पोहरी। पोहरी कृषि मंडी में अपनी फसल लेकर आने वाले किसान मूलभूत सुविधाओं से ही वंचित है। यहां पर रात्रि विश्राम के लिए न ही विश्राम गृह खुला हुआ है और न ही सार्वजनिक शौचालय की कोई व्यवस्था है। हालात यह है कि सार्वजनिक शौचालय ही गंदगी से पटा पड़ा है। इसके चलते हर दिन यहां पर किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पोहरी में अमरैय्या रोड़ पर स्थित कृषि मंडी में हर दिन आसपास के गांव के किसान अपनी फसल बेचने के लिए आते हैं। फसल बेचने के दौरान कई बार बहुत लंबा समय बीत जाता है। जब समर्थन मूल्य पर खरीद चलती है तो किसानों को दो-दो दिन तक इंतजार करना पड़ता है। इसे देखते हुए कृषि मंडियों में विश्राम गृह भी बनाए गए हैं। लेकिन पोहरी की मंडी में यह महज शोपीस बने हुए हैं क्योंकि किसान इनका उपयोग ही नहीं कर पा रहे हैं। प्रबंधन ने विश्राम गृह के कमरों पर ताला लटका रखा है। इतना ही नहीं यहां शौचालय की व्यवस्था तक नहीं है। जो सार्वजनिक शौचालय है वह इतनी गंदी स्थिति में है कि उसका उपयोग ही नहीं किया जा सकता है। खुद कर्मचारियों और अधिकारियों के बने हुए शौचालय की स्थिति थोड़ी ठीक है, लेकिन किसान इसका इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। चारों ओर गंदा पानी फैला हुआ होने से यहां पर मच्छर भी पनप रहे हैं। इससे किसानों में बीमार होने का खतरा भी बढ़ रहा है। स्वच्छता और विश्राम गृह जैसी बुनियादी सुविधाओं से दूर देश का अन्नादाता मशक्कत के साथ अपनी फसल बेच पाता है।
कैंटीन की व्यवस्था भी चौपट
दूर से आने वाले किसानों के लिए यहां पर भोजन की व्यवस्था भी नहीं है। नाम मात्र के लिए जो कैंटीन बनाई गई है उसमें खाना तो नहीं मिलता है, लेकिन पुड़िया तंबाकू मिलता है। थोड़ा बहुत नाश्ता जरूर किसानों को मिल जाता है लेकिन पेट भरने की व्यवस्था नहीं हो पाती है। इसे लेकर भी किसानों ने कई बार आपत्ति दर्ज कराई गई है, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला है।






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