कुत्ते और इस इंसान के प्रेम की दीक्षित परिवार ने की मिशाल पेश मौत के बाद किया अंतिम संस्कार, तेरहवीं में कुत्तों को कराया भोज

अजयराज सक्सेना

शिवपुरी। लगाव जीवन में किसी के भी साथ हो सकता है अब चाहे वह इंसान हो या फिर जानवर। कभी-कभी तो यह लगाव इतना ज्यादा हो जाता है कि उसके चले जाने के बाद भी हम उसे भूल नहीं पाते। कुछ ऐसा ही नजारा शिवपुरी के हाथीखाने में रहने वाले एक शख्स मुकेश दीक्षित के अन्दर दिखा। उसे व उसके परिवार को अपने कुत्ता कृष्णा से इतना ज्यादा लगाव हो गया था कि वह उसे परिवार का एक सदस्य मानने लगे और उसके गुजर जाने के बाद उसकी बकायदा इंसानों की तरह शव यात्रा निकाली गई और उसका अंतिम संस्कार किया गया। दीक्षित परिवार की जानवर प्रेम की कहानी यहीं तक नहीं रुकी, बल्कि आज तेरहवीं का कार्यक्रम भी रखा और जगह-जगह पर कुत्तों को भोज कराया गया। भले ही जानवर बेजुबान होते हैं, कुछ बोल नहीं सकते लेकिन उनमें भी एक दूसरे के लिए प्रेम का भाव होता है। इस तरह की मिशाल आज दीक्षित परिवार ने पेश की।

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13 वर्ष पूर्व प्रारंभ हुई थी दीक्षित परिवार और कृष्णा के बीच लगाव की कहानी

शिवपुरी के हाथी खाना निवासी मुकेश दीक्षित ने बताया कि 13 वर्ष पूर्व उन्होंने एक कुत्ते को पाला था और उसका नाम उन्होंने कृष्णा रखा। धीरे-धीरे कृष्णा बड़ा होता गया और परिवार के सभी सदस्यों का उससे लगाव बढ़ता गया और इस प्रकार वह परिवार का एक सदस्य बन गया। कृष्णा से परिवार में सबसे लगाव मुकेश के भाई चंद्रप्रकाश दीक्षित का था जो हमेशा कृष्णा का ख्याल रखते थे।

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डॉ. खान ने किया कई बार इलाज

जब भी कृष्णा किसी बीमारी से पीडि़त होता था तो दीक्षित परिवार डॉ. खान से इलाज कराते थे। 13 वर्ष के अंतराल में डॉ. खान ने कई बार कृष्णा का उपचार कर उसे ठीक किया। खासबात यह थी कि दीक्षित परिवार के जानवर प्रेम को देखकर डॉ. खान को भी कृष्णा से खासा लगाव हो गया था। 

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पहले अंतिम संस्कार फिर तेहरवी

विगत 24 अक्टूबर को रात्रि 8.45 बजे कृष्णा (कुत्ता) ने अंतिम सांस ली। इसके बाद दीक्षित परिवार ने इंसानों की तरह अर्थी तैयार की और फूल मालाओं से सजाकर कृष्णा की शव यात्रा निकाली गई। शवयात्रा रात्रि 10.30 बजे निकाली गजिसमें आसपास के कई नागरिक भी शामिल हुए और रेलवे पटरी के पास जाकर विधि विधान से कृष्णा को दफनाया गया। आज दीक्षित परिवार ने अपने घर पर विधि विधान से हवन पूजन किया इसके बाद शहर के कई स्थानों पर पहुंचकर कुत्तों के लिए भोजन कराया गया। इस प्रकार दीक्षित परिवार ने जानवर और इंसान के प्रेम की अनूठी मिशाल पेश की।

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मोक्ष के लिए लिया 5 ग्यारस के व्रत का संकल्प

मुकेश दीक्षित ने बताया कि आज उसकी भतीजी अंकिता दीक्षित ने कृष्णा के मोक्ष के लिए 5 ग्यारस के व्रत करने का संकल्प लिया है। बच्चों में भी कृष्णा के प्रति खासा लगाव था। कृष्णा की मौत के बाद बच्चे काफी दुखी हैं।

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पूर्वजों की तरह दक्षिण दिशा में तस्वीर रखकर किया हवन: मुकेश

नोट- फोटो मुकेश दीक्षित का लगाएं।

मुकेश ने बताया कि कृष्णा हमारे बीच 13 वर्षों तक रहा। आज पूर्वजों की तरह दक्षिण दिशा में कृष्णा की तस्वीर रखकर विधि विधान से हवन कराया गया। उसे आस्क्रीम बहुत पसंद थी इसलिए उसकी तस्वीर के पास में आस्क्रीम भी रखी गई। मुकेश ने लोगों को संदेश देते हुए कहा कि किसी के भी घर में जानवर हो तो उसकी सुरक्षा बच्चों की तरह करनी चाहिए। कई लोगों को देखा जाता है कि वह शहर में घूम रहे कुत्तों को मारते-पीटते हैं तो इस तरह का बर्ताव गलत है। हमें जानवरों के साथ लगाव एवं प्रेम रखना चाहिए।

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इनका कहना है

-मैंने जानवर प्रेम का इससे पूर्व इस तरह का नजारा नहीं देखा। मैं दीक्षित परिवार का पड़ोसी हूं इसलिए मैंने परिवार का कुत्ते से लगाव का नजारा कई बार देखा है। जब भी मेरे दोस्त अर्पित के पिताजी कहीं से घर पर आते थे तो कृष्णा तुरंत आता था और उन्हें चांटने लगता था।

अंकित कुमार वर्मा, पड़ोसी


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