फर्जी आधार नंबर से लिंक हुए थे 5 लाख राशन कार्ड

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डिंडौरी। फर्जी आधार नंबर से लिंक हुए प्रदेशभर में 5
लाख से अधिक राशन कार्ड संदेह के दायरे में हैं। समग्र आईडी और आधार कार्ड
से जब राशन कार्डों को जोड़ने का अभियान चला तो बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है।
नगर प्रशासन के साथ ग्राम पंचायतों की भूमिका इस मामले में संदिग्ध है।
प्रदेश की राजधानी भोपाल में 24709 तो आर्थिक राजधानी इंदौर में ही 17227
फर्जी आधार नंबर से राशन कार्डों को लिंक कर राशन में गोलमाल किया गया है।
प्रदेशभर
में यह आंकड़ा 5 लाख 33 हजार 154 का है। इन सभी राशन कार्डों में फर्जी
आधार नंबरों का उपयोग कर ऑनलाइन रजिस्टर्ड कर दिया गया था, लेकिन जब समग्र
आईडी से जोड़कर आधार कार्ड को राशन कार्ड से लिंक करने का काम शुरू हुआ तो
राशन कार्ड में ऑनलाइन भरे गए आधार नंबर फर्जी सामने आए हैं। विभागीय
अधिकारियों को अब डाटा सुधारने में पसीना आ रहा है। शासन ने आदेश जारी कर
अब इन्ही फर्जी आधार नंबरों से लिंक किए गए राशन कार्डों के माध्यम से दिए
जा रहे राशन वितरण पर रोक लगा दी है।
लंबे समय से चल रहा था खेल
प्रदेशभर
में 5 करोड़ 35 लाख 49 हजार से अधिक बीपीएल राशन कार्डधारी हैं, उन्हें एक
रुपए किलो गेहूं और चावल मिल रहा है। इस पूरे मामले में ग्राम पंचायतों की
भूमिका भी संदेह के दायरे में है। पंचायत स्तर से बीपीएल कार्ड बनाने से
लेकर पात्रता पर्ची देने तक में बड़ा गोलमाल किया गया।
2014-15 में जब
सेल प्वाइंट मशीन से राशन वितरण का अभियान शुरू हुआ तो इसी दौरान राशन
कार्ड से आधार कार्ड को लिंक करना अनिवार्य किया गया। पंचायत सचिवों व नगर
प्रशासन के जिम्मेदार अमले ने आधार कार्ड से राशन कार्ड को लिंक करने में
ही फर्जीवाड़ा कर दिया। चौकाने वाली बात तो यह सामने आई कि 5 लाख से अधिक
राशन कार्डो में फर्जी आधार नंबर भरकर उन्हे लिंक करना सामने आया है।
इनका कहना है
आधार
कार्ड फीडिंग के दौरान यह गड़बड़ी हुई है। पंचायत व नगर प्रशासन के
जिम्मेदारों ने मनमानी करते हुए फर्जी आधार नंबर से राशन कार्ड को लिंक
किया था। कई परिवार के डबल राशन कार्ड भी बन गए थे। मैंने इसे गंभीरता से
लेते हुए पहल कराई है। मैंने आदेश भी अब जारी कर दिया है कि उतने ही नए नाम
बीपीएल सूची में जुड़ेंगे, जितने नाम काटे जाएंगे। अनियमितता अब किसी हाल
में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

ओमप्रकाश धुर्वे खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति केबिनेट मंत्री, मप्र शासन।


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