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चार माह का वर्षाकालीन चातुर्मास व्यतीत करने के बाद मुनिश्री का हुआ खनियाधाना से मंगल विहार

खनियांधाना। नगर के श्री पाश्र्वनाथ दिगं. जैन बड़ा मंदिर में पिछले करीब चार-पांच माह से चातुर्मास कर रहे आचार्य विराग सागर के शिष्य मुनि श्री विशोक सागर जी महाराज एवम मुनि श्री विधेय सागर जी महाराज का मंगल विहार आज खनियाधाना से हुआ । इस अवसर पर आज सोमवार को दोपहर में मुनि श्री के प्रवचनों का विशेष आयोजन मंदिर जी के प्रवचन हॉल में किया गया जिसमें मुनि श्री ने खनियाधाना में बिताये अपने वर्षाकालीन समय को  स्मरण करते हुए जैन समाज की भक्ति एवं श्रद्धा की प्रशंसा की तथा युवाओं के विशेष उत्साह है को भी सराहा तथा उपस्थित श्रद्धालुओं को धर्म से जुड़े रहने की नसीहत देते हुए प्रतिदिन देव शास्त्र गुरु के प्रति पूरी निष्ठा एवं भक्ति भाव से जुड़े रहने की अपील की। नगर की जैन समाज को आज सुबह जैसे ही पता चला कि दोपहर में मुनि श्री का मंगल बिहार खनियाधाना से ग्राम अछरौनी की ओर हो रहा है तो उनको विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं एवं बच्चे भी नगर की सीमा तक पैदल गए। रास्ते में जगह-जगह मुनि श्री के पाद प्रक्षालन कर भक्तों ने आशीर्वाद लिया। पिछले चार-पांच माह से मुनिश्री के द्वारा प्रतिदिन प्रवचनों के माध्यम से नगर में जो धार्मिक माहौल बना हुआ था तो उनके जाने से पकड़ो की आंखों में आंसू आ गए बताया गया है कि मुनिश्री खनियाधाना से ग्राम अछरौनी होते हुए बामौर कला, चंदेरी की ओर बिहार करेंगे।

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