शिवपुरी। यूक्रेन स्थित खारकीव शहर के मेडिकल कॉलेज के बंकर में फंसे छात्र हिमांशु मौर्य बुधवार को अपने साथियों के साथ 10 किलोमीटर पैदल चलकर रेलवे स्टेशन पहुंचे लेकिन उनके चेहरे की खुशी तब गायब हो गई जब रेलवे स्टेशन प्रबंधन ने अनुमति ना होने का हवाला देकर उन्हें सुबह 11 बजे से अब तक हंगरी के लिए रवाना नहीं किया। जेलर पिता का आरोप है कि दूतावास में फोन करने के बाद कोई उसे रिसीव नहीं कर रहा है,जिससे खारकीव रेलवे स्टेशन पर उनके बेटे सहित 1040 छात्र फंसे हुए है।
जेलर विजय एस मौर्य की माने तो उनके बेटे हिमांशु ने उन्हें बताया कि वह अपने साथियों के साथ हिम्मत कर 10 किलोमीटर पैदल चलकर बुधवार सुबह रेलवे स्टेशन खारकीव के लिए रवाना हुए ।
11 बजे वह रेलवे स्टेशन पहुंचे जहां उन्हें सूचना दी गई कि यहां से ट्रेन हंगरी रवाना होने वाली है। और यह गुरुवार रात 9 बजे तक हंगरी रेलवे स्टेशन पहुंचेगी। जहां से इन्हें एयरपोर्ट से भारत आने के लिए फ्लाइट मिलेगी। पिता मौर्य ने जब बेटे से यह समाचार सुना तो वह फूले नहीं समाए और उन्होंने आनन-फानन में सब रिश्तेदारों को खबर कर दी कि उनका बेटा गुरुवार रात 9 बजे हंगरी पहुंच जाएगा।
जहां से एक-दो दिन में भारत आ जाएगा। लेकिन उनकी खुशी का ठिकाना तब चिंता में बदल गया जब फिर से बेटे का मैसेज शाम 4 बजे मिला कि रेलवे स्टेशन प्रबंधन उन्हें जाने की इजाजत नहीं दे रहा है। वह कहता है कि दूतावास से उन्हें अनुमति नहीं है। जबकि स्टेशन पर मेडिकल छात्र हिमांशु सहित 1040 विद्यार्थी हैं और यहां दो ट्रेन भी खड़ी हुई है। लेकिन उन में बैठने की अनुमति स्टेशन प्रबंधन ने नहीं दी, जिससे सभी 1040 छात्र-छात्राएं खारकीव रेलवे स्टेशन पर फंसे हुए हैं।
जेलर पिता वी एस मौर्य ने पीड़ा जाहिर कर बताया कि उन्होंने एंबेसी में फोन किया लेकिन उसे कोई अब रिसीव नहीं कर रहा है। ऐसे में रेलवे स्टेशन पर एक साथ इतने छात्रों का फंसा रहना खतरे से खाली नहीं है। भारत सरकार को चाहिए कि वह तुरंत वहां संपर्क कर ट्रेन को रवाना कराने के निर्देश दें ,ताकि हंगरी होते हुए बच्चे वापस भारत आ सके।






Be First to Comment