शिवपुरी। एक तरफ लोग बेटियों के जन्म को लेकर खुशियां मना रहे हैं और अब उन्हें बेटी बोझा नहीं बल्कि अपना गर्व लगती है लेेकिन वहीं दूसरी तरह रूढीवादिता और बेटियों को बोझ समझने वाले भी इस दुनिया में कम नहीं है। इसलिए आए दिन नव जन्मी लाडलियों को मौत की आगोश में सुलाया जा रहा है उन्हें यह दुनिया देखने से पहले ही ईश्वर के पास भेज दिया जाता है।
ऐसा ही एक मामला गोवर्धन थाना क्षेत्र के बूढ़ता के निकट स्थित पार्वती नदी पर बने नए पुल पर नजर आया। यहां बीती रात कोई अज्ञात नवताज बच्ची को पुल के नीचे फेंक गया। सुबह जब लोग निकले तो उन्होंने शव को नदी के किनारे देखा। मामले की सूचना पुलिस को दी गई जिस पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। नवजात के शव के पास से पुलिस ने दो कपड़े बरामद किए। थाना प्रभारी दिनेशसिंह नरवरिया ने बताया कि बच्ची के शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मर्ग कायम कर विवेचना की जा रही है। पुलिस ने बताया कि यह बच्ची या तो बिन ब्याही मां की हो सकती है जिसने अपना पाप छिपाने के लिए उसे फेंक दिया और उसकी मौत हो गई या फिर किसी को बेटी नहीं बेटे की चाहत होगी तो उसने रखने से इंकार कर दिया और उसे दर्दनाक मौत दी।
पार्वती नदी में उतराता शव कह रहा हो कि मुझे भी जीना था
नन्हीं सी जान को जिस कलयुगी मां ने फेंक कर मार डाला लेकिन मौत के बाद भी शव नदी में उतराता मिला। शव की खामोशी चीख—चीख कर कह रही हो कि मेरा क्या कसूर था, क्या मैं लड़की थी तो मुझे मारा, क्या मुझे भी जीनें का हक नहीं था।
जागरूकता के बाद भी बेटियों को मान रहे बोझ
बेटियां बचाने, बेटियां पढाने का दावा प्रशासन भले ही करता हो और तमाम जागरूकता के दावे करता हो लेकिन आए दिन ऐसे हादसे देखते हुए प्रशासन के सब दावे धरे के धरे रह जाते हैं। आज भी रूढ़ीवादी मानसिकता को प्रशासन बदलने में नाकाम साबित रहा है और लाखों करोड़ों खर्च कर जागरूकता के नाम पर अपनी जेबे भरने में लगा हुआ है। ऐसा ही हाल कुपोषण का है करोड़ों रूपए हर साल कुपोषण से निबटने के लिए प्रशासन को मिलता है लेकिन सिर्फ कागजों में ही कुपोषण दूर बताकर लाखों के बारे—न्यारे अधिकारियों द्धारा कर लिए जाते हैं।






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