शिवपुरी। अंचल के तालाब अतिक्रमण में डूब गए हैं। हालात यह हैं कि तकरीबन आधे से ज्यादा तालाब दम तोड़ चुके हैं। जो तालाब बच गए हैं उनमें पानी घटता जा रहा है और कब्जा बढ़ता जा रहा है। यही हाल रहा तो आने वाले दशक में शिवपुरी सहित अंचल के बचे हुए तालाबों में से आधे से ज्यादा का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। हैरानी इस बात की है तालाबों के सौंदर्यीकरण के लिए तो योजनाएं बन रही हैं, लेकिन उनको अतिक्रमण मुक्त कराने के प्रयास सिर्फ दिखावा हैं। शिवपुरी में तालाब अतिक्रमण के कारण सिकुड़ चुके हैं, जितना हिस्सा बचा है वो गंदगी की चपेट में है। जैसे-जैसे गंदगी इसको लीलती जाएगी, भूमाफिया के लिए जगह खाली होती जाएगी।
13 तालाबों का अस्तित्व खत्म कर दिया अतिक्रमणकारियों ने
रियासत काल में शिवपुरी शहर में 18 तालाब हुआ करते थे, लेकिन पिछले छह दशक में यहां तालाब के कैचमेंट एरिया में कब्जा करने का सिलसिला ऐसा चला कि 13 तालाबों का अस्तित्व ही खत्म हो गया। मनियर तालाब अतिक्रमण की चपेट में है, यह भी खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है।
शहर के गुर्जर ताल की 21 बीघा जमीन पर भू-माफियाओं ने कॉलोनी काट दी और सबसे ज्यादा प्लॉट खरीदने वालों में राजस्व विभाग के आरआई और पटवारी शामिल थे।
यहां बता दें कि वर्ष 2005 में प्रकरण क्रमांक 2708 में फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट की ग्वालियर दो सदस्यीय ज्यूरी ने तत्कालीन शिवपुरी कलेक्टर को आदेश दिए थे कि शिवपुरी के तालाबों पर यथास्थिति बरकरार रखी जाए, बावजूद इसके सारे के सारे तालाब भू-माफियाओं के कब्जे में चले गए। 2005 से लेकर 2014 तक जिले में बैठे लगभग सारे कलेक्टरों ने इस संबंध में बारी-बारी से पत्राचार कर कार्रवाई करने के प्रयास भी किए, परंतु नतीजा सिफर रहा।
ये बने थे मालिक
तालब पर जब अतिक्रमण कर प्लाट काटे जा रहे थे उस समय सबसे ज्यादा तहसीलदार, आरआई व पटवारियों ने प्लाट खरीदे। जिसमें उस समय के राजस्व विभाग के अरविंद कुमार आरआई, पहलवान सिंह पटवारी, रामकली चौधरी इन्हें एक पूर्व तहसीलदार ने तालाब की जमीन से प्लॉट खरीदकर बेचा। नंदकिशोर आरआई, गजानंद आरआई, संतोष आरआई, जगदीश प्रसाद आरआई, रघुवीर पटवारी, बृजभूषण आरआई, सरनामसिंह आरआई और सवाई लाल पटवारी गुर्जर ताल की सरकारी जमीन के मालिक बन बैठे थे।
केन्द्र ने लेक एटलस में शामिल किए थे तालाब
केन्द्र सरकार ने 19 फरवरी 2009 को शहर के गुर्जर ताल, जाधव सागर, चांदपाठा और माधवलेक को लेक एटलस में शामिल किया था, परंतु सरकारी मशीनरी अब तक इन तालाबों को कब्जों से मुक्त नहीं करा पाई है।
यह हुआ नुकसान
शहर की कुल आबादी ढाई लाख के उपर हो गई है। शहर में 1 हजार फीट की गहराई तक डाउन वाटर चला गया है। इसी शहर में पानी की समस्या इतनी जटिल है कि लोग सर्दियों में भी रात-रातभर पानी भर रहे हैं। यदि ये 18 तालाब कब्जे के शिकार न हुए होते तो स्थितियां अलग होंती।
ये हैं वे 18, जिसमें सिर्फ बचे चार
विष्णु मंदिर के पीछे का तालाब टूरिस्ट वेलकम सेंटर के पीछे, मनियर तालाब, कृष्णपुरम कॉलोनी, महल के पीछे, काली माता के सामने, एक पीछे, सर्किट हाउस के पीछे, फतेहपुर में छोटा और बड़ा दोनों तालाब, सोन चिरैया के पीछे, गुर्जर ताल, माधव लेक, चौकसे की धर्मशाला के पीछे, हवाई पट्टी के पास, श्रीराम कॉलोनी तालाब और जाधव सागर तालाब कब्जों के शिकार हैं।






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