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शिवरात्रि पर शिवालयों में उमड़ा जनसैलाब, दूल्हा बन निकले भोलेनाथ / Shivpuri News

शिवपुरी। कोरोना संक्रमण के कारण बीते दो साल से मंदिरों में भक्तजन पूजा—अर्चना करने नहीं जा पा रहे थे। लेकिन इस बार कोरोना का ऐसा कोई संकट नहीं दिखा। आज शहर के शिवालयों पर हजारों की संख्या में पहुंचकर भक्तजनों ने पूजा—अर्चना की। शिवपुरी शहर के प्राचीन मंदिर सिद्धेश्वर, राजेश्वरी कैला माता, काली माता मंदिर, वाणगंगा आदि सिद्ध स्थानों पर प्रात: से ही शिव भक्तों का आना जाना शुरू हो गया।

इन मंदिरों में दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु
शिवपुरी शहर के प्राचीनतम मंदिरों श्री सिद्धेश्वर मंदिर, नील कण्ठेश्वर महादेव, अद्र्वनागेश्वर भोलेनाथ मंदिर, नवग्रह मंदिर सहित अन्य शिव मंदिरों में स्थित शिवालयों पर आज सुबह से ही भक्तों का आना जाना शुरू हुआ। अपनी श्रद्धा और समर्थ के अनुसार भक्त भगवान शिव की आराधना में लग गये।

निकली शिव बारात
महाशिवरात्री पर शिव बारात भी निकाली गई। इस शिव बारात में हजारों की संख्या में भक्तजन मौजूद थे और डीजे की धुनों पर नाचते—गाते भक्तजन बम—बम भोलेनाथ के जयकारे लगा रहे थे। यह शिव बारात शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए निकली जिसका समाजसेवियों व आमजन से स्वागत किया।

शिवार्चन से मिलती है शक्ति
पुराणों के मुताबिक ऐसी मान्यता है कि शिवार्चन करने से आलौकिक शक्ति जीवन में प्राप्त होती है। शिव पुराण के मुताबिक अपनी श्रद्धा के अनुसार माटी के शिवलिंग का निर्माण करके श्रावण मास के प्रत्येक दिन जो भक्त भगवान शंकर को बेल पत्र, धतूरे का फूल, शक्कर, शहद, घी, पंचाम्रत समर्पित करते हैं उनकी मनोकामना पूर्ण होती है।

शिवार्चन के दौरान प्रत्येक दिन नये शिवलिंग का माटी से निर्माण किया जाता है और उसकी विधि विधान से पूजन करने के बाद उसे विर्सजन करने के लिये रखा जात है। 41 चावलों से महा मृत्युंजय का जाप करते हुये भगवान पर समर्पित करने से जन्ज जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं।

वैदिक मंत्रों के साथ योग आचार्य के माध्यम से शिवार्चन करने का प्रावधान है। लेकिन स्वयं के द्वारा माटी के शिवलिंग का निर्माण करके अपने पूजन के स्थल पर 41 चावलो का समर्पण करते हुये पंचाम्रत, फल फूल से भी ग्रहस्थ प्राणी शिवार्चन कर सकता है।

भगवान भोले नाथ इस शिवार्चन से प्रसन्न होते हैं। शिव और शक्ति की उपासना के साथ देव उठनी ग्यारस तक गणेश उत्सव की भी धूम रहती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

सिद्धेश्वर मंदिर शिवपुरी , ओमकारेश्वर से लाया गया था मंदिर में स्थापित शिवलिंग
शहर के छत्री रोड पर स्थित श्री सिद्धेश्वर मंदिर शहर का प्राचीन मंदिर है। सिद्धेश्वर मंदिर के पीछे गोरखनाथ का मंदिर है, जिसमें 12वीं शताब्दी की गोरखनाथ की मूर्ति भी है। यहां पर नाथ संप्रदाय के प्रवर्तक गोरखनाथ ने कुछ समय तक तपस्या भी की है। दौलतराव सिंधिया की रानी बैजाबाई सिंधिया के द्वारा शिवपुरी में शिवमंदिरों का निर्माण कराया गया।
इसी क्रम में सिद्धेश्वर मंदिर का निर्माण किया गया था। मंदिर में स्थापित शिवलिंग ओमकारेश्वर से लाया गया तथा उसके चारों तरफ बारह ज्योर्तिलिंग स्थापित किए गए। महत्वपूर्ण बात यह है कि भदैया कुंड, छत्री, जाधव सागर व सिद्धेश्वर मंदिर एक लाइन में मौजूद हैं जिनका वास्तु के रूप में अधिक महत्व है। नरवर के राजाओं की छत्रियां भी इस मंदिर परिसर में मौजूद हैं। इस मंदिर में भगवान गणेश, कार्तिकजी, राम-जानकी, राधा-कृष्ण, विष्णु भगवान, की प्राचीन मूर्तियां भी मौजूद हैं। इस मंदिर में भगवान शिवलिंग व मूर्तिरूप में विराजे हैं।

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