10 साल में पूरी नहीं हो पाई सिंध जलावर्धन योजना
सीवर प्रोजेक्ट सहित तमाम योजनाएं पड़ी हैं आधी अधूरी

शिवपुरी।भले ही प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान अपने 13 वर्ष के कार्यकाल की
कितनी भी उपलब्धियां गिनाएं, परंतु शिवपुरी इन सबसे महरूम है। शिवपुरी
शहरवासियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण योजना सिंध जलावर्धन योजना 10 वर्ष बाद
भी पूरी नहीं हो सकी है और अब भी स्पष्ट तौर पर यह नहीं कहा जा सकता कि यह
कब तक पूरी होगी। इसी तरह शहर की सीवर प्रोजेक्ट का कार्य और उसकी गुणवत्ता
देखकर इस पर भी सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। शहर की सड़कों एवं अन्य
विकास कार्यों की स्थिति किसी से छुपी नहीं है। यदि मप्र की बात करें तो
प्रदेश में शिवपुरी ऐसा इकलौता जिला है जो विकास की रफ्तार में दशकों पीछे
चला गया है। इसकी प्रमुख वजह अब शिवपुरी वासियों को यह लगने लगी है कि कहीं
सिंधिया परिवार को पटखनी देने के चक्कर में तो शिवपुरी को बर्बाद नहीं
किया जा रहा है क्योंकि मिशन 2018 के लिए जहां एक ओर कांग्रेस सांसद
ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस बतौर मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट कर सकती है।
भाजपा ने मिशन 2018 फतेह करने के मकसद से तो यह रणनीति नहीं बनाई है।
प्रदेश की भाजपा सरकार और सिंधिया परिवार के बीच वर्तमान में चल रही
नूराकुश्ती के चलते न तो शहर का विकास हो पा रहा है और न ही लोगों को पानी
मिल पा रहा है। वर्ष 2007 में मप्र के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने स्वयं
शिवपुरी के कोर्ट रोड पर आकर इस सिंध परियोजना का भूमिपूजन करते हुए इसके
लिए सितम्बर 2011 तक की समय सीमा रखी थी, लेकिन वर्ष 2017 में भी यह योजना
अभी भी अधूरी ही है। हर वर्ष गर्मी के दिनों में पानी लाने के दावे किये
जाते हैं और बारिश शुरू होते ही वह दावे बारिश के पानी में बह जाते हैं। इस
योजना की खासबात यह थी कि यह योजना केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के सहयोग
से पूरी होनी थी। केन्द्र की तत्कालीन यूपीए सरकार ने अपने हिस्से की राशि
तो पहले ही दे दी थी, लेकिन राज्य सरकार इसमें लगातार ढिलाई बरतती रही।
नतीजा यह रहा कि उक्त कार्य करने वाली कंपनी ने योजना की लागत बढऩे की बात
कह डाली और अब लागत बढ़ते-बढ़ते तीन गुना से अधिक हो गई है। खासबात यह भी
है कि शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा लगातार शिवपुरीवासियों को सिंध का
पानी दिलाने के आश्वासन के सहारे ही फतेह प्राप्त करती रही है। यही हाल
शिवपुरी की एक अन्य बड़ी योजना सीवर प्रोजेक्ट का चल रहा है। सीवर
प्रोजेक्ट का कार्य न सिर्फ कछुआ गति से किया जा रहा है, बल्कि उसकी
गुणवत्ता को देखकर यह साफतौर पर कहा जा सकता है कि यह योजना कभी भी
शिवपुरीवासियों के लिए फायदेबंद साबित नहीं होगी। शहर से गुजरने वाले हाईवे
निर्माण कार्यों में भी रोड़े लटके हुए हैं और यही हाल शहर की अधिकांश
सड़कों का है जो किन्हीं न किन्हीं कार्यों से आधी अधूरी पड़ी हैं। इन सबको
देखते हुए अब एक बात जनता जनार्दन के मन में घर करती जा रही है कि जिस तरह
भाजपा शासित प्रदेश सरकार में शिवपुरी के विकास रथ के पहिए को रोका जा रहा
है, यह कहीं सिंधिया परिवार की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाने की मंशा
से तो नहीं हो रहा। क्योंकि शिवपुरी की स्थानीय विधायक एवं प्रदेश सरकार की
केबिनेट मंत्री भी शिवपुरी जिले के ताबड़तोड़ दौरों एवं अधिकारियों के साथ
बैठकों के बाद भी अब असहाय नजर आने लगी हैं। खुद की सरकार में ही यशोधरा
राजे को कितना कमजोर बना दिया गया है यह बात तत्कालीन प्रभारी कलेक्टर एवं
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत नेहा सिंह मारव्या के रवैए से स्पष्ट
हो जाता है और मारव्या को उनकी किए पर दण्डित भी नहीं किया जाता है। जिस
तरह जून 2016 में यशोधरा राजे के पास से उद्योग मंत्रालय छीनकर महज खेल एवं
धर्मस्य तक सीमित किया गया वह भी अप्रत्यक्ष रूप से उन्हें कमजोर करने की
रणनीति का ही हिस्सा माना जा रहा है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि
मिशन 2018 फतेह करने के लिए भाजपा नेतृत्व वाली सरकार सिंधिया परिवार को
कमजोर करने में लगी है।
मुख्यमंत्री का सिंधिया परिवार पर हमला इसी रणनीति का हिस्सा
हाल
ही में अटेर विधानसभा उपचुनाव में चुनावी सभा लेने आए प्रदेश के मुखिया
शिवराज सिंह चौहान ने जिस तरह स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई से सिंधिया
परिवार पर हमला बोला वह भी इसी रणनीति का हिस्सा नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री
सिंधिया परिवार पर हमला बोलने से पहले यह भूल गए कि मप्र भाजपा में
सिंधिया परिवार की मुखिया राजमाता सिंधिया का क्या योगदान है। वह यह भूल
गए कि इसी सिंधिया परिवार की एक सदस्य मप्र से सटे राजस्थान में भाजपा
शासित सरकार की मुखिया हैं, वह यह भी भूल गए कि इसी परिवार की एक सदस्य
मप्र सरकार में केबिनेट मंत्री हैं।







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