शिवपुरी। मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में लिपिक स्व. वृंदावन शर्मा की पत्नी, व बच्चे पहुंचे। यहां आवेदन के माध्यम से अधिकारियों को बताया कि वृंदावन शर्मा के खिलाफ जांच में अनियमितताएं बरती गई है इसकी दोबारा जांच की जाना चाहिए।
वृंदावन शर्मा की पत्नी ने बताया कि गणक के पद पर पदस्थ वृंदावन शर्मा एवं कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ वसंत पवार को न्यायालयीन प्रकरण में लापरवाही एवं अनुशासनहीनता के कारण निलंबित कर दिया गया था। मामले को लेकर कलेक्टर कार्यालय के आदेश पर विभागीय जांच के आदेश दिए गए थे जबकि विभागीय जांच के आदेश से पूर्व स्वर्गीय वृंदावन शर्मा द्वारा आरोप पत्र का जवाब दिया जा चुका था जिसको तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा नजरअंदाज कर दिया गया और निर्दोष होने के बाद भी उनको आरोपी माना गया उनके पति के खिलाफ जांच में झूठे साक्ष्य प्रस्तुत कर झूठे आरोप पत्र दिए गए जबकि वृंदावन शर्मा केवल लिप किए कार्य किया करते थे कलेक्टर के द्वारा ही न्यायालय प्रकरण दर्ज कराने की कार्रवाई न्यायालय में अग्रसेन की जाता है वसंत पवार के द्वारा राजेश बैरागी प्रकरण को देर से दर्ज किया गया लेकिन इस विसंगति की जांच नहीं की गई विभागीय जांच में अधीनस्थ जांच कर्मचारियों द्वारा जांच के नाम पर स्वर्गीय वृंदावन शर्मा से मोटी रकम रिश्वत के नाम पर ले ली गई। जब जांच शुरू हुई तो बृंदावन शर्मा के अंतिम आत्महत्या लेख में तीनों आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की बात कही गई थी और साक्षरता तौर। पर 16 ऑडियो क्लिप भी पेनड्राइव भी जमा कराई थी क्योंकि आत्महत्या लेख और पेन ड्राइव में वित्तीय घोटाले स्पष्ट साक्ष्य थे इस कारण विभागीय जांच को गुमराह कर बंद कर दिया गया मामले को लेकर मेरे द्वारा पूर्व में भी आवेदन दिए लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई इसलिए मामले में सही जांच दोषियों के खिलाफ कारवाई की जाए।






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