
पत्रकारों की आर्थिक उन्नती और उन्हें मजीठिया वेतनमान एवं समाचार पत्रों के मालिक/संपादक द्वारा नियुक्ति पत्र मिलने पर ही संभव हैं। राज्य सरकार ने पत्रकारों एवं उनके परिवार को बीमा योजना में लाभ, राज्य, जिला, तहसील एवं स्वतंत्र पत्रकार के रूप में अधिमान्यता देना, 60 वर्ष से अधिक उम्र के पत्रकारों को श्रद्धा निधि, पत्रकारों की ग्रह निर्माण संस्थाओं के माध्यम से भूखण्ड देना, कोटे के अनुसार, शासकीय आवास न्यूनतम किराया पर देना, गैर अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों को जनसंपर्क विभाग द्वारा बीमारी पर आर्थिक सहायता रूपये एक लाख तक देना। कवरेज अथवा बीमारी पर वाहन देना/उत्कृष्ठ पत्रकारिता पर विभिन्न पुरूस्कारों से सम्मानित करना/लघू पत्र-पत्रिकाओं को विज्ञापन देना आदि कार्य किये जा रहे हैं जो कि इस सरकार के सराहनीय एवं पत्रकार हित के कार्य हैं।
पत्रकार हित में एक कार्य अति आवश्यक है यह कि पत्रकारों को प्रताडि़त करने के लिए दुर्भावनावश प्रकरण पंजीबद्ध हो रहे हैं उन्हें रोकना, सरकार का ध्यान में ग्रह विभाग के द्वारा जारी परिपत्र के एफ 12-34/109/बी-1/ दो दिनांक 6-1-2010 की ओर दिलाना चाहता है जिसमें स्पष्ट है कि दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 154 के अंतर्गत प्रथम सूचना पत्र नियमानुसार दर्ज किया जाय। परंतु अपराध के पंजीयक के बाद चालान किये जाने के पूर्व प्रकरणों में उपलब्ध साक्ष्य की समीक्षा पुलिस अधिक्षक एवं पुलिस महानिरीक्षक रेंज द्वारा की जायेगी। देखने में आता है कि संबंधित थाने में शिकायत के आधार पर विभिन्न धाराओं में प्रकरण पंजीवद्ध कर लिया जाता है।
इस तरह से पत्रकार को सर्व प्रथम जमानत वकील जमानतदार की व्यवस्था करनी पड़ती है और मानसिक, शारीरिक एवं आर्थिक परेशनी का सामना करना पड़ता है तथा पत्रकार अपने कार्य से भटक जाता है। अत: पत्रकार पर शिकायत के आधार पर विभिन्न धाराओं मेें प्रकरण पंजीबद्ध न कर धारा 154 के तहत प्रकरण दर्ज हो फिर प्रकरण की जांच उपरांत पत्रकार दोषी पाया जाता है तो नियमानुसार कार्यवाही की जाये। जिले स्तर पर जांच समिति बनाई जाये उसमें पत्रकार, जनसंपर्क अधिकारी एवं पुलिस अधिक्षक हो।
ऐसी समिति बनाने हेतु एमपी वर्किंग जर्नलिष्ट यूनियन द्वारा तत्कालीन गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता को पत्र लिखा था। गृहमंत्री द्वारा पुलिस महानिदेशक से टीप मांगी गई। इसी तरह पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की मांग विगत दो वर्षों से एमपी वर्किंग जर्नलिष्ट यूनियन द्वारा लगातार की जा रही है जिले तहसील मुख्यालय पर ज्ञापन दिये गये।
प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के द्वारा पत्रकारों के हित में कई कार्य किये गए हैं। उनके द्वारा एक कार्यक्रम में सुरक्षा कानून बनाने की बात भी कही गई थी। अत: हमारे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मांग है कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा पत्रकार सुरक्षा कानून की तर्ज पर कानून बनाया जाय तथा जिला स्तर पर पत्रकारों पर दर्ज प्रकरणों की जांच हेतु समिति बनाने के आदेश दिये जायें।






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