भोपाल। नोटबंदी से कांग्रेस ही
नहीं भारतीय जनता पार्टी भी प्रभावित हुई है । भाजपा अपने पार्टी
पदाधिकारियों, सांसद और विधायकों से आजीवन सहयोग निधि के रूप में हर साल
चंदा वसूलती है। पर इस साल वह अपना टारगेट पूरा नहीं कर पाई। वहीं कांग्रेस
की माली हालत किसी से छिपी नहीं है। उसके पास पार्टी कार्यालय के
कर्मचारियों को पैसा देने के लिए भी फंड नहीं है। पार्टी विधायकों से उनका
एक महीने का वेतन मांगकर अपने खर्चे चला रही है।
पिछले साल हुआ था 10 करोड़ का चंदा
भाजपा
सूत्रों के मुताबिक आजीवन सहयोग निधि का चंदा पिछले साल 2015-16 में 10
करोड़ स्र्पए हुआ था। जबकि मौजूदा साल 2016-17 में पार्टी सिर्फ साढ़े नौ
करोड़ रूपए ही चंदा वसूल पाई। वर्ष 2014-15 में 9 करोड़ और 2013-14 में साढ़े 7
करोड़ का चंदा पार्टी फंड में आया था। सूत्रों के मुताबिक इसमें से
ज्यादातर पैसा विधायक, सांसद नगद में देते थे। कुछ पैसा चेक से भी मिलता
था। इस साल नोटबंदी की वजह से पार्टी को चंदा कम मिला। दूसरी वजह पार्टी ने
चेक से फंड लेना अनिवार्य कर देने से भी चंदा आंकलन के मुताबिक हासिल नहीं
हो पाया है।
कांग्रेस से उद्योगपतियों ने बनाई दूरी
कांग्रेस
इन दिनों भीषण गरीबी के दौर से गुजर रही है। प्रदेश संगठन की हालत ये है
कि उसके पास कार्यालय के कर्मचारियों को देने लायक भी चंदा नहीं आ पाता है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार पीसीसी को हर महीने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी
द्वारा 8 लाख रूपए दिए जाते हैं।जिससे कर्मचारियों का वेतन,बिजली बिल,
टेलीफोन के बिल और डीजल आदि के खर्चे चलते हैं।
पार्टी के नेताओं की
माने तो राज्य में सरकार जाने के बाद से उद्योगपतियों ने एकदम दूरी बना ली
।संगठन के पास सिर्फ जवाहर भवन जैसी व्यावसायिक सम्पत्ति है वो औने पौने
दाम पर किराए पर दी गई है ऐसे हालात में उसके पास आय का कोई जरिया नहीं बचा
है। सदस्यता से आने वाला पैसा भी बहुत ज्यादा नहीं है।
एआईसीसी ने मांगे एक एक लाख
कांग्रेस
की माली हालत सुधारने के लिए कुछ महीने पहले पार्टी के कोषाध्यक्ष मोतीलाल
वोरा ने प्रदेश के सभी विधायकों को पत्र लिखकर एक एक लाख रूपए का सहयोग
मांगा था । इसके अलावा भी पार्टी के प्रदेश संगठन को हर विधायक हर महीने दो
दो हजार रूपए की मदद करता है।
अचल सम्पत्ति में भी भाजपा आगे
अचल
सम्पत्ति की बात की जाए तो भी भाजपा कांग्रेस से कहीं ज्यादा आगे है।
भाजपा के जितने भी अनुशांगिक संगठन हैं उन सभी के अलग अलग भवन हैं।अखिल
भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय मजदूर संंघ, आरएसएस, विद्या भारती, विश्व
हिन्दू परिषद सहित कई संगठनों के आलीशान भवन हैं। भाजपा के आंतरिक संगठन के
हिसाब से प्रदेश में उसके 56 जिले है। उनमें से 40 से ज्यादा जिलों में
पार्टी कार्यालय के अपने भवन बने हुए हैं। वहीं कांग्रेस की अचल सम्पत्ति
देखी जाए तो भोपाल में जवाहर भवन और पीसीसी भवन के अलावा कोई अचल सम्पत्ति
नहीं है। अधिकांश जिलों में भी उसके पास न तो भवन हैं ओर न ही जमीन आवंटित
है।
अभी जवाहर भवन को किराए पर दिया है। उससे आय बढ़ेगी। बाकी जिला
इकाईयां और एआईसीसी भी आर्थिक मदद करती हैं। कुछ चंदा एकत्र कर पार्टी की
गतिविध्ाियां संचालित की जाती है। कार्यकर्ताओं से भी मदद लेते हैं
– अरुण यादव, अध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस कमेटी
कम हो गया भाजपा का चंदा
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