अपराधी कितना ही शातिर क्यों न हो वह घटना स्थल पर कोई न कोई साक्ष्य अवश्य
छोड़कर जाता है आवश्यकता इस बात की है कि हम विवेचना गंभीरता से करें। साथ
ही कभी भी डेथ बॉडी के गीले बालों को पेक कर न रखे,सावधानी यह रखें कि
बालों को सुखाकर ही पैक किया जाए। इन्हे धूप में और पंखे की हवा में न
सुखाएं वरन छाया में सुखाएं जिससे इन्हे 5 साल तक संरक्षित रखा जा सकता है।
यह बात जिले के सभी थाना प्रभारियों को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय विधि
विज्ञान प्रयोगशाला ग्वालियर के वैज्ञानिक संयुक्त निदेशक एस पी शर्मा ने
कही।
पुलिस कंट्रोल रूप में आयोजित एफ एस एल सेमीनार के दौरान शर्मा ने कहा
किसी भी केस की विवेचना यदि गंभीरता से की जाए तो मौके से ही बहुत से
साक्ष्य जुटाए जा सकते है। उन्होंने सेमीनार के दौरान अपराधों में घटनास्थल
से भौतिक साक्ष्यों को कैसे एकत्रित करना है,कैसे पैकिंग होनी है,कैसे
जांच के लिए भेजना है। इस विषयों पर विवेचकों को विस्तार से जानकारी दी
जिसमें जिले के अधिकांश थाना प्रभारियों ने भागीदारी की। सेमीनार में
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ विनोद ढींगरा,एम के जुझारिया ने भी कई टिप्स दिए।
आयोजन में पुलिस अधीक्षक सुनील पांडेय,जिला वैज्ञानिक डॉ एच एस
बरहादिया,एसडीओपी जी डी शर्मा,आर आई अरविंद सिकरवार,टीआई संजय मिश्रा,सहित
सभी थानों के थाना प्रभारी भी मौजूद थे।
निर्देशों को पुस्तक में संग्रहित कर हर थाने में भिजवाएंगे
सेमिनार
में दिए गए निर्देशों को हम पुस्तक के रुप में संग्रहित कर हर थाने को
भिजवाएंगे। सेमिनार में विवेचकों की शंकाओं का भी समाधान हुआ। एस के
पांडेय,एस पी शिवपुरी
डीएनए की जांच कब और क्यों आवश्यक है
अज्ञात व्यक्ति की मृत बॉडी से बाल,दांत,पीबिया बोन,जब्त कर उन्हें थानों में रखें।
थाने
पर परिजन आए तो कपड़े की पहचान मात्र से तस्दीक न करें वरन और तथ्य भी
देखें उसके निकटतम लोगों के ब्लड सेंपल लेकर के डीएनए जांच कराएं ।
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के केस में महिला आरोप लगाए कि उसके साथ 5 लोगों ने दुष्कृत्य किया है।
ऐसे में उसके वेजाइनल स्लाइड बनाकर तथा आरोपियों के ब्लड सेंपल से जांच
कराएं और डीएनए भी कराएं क्योंकि किसी निर्दोष को सजा नहीं मिली चाहिए और
दोषी बचना नहीं चाहिए।
जब
माता पिता और बच्चे के विवाद के केस हों और उसमें माता या पिता कहे यह
मेरा बेटा नहीं है तो ऐसे केस में डीएनए की जांच से खुलासा हो जाएगा।
अस्पताल में बच्चे बदलने के केस आते है कि बेटा था बेटी दे दी आदि इन केसों को गंभीरता से लेकर डीएनए की जांच कराएं ।
टिप्स : अपराधी कितना ही शातिर हो घटना स्थल पर साक्ष्य जरूर छोड़ता है
सिर पर लगे गोखरू से पता चला हत्या का मामला है
विधि विज्ञान प्रयोगशाला ग्वालियर के वैज्ञानिक संयुक्त निदेशक एस
पी शर्मा ने कहा कि थाना प्रभारी विवेचना स्थल का गंभीरता से मौका मुआयना
कर निगरानी रखें,क्योंकि दुनिया का कितना ही शातिर अपराधी क्यों न हो वह
मौके पर छोड़े गए साक्ष्य से पकड़ में आ सकता है। गुना का एक उदाहरण देते हुए
उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति के कमर से दो हिस्से की लाश रेलवे ट्रैक पर
मिली बताया गया कि उसने आत्महत्या की है। जब मौके का मुआयना किया तो पता
चला कि मृतक के सिर पर गोखरू लगे है। इसके बाद आसपास पड़ताल की तो खुलासा हो
गया कि किस तरह से युवक की लाश को ठिकाने लगाने के लिए उसे घसीटकर
आरोपियों ने पटरी पर छोड़ गए थे।





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