मंडी सचिव की मौन स्वीकृति से मंडी के बाहर खरीदा जा रहा है किसानों का अनाज
कृषि मंडी में उपज की आवक पांच हजार, दर्शाए जा रहे हैं सिर्फ दो हजार बोरा

शिवपुरी। एक तरफ तो प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खेती को लाभ का धंधा बनाने की बात कर हैं साथ पांच बार इन किसानों की दम पर कृषि कर्मठ अवार्ड भी प्राप्त कर चुके हैं। लेकिन वहीं शिवपुरी में इन किसानों के साथ खुलेआम मंडी सचिव द्वारा ठगी कराई जा रही है। कृषि उपज मंडी में लगातार बढ़ रही उपज को कृषि मंडी के कर्ताधर्ताओं को मंडी की आवक को कम करने की दृष्टि से कागजों में मंडी की आय कम दिखाई जा रही है। जबकि हकीकत कुछ और ही है शिवपुरी मंडी में इन दिनों जमकर आवक हो रही है। यहां बताना होगा कि मंडी में किसानों को सुविधायें उपलब्ध नहीं हो पा रही है। बाजारों में समानांतर मंडी के जरिये आधा दर्जन स्थानों पर पर पुराने तौल कांटों पर किसानों की उपज धड़ल्ले से तौलकर खरीदी जा रही है। इस सब बात की जानकारी स्थानीय मंडी प्रशासन को होने के बाद भी इन व्यापारियों कार्यवाही क्यों नहीं की जाती है। यह साफ तौर यहीं कहा जाता है मंडी प्रशासन की मिली भगवत का खुला खेल चल रहा है। यह बात सत्य है कि शिवपुरी मंडी किसानों के साथ खुलेआम ठगी की जा रही है। क्योंकि यहां पर पुराने तौल कांटे व बांट नापतौल विभाग द्वारा सालों सत्यापित नहीं कराए जा रहे हैं। जबकि कुछ मंडी व्यापारियों द्वारा पुराने इलैक्ट्रोनिंक कांटों को अपने हिसाब से सेट करके तौल की जा रही है जिससे किसानों के साथ खुलेआम ठगी की जा रही है। स्थानीय मंडी कर चोरी से लेकर कृषकों का शोषण करने में काफी बदनाम हो गई है। इन दिनों मंडी में पांच हजार बोरा चना, मसूर एवं गेंहू की आवक हो रही है, लेकिन शासकीय दस्तावेजों में केवल दो हजार बोरा आवक दर्शाई जा रही है, कोई देखने सुनने वाला नहीं है। व्यापारियों द्वारा प्रति बोर जिंस पर किसान से छह रूपए लिए जा रहे है, लेकिन किसान को अपने हाथों से उपज की भरी बोरियां तौल कांटों तक लाना पड़ रही है, जबकि यह काम मजदूरों व हम्मालों का है। मंडी में किसानों सरेआम ठगा जा रहा, लेकिन सुनवाई नहीं होने से किसान चुपचाप हैं। पिछले काफी समय टिके सचिव मंडी में कम व्यापारियों के घरों पर ज्यादा बैठे नजर आते हैं। यदि मंडी की सही आय का पता लगाना है तो मंडी के तुलावटियों को मिलने वाली हर रोज की मजदूरी के अनुपात में मंडी में आने वाली उपज का मिलान कराया जाए तो टैक्स चोरी के प्रमाणित मामले उजागर होने में देर नहीं लगेगी।
नहीं काटी जा रही 82-2 की पर्ची
चैक पोस्ट पर नियमानुसार एक अनुज्ञा पत्र पर एक ही वाहन निकासी का प्रावधान है, लेकिन सिस्टम की मिली भगत के चलते एक अनुज्ञा पत्र पर उपज से भरे कई वाहनों को निकाला जा रहा है। मंडी में 37,1 एवं 82, 2 की पर्चियां काटी जाती हैं, 37.1 की पर्ची अनुमानित वजन की होती है और 82.2 की पर्ची वास्तविक वजह की होती है, लेकिन व्यापारियों से साठगांठ के चलते 82.2 की पर्ची बहुत कम काटी जा रही है और उसका 37.1 की पर्ची से मिलाना भी नहीं कराया जा रहा है। इसी प्रक्रिया में ही सबसे अधिक गड़बडिय़ा है। प्रशासन व मंडी बोर्ड के समक्ष अधिकारियों द्वारा जानबूझ कर की जा रही अनदेखी मंडी के हालात काफी बिगड़ रहे हैं। जिससे किसान मंडी की अपेक्षा बाजार में उपज विक्रय करने को मजबूर हो रहे हैं। जहां उपज के बाजिव दाम भी नहीं मिल रहे हैं। सचिव की गैरहाजिरी में एक उप निरीक्षक द्वारा मंडी के मनमाने तरीके से संचालित कर कानून की फजीहत की जा रही है।
सचिव की करतूतों से मंडी में फसल बेचने से कतराते हैं किसान
कहने को जिले की कृषि उपज मंडी पूर्व से ही बदनाम बनी हुई है, लेकिन इन मंडी सचिव के आते से ही और हालात बिगड़ गए हैं। इसी का कारण है कि मंडी में किसान फसल बेचने से कतराने लगे हैं और शहर के बाहर व्यापारियों द्वारा सजा रखे अपने फड़ों पर किसान अपनी फसल विक्रय कर रहे हैं। इसी का जीता जागता उदाहरण मंडी गेट पर ही देखा जा सकता है। किसानों की उपज मंडी में प्रवेश करने के बाद भी फसल पुन: गाड़ी को बाहर बुलाकर तौल ली जाती है। यह नजारा मंडी के नाकेदार खड़े-खड़े देखते रहते हैं। जबकि इन नाकेदारों द्वारा मंडी में फसल विक्रय के लिए किसानों को समझाना चाहिए और अवैध रूप से मंडी के बाहर फसल खरीद रहे लोगों के खिलाफ कार्यवाही की जाना चाहिए लेकिन इस तरह की मंडी सचिव द्वारा आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई।
नाकेदार वसूली में मसगूल
मंडी सचिव की सह पर जगह-जगह घूम कर अवैध फड़ संचालित करने वाले लोगों से यह नाकेदार खुले रूप से पैसे बसूलते हुए देखे जा सकते हैं। इतना ही नहीं इस बात का खुलासा करना है तो इन नाकेदारों पिछले एक माह में कितनी कार्यवाही की गई है। इस बात की जानकारी ले ली जाए तो इनकी कलई खुल जाएगी। क्योंकि इनका सिर्फ और सिर्फ एक काम है कि अवैध फड़ संचालित करने वालों पर बसूली करना न की इन अवैध फड़ संचालित होने वालों कार्यवाही करना।






Be First to Comment