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राई की पहचान है बाबा भैंरव जी से, आज राई के पास विशाल भैंरव मेला

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कोलारस। 
शिवपुरी जिले की तहसील कोलारस का ग्राम राई पोराणिक धरोहर का मेहत्वपूर्ण
ग्राम है जिसमें  5 हजार साल पूर्व के निर्माण आज भी दर्शनिय है। श्री
भैंरव मंदिर, श्री रामेश्वर मंदिर, श्री जैन मंदिर, पिसनहारी मठ सभी की
प्राचीरो, दीवालो को एक मीटर लम्बे ढेड फिट चौंडे, पॉन फिट मोटे पत्थरो से
उस काल में बनाया गया था जब इस दुनिया में सीमेन्ट और चूना पैदा ही नही हुआ
था। मिलावट में बैलेंस के लिए स्थानीय लोहे का इस्तैमाल किया था। जो ग्राम
राई में देश आजाद होने तक निकलता था। इसी कारण राई से लगा हुआ एक रेविन्यू
ग्राम लुहारपुरा के नाम से है। भैंरव जी की प्रतिमा करीब 10 फिट ऊंची है
जो गहरे बलुऐ पत्थर पर बनी हुई है। पास में एक प्राचीन विशाल तालाब बना हुआ
है जिसकी एक साजिस के तहत दीवाल तोड कर भराव क्षेत्र में खेती होने लगी
है। जब कि पूर्व में आस पास के 10 ग्रामो का जल स्तर हमेशा इसी तालाब की
बजह से ऊपर रहता था। और क्षेत्र हमेशा हरा भरा रहता था। शेरो की गर्जना
यहां के जंगल की शान थी किशनहारी मठ के छज्जो की बनावट उनका डिजाइन वास्तु
शिल्प जिसका क्रेज महा नगरो में है। यहां 5 हजार साल पहले वह डिजाइन होना
स्तव्ध करने बाला तथ्य है। सुरम पहाडियों में जगह- जगह पत्थर काट कर ऋषि
मुनियो की तपो भूमियां की गुफाऐं आज भी आकर्षन का केन्द्र बनी हुई है।
बनखंडेश्रवर गुफा इस क्षेत्र की हमेशा से जीवन प्रेरणादायी गुफा रही है।
किम्वदन्ति है कि इस गुफा पर महात्मा जी की थकावट जंगली शेर उनके पैर के
तलवे चाट चाट
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