
शिवपुरी।
तीन दशकों से बॉलीबुड में अपने गायन से डंका बजा रहीं और अभी तक सात बार
महिला प्लेबैक सिंगर के रूप में फिल्म फेयर अवार्ड जीतने वाली प्रसिद्ध
फिल्मी गायिका अलका याज्ञनिक ने शिवपुरी उत्सव में प्रस्तुति देकर समां तो
बांधा लेेकिन जब रंग जमने लगा तो उन्होंने कभी अलविदा न कहना गीत गाकर विदा
ले ली और आकस्मिक ढंग से शिवपुरी उत्सव का पटाक्षेप हो गया। सन् 1988 की
प्रसिद्ध फिल्म तेजाब के गीत एक, दो, तीन, चार, पांच, छ:, सात, आठ, नौ, दस
ग्यारह, बारह, तेरहा का अंतिम गीत जब उन्होंने गाया तो यशोधरा राजे को
साक्षी बनाकर मजाक में कहा कि मैं शिवपुरीवासियों को 1 से 13 की गिनती
सिखाकर जा रहीं हूं और इसके बाद की गिनती अगले साल सुनाऊंगी। दो घंटे की
शाम में कुल 13 गीत गाए गए, लेकिन इसके बाद भी कमी रही तो सिर्फ यह कि अलका
के गीतों में कहीं से कहीं तक न तो मिट्टी की सौंधी-सौंधी सुगंध महसूस हुई
और न ही पुष्पों की महक से साक्षात्कार हुआ। देश भक्ति का जजवा भी नजर
नहीं आया नवरात्रि की धूम के भी कहीं से कहीं तक दीदार नहीं हुए। गीतों के
चयन का गुलदस्ता यदि समझदारी से बना होता और अलका जी अपने गीतों के अलावा
लता मंगेशकर के सदाबहार गीत जरा आंख में भर लो पानी जैसे नगमों को भी शामिल
करती तो निश्चित तौर पर शिवपुरी उत्सव यादगार बन जाता। कार्र्यक्रम में
उपस्थित प्रमुख लोगों में यशोधरा राजे सिंधिया, प्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ी
मदनलाल, विधायक प्रहलाद भारती, पूर्व विधायक माखनलाल राठौर, वीरेन्द्र
रघुवंशी, मछुआ कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष राजू बाथम सहित जिला प्रशासन,
पुलिस और न्याय पालिका के अधिकारीगण आदि भी उपस्थित थे।
शिवपुरी उत्सव
में दर्र्शक वर्र्ग से अपने आपको जोडऩे के लिए प्रसिद्ध गायिका अलका
याज्ञनिक ने खूब प्रयास किए। गीतों पर उनके कदम थिरके वहीं युगल गीत भी
उन्होंने गाये और ऑडियंस से कनेक्शन के लिए वह मुखातिब भी खूब हुई। शिवपुरी
उत्सव का भार भी उन्होंने अपने नाजुक कंधों पर उठाया लेकिन इसके बाद भी
कहीं न कहीं कुछ न कुछ कमी ऐसी रही जिससे दर्र्शक वर्र्ग और उनके बीच या तो
झिझक कहें या गैप बना रहा। वह आत्मीयता और अंतरंगता स्थापित नहीं हो पाई।
गाने तो उन्होंने खूब गाए। राहों में जब उनसे मुलाकात होगी से लेकर, टिप-टिप बरसा पानी, न जाने कितने दिनों के बाद आज गली में चांद निकला, देखा है पहली
बार साजन की आंखों में प्यार, एक मैं हूं एक तू हैं, से लेकर लेजा-लेजा
बोले चूडिंया बोले कंगना गीत एक-एक कर गाये। काश एक-एक कर गाये गीतों में
यदि जुड़ाव होता तो अधिक माहौल बंधता। एकल गीत के बाद अलका याज्ञनिक ने एक
कलाकार के साथ युगल गीतों की झड़ी लगार्ई। उन्होंने बाजीगर ओ बाजीगर, ऐसी
दीवानगी देखी न कहीं, कुछ-कुछ होता है गीत भी गाये।
सादगी और सहजता शाही परिवार की पूंजी
कार्र्यक्रम
के दौरान संचालक ने स्टेज पर यशोधरा राजे सिंधिया को आमंत्रित किया और
यशोधरा राजे ने सादगी पूर्र्ण ढंग से विनम्रता पूर्र्वक नव वर्ष की
शुभकामनायें देते हुए कहा कि अब शिवपुरी में उत्सव की शुरूआत हो चुकी हैं
और प्रतिवर्र्ष अलका जी शिवपुरी उत्सव में पधारकर हमारा आतिथ्य स्वीकार
करेंगी तथा शिवपुरी के विकास में अहम भूमिका निभायेंगी। यशोधरा राजे के
उदबोधन के बाद संचालक ने कहा कि अभी तक मैं रॉयल फैमिली के बारे में समझता
था कि जिनके पास अकूत दौलत होती है वह रॉयल होते हैं, लेकिन यहां आकर पता
चला कि सादगी और सहजता शाही परिवार की पूंजी होती है और इन्हीं गुणों से
रॉयल बना जाता है। कार्यक्रम में यशोधरा राजे ने गायिका अलका याज्ञनिक का
सम्मान किया। वहीं क्रिकेट खिलाड़ी मदनलाल का भी कार्र्यक्रम में सम्मान
किया गया।
ग्वालियर के अलैकजेण्डर ने दी शानदार प्रस्तुति
अलका
याज्ञनिक की आर्केस्ट्रा टीम के महत्वपूर्र्ण सदस्य ग्वालियर निवासी
अलैकजेण्डर हैं। कार्यक्रम में उनका परिचय देते हुए बताया गया कि वह लगभग
15-20 वर्षो से अलका याज्ञनिक की आर्केस्ट्रा टीम के महत्वपूर्र्ण हिस्से
हैं। अलका जी ने कहा भी कि मेरे साथ अलैकजेण्डर कार्र्यक्रम प्रस्तुत करने
के लिए देश और विदेश में गए हैं। उनकी उपस्थिति से मैं अपने आपको आश्वस्त
महसूस करती हूं कि उनके रहते हुए सब कुछ ठीक होगा।






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