*वर्जनाओं से मुक्ति की गलत व्याख्या अपराध की जननी:गर्ग
* चाइल्ड कंजर्वेशन फाउंडेशन की 89 वी ई संगोष्ठी आयोजित*
शिवपुरी। हमारे परिवार स्कूल क्यों जाते है?उन्हें पढ़ाये जाने वाले पाठ्यक्रम पर कभी चर्चा नही करते है महज अपने आसपास के लोगों को देखकर अपने बच्चों की शालेय शिक्षा को प्रबंधित करते है। आरम्भ में लगता है कि बच्चे स्कूल में बैठना सीख रहे है फिर लगता है बच्चा अंग्रेजी सीख जाएगा, प्रतिस्पर्धी बनकर अच्छा कैरियर बनाएगा और यहीं तक परवरिश सीमित है।मौजूदा लोकजीवन में परवरिश से नैतिक पक्ष गायब हो रहा है।नैतिकता विहीन शिक्षा डॉक्टर,इंजीनियर ,पेशेवर बना सकती है लेकिन इंसान बनने के लिए जीवन में सद्गुणों और सद्प्रयासों की बुनियाद आवश्यक है।यह बात आज चाइल्ड कंजर्वेशन फाउंडेशन की 89 वी ई संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रख्यात लेखक और पत्रकार संजीव सिन्हा ने कही। संगोष्ठी को एसपी रेडियो शशांक गर्ग ने भी संबोधित किया।
एसपी रेडियो शशांक गर्ग ने कहा कि बच्चों का अपराध की ओर तेजी से उन्मुख होना एक नैतिक और सामाजिक संकट भी है जिसे हमारे द्वारा स्वयं खड़ा किया गया है।वर्जनाओं से मुक्ति के नाम पर उन परम्पराओं को तिलांजलि दी जाने लगी है जो कभी परवरिश के लिए संस्कार का काम करती थीं। एकल परिवार ने इस नैतिक संकट को और अधिक बढ़ा दिया है।अब परिवारबोध भारतीय धरातल की जगह नकली प्रतिस्पर्धियों के बीच खड़ा हो रहा है।शिक्षा का बुनियादी उद्देश्य केवल पाठ्यक्रमों एवं कैरियर की गारंटी तक सिमट रहा है इसलिए समाज में संवेदनशीलता का पीढ़ीगत संकट सामने आ रहा है। संयुक्त परिवार कभी जीवन की बुनियादी शिक्षा का केंद्र हुआ करते थे लेकिन अब एकल।परिवार अवधारणा ने बच्चों को इससे वंचित कर दिया है।श्री गर्ग ने बताया कि किशोरों के साथ सतत और समावेशी संवाद का आज नितांत अभाव है।स्मार्ट फोन की उपलब्धता ने उन सभी वर्जनाओं को सुगम्य बना दिया है जो कभी सभ्य और जबाबदेह जीवन का तत्व हुआ करते थे। उन्होंने बताया कि नशे के कारोबार में बड़ी संख्या में हर वर्ग के बच्चों का उपयोग हो रहा है यह एक चिंताजनक तथ्य है।उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे केवल महंगे स्कूलों में बच्चों के दाखिले तक अपनी भूमिका को सीमित न करें बल्कि सतत अपने और आसपास के बच्चों के साथ संवाद स्थापित करें उनकी मानसिकता को समझे और एक सकारात्मक दिशा तय करें।
संगोष्ठी का संचालन करते हुए फाउंडेशन के सचिव डॉ कृपाशंकर चौबे ने बताया कि देश भर में जिस तरह से आपराधिक गतिविधियों में बच्चों की भागीदारी बढ़ रही है वह समाज के लिए चिंता का सबब है और इसका समाधान केवल कानूनी प्रावधानों से संभव नही है इसकी मूल जड़ अभिभावक धर्म के साथ जुड़ी हुई है।संगोष्ठी में देश भर से बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने अपनी भागीदारी की आभार प्रदर्शन फाउंडेशन के कोषाध्यक्ष राकेश अग्रवाल ने किया।






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