनके नाम डाक टिकेट भी जारी हुआ और आज अहिल्या बाई के नाम से अवार्ड भी दिया जाता है।उस समय महिलाओं/स्त्रियों को शिक्षा नहीं दी जाती थी लेकिन अहिल्याबाई के पिता ने अपनी बेटी को शिक्षा भी दी और अच्छे संस्कार भी।
घर में पली-बढ़ी अहिल्याबाई बचपन में ही दयाभाव वाली थी। उनकी दयाभाव और आकर्षक छवि ही उनके जीवन को इतनी आकर्षक बनाती है।
अहिल्याबाई होल्कर को आज देवी के रूप में पूजा जाता है, लोग उन्हें देवी का अवतार मानते है। उन्होंने अपने कार्यकाल में भारत के लिए अनेक ऐसे कार्य किये जिनके बारें में कोई राजा भी नहीं सोच सकता था। उस समय उन्होंने भारत के अनेक तीर्थ स्थलों पर मंदिर बनवाएं, वहां तक पहुँचने के लिए उन्होंने मार्ग निर्माण करवाया, कुँए एंव बावड़ी का निर्माण करवाया था।
अहिल्याबाई जब शासन में आई उस समय राजाओं द्वारा प्रजा पर अनेक अत्यचार हुआ करते थे, गरीबों को अन्न के लिए तरसाया जाता था और भूखे प्यासे रखकर उनसे काम करवाया जाता था।उस समय अहिल्याबाई ने गरीबों को अन्न देने की योजना बनाई और वह सफल भी हुई, लेकिन कुछ क्रूर राजाओं ने इसका विरोध किया। अहिल्याबाई को लोग माता की छवि मानते थे और उनके जीवनकाल में ही उन्हें देवी के रूप में पूजने लगे थे।
भारत के इंदौर शहर के लिए अहिल्याबाई का एक अलग ही लगाव था, उन्होंने इस शहर के विकास के लिए अपनी काफी पूंजी खर्च करी थी. अपने जीवन काल में ही अहिल्याबाई होलर ने इंदौर शहर को एक बहुत ही सुगम शहर के या क्षेत्र बना दिया था. यही वजह है की भाद्रपद कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को यहाँ पर अहिल्योउत्सव मनाया जाता है।इस अवसर पर शिवानी राठौर के साथ शहर अध्यक्ष पिछड़ा वर्ग महिला कांग्रेस मालती कुशवाह, ज्योति कुशवाह, वीरेंद्र कुशवाह, शुभम राठौर आदि महिला कार्यकर्ता उपस्थित रही।






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