बिना सुविधा शुल्क अदा किए नहीं होते कोई काम, अफसरों की नाक के नीचे
बाबू ले रहे हैं घूस
बदरवास तहसील कार्यालय में बाबूूराज: कायम
बदरबास का तहसील कार्यालय राज्य शासन का एक ऐसा विभाग है जिसमें जितना
गहरा उतरा जाए? उतना ही कम हैं। क्योकि इस विभाग में उतनी ही हैरत में
डालने वाली खबरे मिलती हैं। तहसील कार्यालय में कायम बाबूराज के चलते
तहसील से संबंधित कोई काम बिना पैसों के होता ही नहीं है और यह सारा
लेन-देन का खेल जिम्मेदार अफसरों के सरंक्षण में होता है।
बदरवास तहसील कार्यालय में दलाली प्रथा इतनी हाबी हो चुकी है की बिना
पैसे लिए-दिए यहां पत्ता भी नहीं हिलता। आलम यह है कि महज प्रकरण ऑनलाईन
दर्ज करने के एवज में व तारीख पेशी देनेें में तक तथाकथितबाबू के द्वारा
पांच सौ से हजार रूपये तक की घूस लोगों से ली जा रही है। ऐसा नहीं है की
इस पूरे मामले से तहसील कार्यालय के वरिष्टï अधिकारी अनजान हों क्योकि ए
दलाली का पूरा खेल उनकी नाक के नीचे एक बाबू द्वारा खुलेआम खेला जा रहा
है। बदरवास तहसील कार्यालय में खसरा पंचसाला, जमीन का नामांतरण व बटवारा,
जमानत आदि हर काम की अलग-अलग रेट फिक्श है। अगर आप अपना कार्य जल्दी
चाहते हैं तो वहां बैठे साहब के नजदीकी वाले कमाउ रीउर को उनकी मनचाही
घूसखोरी मुहैया कराकर आप अपना कार्य जल्द से जल्द करा सकते है। अगर आपने
उनकी मनचाही राशि मुहैया नहीं कराई तो एक छोटे से कार्य के लिए भी आपको
महीनों बदरवास तहसील कार्यालय में चक्कर काटने पड सकते हैं। हर कार्य में
लेन देने होने से किसानों एवं पक्षकारों का तो यहां तक कहना है कि तहसील
में हर कार्य की एक फिक्स रेट लिस्ट टांग दी जाए वो वेहतर होगा, जिससे
लोग संबंधित जिम्मेदार को दान-दक्षिणा देकर अपना काम करा सकेगें, यही
नहीं तहसील में लेन-देन रिश्वतखोरी को लेकर कई मामले सामने आ चुके हैे,
परंतु वरिष्टï अधिकारी अपने कमाउ बाबू को बचाने की कवायद में लग जाते है।
हैरतंगेज बात तो यह है कि यहां पदस्थ एक तथाकथित बाबू द्वारा इस विभाग के
जिम्मेदार अधिकारियों के सामने बैठे होने के बाबजूद रिश्वतखोरी का
नंगा-नाच का खेल खेला जा रहा है। इसे बदरवास नगर का दुर्भाग्य ही कहा जा
सकता है। क्योकि यह पूरा घिनोना कार्य जिम्मेदार अधिकारी अपनी आंखो से
देख रहे हैं। इस विभाग के जिम्मेदार गांधीजी के तीन बंदरों की तरह हो गए
हैं। न उन्हे कुछ दिखाई देता, न कुछ सुनाई देता, न वो कुछ बोलते।
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जानते-समझते हुए भी जिम्मेदार बने बेशुध
ऐसा नहीं है कि बदरवास तहसील में हो रहे लेन-देन के खेल की जानकारी
जिम्मेदार अधिकारी को न हो, क्योकि उनके सामने बैठे उक्त भ्रष्टï बाबू
द्वारा भोली-भाली जनता से उनकी मेहनत की गाढी कमाई पर मौंटा डांका डाला
जा रहा है। जिम्मेदारों को सब कुछ भलिभांति पता है कि बाबू कौन से कितना
पैसा ले रहा है। क्योंकि साहब के सामने बैठने वाले इस तथाकथित बाबू की
करतूत साहब भी देखते रहते हैं। और स्थानीय लोग भी लेन-देन के मामले साहब
के संज्ञान में ला चुके हें। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी ने बदरवास तहसील
में अपनी नाक के नीचे चल रहे लेन-देन के खेल को बंद करने की हिमाकतआज तक
नहीं की है। जिसका नतीजा बदरवास तहसील में आज बाबूराज पूरी तरह से हावी
हो चुका है।
छोटे-छोटे कामों के लिए गरीब लोगों को यहां पदस्थ बाबूओं को पांच सौ से
लेकर हजार रूपये तक अदा करने पड रहे हैं। इस पूरे माजरे के बाद ए कहने
में कोई अंत्योदेष्टिï नहीं होगी की ए सब जिम्मेदारों की इक्छा के वगैर
हो रहा है। कहीं न कहीं इस दलाली के आलम में जिम्मेदार भी हिस्सेदार हैं।






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