भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी
कराने वाले कोचिंग संस्थानों की मनमानी रोकने के लिए कानून लाने जा रही है।
मप्र कोचिंग संस्थान (नियंत्रण एवं विनियमन) विेधेयक का मसौदा लगभग तैयार
हो गया है जो विधानसभा के शीतकालीन सत्र में लाया जा सकता है।
इसके
तहत अब कोचिंग संस्थान फीस तय नहीं करेंगे, बल्कि सुविधाएं और शिक्षकों की
शैक्षणिक योग्यता के आधार पर सरकार फीस तय करेगी। यदि ज्यादा सुविधाएं देने
वाले कोचिंग संस्थान फीस बढ़ाना चाहेंगे तो उन्हें सरकार से अनुमति लेना
होगी।
विभाग के अधिकारी जल्द ही इस मसौदे पर कोचिंग संचालकों से भी
चर्चा करने वाले हैं। विभाग ने जो मसौदा तैयार किया है, उसके तहत सभी
कोचिंग संस्थानों को सरकार के पास पंजीयन कराना अनिवार्य होगा।
पंजीयन
के वक्त सरकार संस्थानों से उनके पास मौजूद सुविाओं की जानकारी जुटाएगी।
इसमें कक्षाएं, अध्ययन सामग्री, शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता और उनका
वेतन, ऑनलाइन क्लास आदि शामिल रहेंगे। इस आधार पर कोचिंग संस्थानों की
अलग-अलग फीस तय की जाएगी। ऐसा ही फॉर्मूला कॉलेजों की फीस तय करने के लिए
उपयोग किया जाता है।
पढ़ाना होगा 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को
विधेयक
में निजी स्कूलों की तरह कोचिंग संस्थानों के लिए यह प्रावधान किया जा रहा
है कि अपने संस्थान में 25 प्रतिशत आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को प्रवेश
दें। कोचिंग में पढ़ने वाले ऐसे सभी विद्यार्थियों की जानकारी देना होगी।
बीच में कोचिंग छोड़ी तो लौटाना होगी फीस
नए
प्रस्ताव के तहत यदि कोई विद्यार्थी बीच में कोचिंग छोड़ देता है तो कोचिंग
संस्थान को फीस वापस लौटाना होगी। अब तक संस्थान फीस जमा होने के बाद वापस
नहीं लौटाते थे। मजबूरी में विद्यार्थी को उसी कोचिंग में पढ़ना पड़ता था।
स्कूल के समय पर नहीं ले सकेंगे कोचिंग
कानून
लागू होने के बाद संस्थान स्कूल के समय पर कोचिंग नहीं लगा सकते। शिक्षा
विभाग का मानना है कि इससे विद्यार्थी स्कूल जाने की बजाय कोचिंग जाना पसंद
करते हैं। इसके साथ ही कुछ स्कूलों में चल रही कोचिंग पर प्रतिबं लगाया
जाएगा। कोचिंग संस्थान को पंजीयन कराते वक्त अपना पता देना होगा। इसके
अलावा कहीं और कक्षाएं नहीं लगाई जा सकेंगी।
उल्लंघन पर दो लाख का जुर्माना
कोचिंग
संस्थान यदि इस कानून का उल्लंघन करते हैं तो उन पर दो लाख रुपए का
जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही पंजीयन भी रद्द कर दिया जाएगा। इस पर
अपील का प्रावधान किया गया है।
बिहार और गोआ की तर्ज पर तैयार किया मसौदा
राज्य
सरकार ने बिहार और गोआ में लागू कानून की तर्ज पर विधेयक का मसौदा तैयार
किया है। बिहार में 2010 और गोवा में 2001 में कोचिंग संस्थानों पर
नियंत्रण लगाने के लिए कानून बन गया था।
कानून में ये भी महत्वपूर्ण प्रावधान
– कोचिंग की हर शाखा के लिए अलग से पंजीयन कराना होगा
– सरकारी नौकरी करने वाले शिक्षक कोचिंग संस्थान में नहीं पढ़ा सकेंगे
– भ्रामक विज्ञापन नहीं कर सकेंगे
– कोचिंग का समय सारणी, फीस और शिक्षकों की जानकारी नोटिस बोर्ड पर चस्पा करनी होगी
– अध्ययन सामग्री, विवरण पुस्तिका के लिए अलग से फीस नहीं ले सकते।
मनमानी फीस नहीं ले सकेंगे कोचिंग संस्थान , सरकार लाएगी कानून
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