इंदौर-पटना एक्सप्रेस ट्रेन के दुर्घटनाग्रस्त होने की वजह से 96 यात्रियों की मौत हो गई और 200 से ज्यादा यात्री घायल हो गए. रेलवे के अफसर यदि एक यात्री की बात को गंभीरता से लेते तो इस हादसे को टाला जा सकता था.
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दरअसल, मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के सीतामऊ में रहने वाले प्रकाश शर्मा ने भी इस ट्रेन के दुर्घटनाग्रस्त हुए एस-2 कोच में इंदौर से उज्जैन तक सफर किया था.
प्रदेश18 से खास बातचीत में प्रकाश शर्मा ने बताया कि वह ट्रेन में नियमित तौर पर सफर करते रहते है. लेकिन पहली बार उन्हें लगा कि पहियों में कुछ अलग तरह की आवाज आ रही थी. पहियों में सामान्य से ज्यादा शोर हो रहा था.
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प्रकाश बताते हैं कि उन्हें आवाज सुनकर थोड़ा अजीब सा महसूस हुआ. उन्होंने एस-2 कोच में हीं मौजूद रेलवे के कुछ अधिकारियों और टीसी को इस बारे में बताया भी था. रेलवे के अफसरों ने इसे सामान्य बताकर टाल दिया था.
प्रकाश ने बताया कि, इंदौर से ट्रेन रवाना होने के करीब डेढ़ घंटे बाद वह उज्जैन स्टेशन पर उतर गए थे. रविवार सुबह उन्हें हादसे की सूचना मिली तो लगा कि उनकी आशंका सच साबित हो गई.
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अब प्रकाश का कहना है कि यदि रेलवे के अफसर उनकी बात को गंभीरता से लेते तो इस हादसे को टाला जा सकता था.
हालांकि, इंदौर-पटना ट्रेन के दुर्घटनाग्रस्त होने की वजहों का खुलासा नहीं हो सका है. रेलवे पूरे हादसे की अपने स्तर पर जांच करेगा, जिसके बाद हादसे की असल वजह का पता चल सकेगा.
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कानपुर के पास हुए इस हादसे में 91 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी हैं. वहीं, दर्जनों यात्री गंभीर रूप से घायल हुए है, जिनका कानपुर के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है.




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