मंच पर चढ़कर मंच संचालक ने छीनी तलवार, मंच पर ही रोने लगी युवती
शिवपुरी। शिवपुरी में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले शहीद तात्याटोपे मेले त्रिदिवसीय आयोजन के आज पहले दिन आयोजित कार्यक्रम में एक प्रस्तुति के दौरान अपनी टीम के साथ तलवारबाजी का प्रदर्शन कर रही एक युवती से मंच पर चढ़कर मंच संचालक द्वारा तलवार छीन लिए जाने से बवाल जैसी स्थिति निर्मित हो गई। हुआ यह कि देशभक्ति गीतों से भरी एक पेरोडी के दौरान कलाकारों की टीम में शामिल युवती गौरी तलवारबाजी का प्रदर्शन करने लगी जिस पर मंच के सामने बैठे कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव ने उसे ऐसा करने से रोकने के लिए इशारा किया। युवती कुछ समझ पाती इससे पहले ही अचानक मंच संचालक आदित्य शिवपुरी मंच पर चढ़े और उन्होंने युवती का हाथ पकड़कर उससे तलवार छीन ली। सार्वजनिक रूप से इस तरह तलवार छीने जाने से युवती न सिर्फ सकपका गई, बल्कि मंच के एक ओर खड़े होकर रोने भी लगी, जिसे अपर कलेक्टर नीतू माथुर एवं एक अन्य मंच संचालक गिरीश मिश्रा मामा ने समझा बुझाकर शांत किया। कुल मिलाकर प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले इस आयोजन के प्रथम दिन हुए इस घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं, वहीं बीपीएन जयहिन्द मिशन के कलाकारों का मन व्यथित है। उनका कहना है कि उनकी टीम द्वारा यह प्रस्तुति पहली बार नहीं दी गई है इससे पूर्व भी आयोजित होने वाले तमाम कार्यक्रम रामनवमी, कर्नल ढिल्लन समाधि पर आयोजित कार्यक्रम, रानी लक्ष्मीबाई मशाल यात्रा, रामप्रसाद विस्मिल के बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों में वे प्रस्तुति देते आए हैं।
मंशा ठीक, पर तरीका गलत
युवती को इस तरह तलवारबाजी करते रोकने को लेकर हम यह नहीं कहते कि रोकने वाली की मंशा में कोई खोट थी, लेकिन इतना तो अवश्य कहते हैं कि यह तरीका गलत था। यदि आयोजकों को इस तरह की प्रस्तुति से उसे रोकना था तो मंच संचालक माइक के माध्यम से भी उसे रोकने के लिए कह सकते थे। ऐसा न कर सार्वजनिक रूप से सीधे मंच पर चढ़कर उसे इस तरह रोके जाने को कोई भी सही नहीं ठहरा सकता।
पूर्व से तय होने थे कार्यक्रम
प्रतिवर्ष शहीद तात्याटोपे के बलिदान दिवस पर आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय आयोजन में किस दिन क्या कार्यक्रम होना है और किस तरह की प्रस्तुति रखी जाना है, यह पूर्व से ही तय होना चाहिए था, इतना ही नहीं आयोजकों को मंच पर प्रस्तुत होने वाले कार्यक्रमों की रिहर्सल देखकर भी कार्यक्रमों को फायनल किया जाना चाहिए था। ऐसा न कर कलाकारों को सीधे मंच पर प्रस्तुति देने की इजाजत और फिर मंच पर चढ़कर गलत तरीके से उसे रोका जाना कितना उचित कदम कहा जा सकता है?






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