गीता पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने जाना इंडक्शन कुकर के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन सिद्धांत को
शिवपुरी। एक समय था जब घरों में हीटर, चूल्हा , मिट्टी का चूल्हा आदि इस्तेमाल किया जाता था लेकिन समय के साथ कई तकनीकी बदलाव हुए हैं और अब कई आधुनिक डिजाइन की इलेक्ट्रॉनिक चीजों के द्वारा खाना बनाना और पकाना आसान हो गया है। इंडक्शन कुकर के बारे में कई तरह के प्रश्न दिमाग में उत्पन्न होते हैं कि यह काम कैसे करता है? यह बर्तन को गर्म कैसे करता है ? इस पर खाना कैसे बन जाता है आदि। विद्यार्थियों के इन प्रश्नों के उत्तर को समझाने के लिए गीता पब्लिक स्कूल के फिजिक्स के अध्यापक मिस्टर अब्दुल शोएब ने विद्यार्थियों को इंडक्शन कुकर की वर्किंग के बारे में समझाते हुए बताया कि इंडक्शन कुकर में 4 मेन पार्ट्स होते हैं ।
1.इंडक्शन कॉइल 2.मेन सर्किट बोर्ड 3.डिस्पले पैनल बोर्ड 4.एग्जॉस्ट फैन
मेन सर्किट बोर्ड का काम शार्ट सर्किट से बचाना है और सही फ्रिकवेंसी के करंट को पास करना है। डिस्पले पैनल बोर्ड कॉइल में करंट के फ्लो को बढ़ाने व घटाने का काम करता है । एग्जॉस्ट फैन इंडक्शन हीट को बाहर निकालने का काम करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को इंडक्शन कुकर की वर्किंग को समझाते हुए बताया कि इसमें जो इंडक्शन कॉइल होती है वह गर्म करने का काम करती है। इंडक्शन हीटिंग के सिद्धांत पर काम करता है। इसमें एक इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फील्ड बन जाता है जो तार के चारों ओर काम करता है इसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स जेनरेट होते हैं जिसमे इलेक्ट्रिक तथा मैग्नेटिक दोनो प्रॉपर्टीज होती हैं। उदाहरण देकर विद्यार्थीयों को समझाते हुए बताया कि अगर हम सीधी तार लेते हैं तो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स उस वायर के गोल चक्कर लगाएगी और अगर हम वायर को गोल-गोल रिंग बना कर लेते हैं तो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स इस वायर के चारों ओर घूमने लगती हैं, उसमें इलेक्ट्रिक करंट फ्लो होता है इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव वायर की गोल रिंग के कारण आपस में टकराती हैं। इस रिंग के अंदर अगर हम लोहे की रॉड को लगाएंगे तो वह गरम हो जाएगी। इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव के आपस में टकराने के कारण इसके कॉइल के बीच में रखे लोहे के atoms वाइब्रेट करने लगते हैं और आपस में टकराने लगते हैं जिससे लोहे के एटम्स के बीच में घर्षण होने लगता है, ऊष्मा उत्पन्न होती है और लोहा गरम होकर लाल होने लगता है इसे ही इंडक्शन हीटिंग कहते हैं। इंडक्शन कुकर को बनाने की तकनीक कुछ ऐसी है जिसमें कॉपर की कॉइल खुद गर्म नहीं होती इसलिए ऊष्मा पैदा नहीं करती और यही कारण है कि कॉइल के ऊपर रखा हुआ सिरेमिक टाइल भी गर्म नहीं होता । कॉपर की कॉइल एक चुंबकीय क्षेत्र बनाती है।
इंडक्शन कुकर पर किन बर्तनों का इस्तेमाल किया जा सकता है -इसके बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि इंडक्शन कुकर हर प्रकार के बर्तन पर काम नहीं करता है यह सिर्फ ऐसे बर्तनों पर काम करेगा जो बर्तन फ्लैट, आयरन या आयरन बेस्ड होते हैं । साथ ही यह कुछ स्टेनलेस बर्तन पर भी काम कर सकता है क्योंकि उसमें थोड़ी आयरन की मात्रा होती है।
विद्यार्थियों को इंडक्शन कुकर से होने वाले फायदों के बारे में बताते हुए कहा कि
*इससे वायु प्रदूषण नहीं होता।
*आग लगने का डर नहीं रहता।
*इंडक्शन में ऑटोमेटिक टाइमर होता है आप टाइम सेट कर दीजिए तो यह समय पर अपने आप बंद हो जाएगा खाना जलने का डर नहीं होगा।
*कहीं पर भी रखकर खाना बना सकते हैं जरूरी नहीं कि किचन प्लेटफॉर्म ही हो।
*यह काफी जल्दी हीट हो जाता है और यही वजह है कि गैस की तुलना में इंडक्शन में ज्यादा जल्दी खाना पकता है। *इंडक्शन में खाना पकाने के दौरान उसकी गुणवत्ता और आपके भोजन, सब्जी आदि में मौजूद विटामिन नष्ट नहीं होते।
इस तरह विद्यार्थियों द्वारा प्रैक्टिकली ना केवल इंडक्शन तकनीक के बारे में बल्कि इंडक्शन कुकर के अलग-अलग पार्ट्स, उनका काम , वर्किंग , उस पर प्रयोग होने वाले बर्तन, उसके प्रयोग से होने वाले फायदों, उसके प्रयोग में रखने वाली सावधानियों के बारे में भी समझा गया।






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