सतना, । यदि अब कोई तलाक देता है तो
उसे सीधे फांसी की सजा होनी चाहिए। यह बाते सतना के नजीराबाद मोहल्ले की
रहने वाले तीन तलाकशुदा महिलाओं से बातचीत के दौरान कही। दरअसल
नजीराबाद निवासी खुशबू बानो की शादी 2007 में इलाहाबाद में हुई थी।
शादी
के बाद से खुशबू का पति दहेज के लिए प्रताड़िता करता था और उसके साथ मारपीट
करता था। इस दौरान खुशबू 6 सालों तक अपने पति द्वारा किए जा रहे अत्याचार
को सहते आ रही थी और जब उसके पति को लगा कि अब उसे दहेज में कुछ नहीं मिलने
वाला है तो उसने 2013 को सोते समय खुशबू को तलाक दे दिया था।
तलाक
होने के बाद खुशबू वापस अपने घर आ गई। मंगलवार को तीन तलाक का फैसला आने के
बाद खुशबू के चेहरे में छाई मायूसी अचानक खुशियों में तब्दील हो गई। तलाक
से पीड़ित खुशबू ने अपनी खुशियां जाहिर करते हुए कहा कि तीन तलाक के फैसले
से आने वाले समय में मुस्लिम महिलाओं के साथ अब नाइंसाफी होना बंद हो
जाएगा।
ऐसा लग रहा है जैसे आज ईद हो
मध्यप्रदेश
में तलाक पीड़िताओं में सबसे अमानवीय केस जो सामने आया वो सतना की शबाना
निशा का था। उसके शौहर ने नींद में ही उसे तलाक दे दिया था। सुप्रीम कोर्ट
में खड़े होकर न सही पर सतना के नगीनाबाद जैसे छोटे से मोहल्ले से वो अपनी
जैसी 20-25 मुस्लिम तलाकशुदा लड़िकयों के साथ मिलकर तीन तलाक के खिलाफ लड़ाई
लड़ रही थी। वो बोली-आज तो हमारी ईद मन गई। बंद आंखों से सपना टूटा था और आज
खुली आंखों से हकीकत संजो रही हूं।
थैला सीकर बूढ़ी मां, भाई-बहन का
परिवार पाल रही रजीवन शबाना के साथ यह ज्यादती एक बार नहीं, बल्कि दो -दो
बार हुआ। 24 साल की शबाना को शादी के एक साल बाद ही उसके पहले शौहर ने किसी
के हाथ संदेश भेजकर तलाक दे दिया। दूसरी बार शबाना का निकाह उप्र के बांदा
में हुआ।
एक दिन जब शबाना सोकर उठी तो उसके शौहर ने कहा कि उसने उसे
तलाक दे दिया है। पीहर लौटकर शबाना भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन के साथ
मिलकर 2012 से तीन तलाक के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है। शबाना हो या मोबाइल पर ही
तलाक पाने वाली 26 वर्षीय खुशबू, की जिंदगी भले ही न बदले पर उन्हें
उम्मीद है कि उनके लिए भी रास्ता खुलेगा।
फैसले का करेंगे स्वागत
मैं
इस फैसले से बेहद ही खुश हूं। तीन तलाक के फैसले से दूसरी मुस्लिम महिलाओं
का जीवन खुशी से भरा होगा। रविवार को हम सभी मुस्लिम महिलाएं घर पर
कार्यक्रम का आयोजन करके तीन तलाक के इस फैसले का कुछ अलग ही ढंग से स्वागत
करेंगे। – तराना बेगम, तलाकशुदा
यह फैसला
देश की मुस्लिम महिलाओं की जीत का फैसला है। इससे तलाक के नाम पर मुस्लिम
महिलाओं के साथ होने वाली नाइंसाफी पर रोक लगेगी। मैं सुको के इस फैसले का
जोरदार स्वागत करता हूं। – अब्दुल हफीज कादरी, समाजसेवी
तीन
तलाक के फैसले से मुस्लिम समाज की महिलाओं को न केवल न्याय मिलेगा बल्कि
उनका दांपत्य जीवन भी सुरक्षित रहेगा। इस फैसले से मुस्लिम औरतों को एक नई
उम्मीद मिली है। – शमीम खान, आम नागरिक
शौहर ने सोते समय दिया था तलाक, फैसला आते ही उनके चेहरे पर आई खुशी
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