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नरवर नप में दिखाई देने लगीं चुनावी सरगर्मियां चुनाव लडऩे के आकांक्षु अपने-अपने आकाओं को लुभाने में जुटे

नरवर। सभी पार्टियों के संभावित उम्मीदवार अपने अपने आकाओं को आकर्षित और प्रेरित करने में समर्पित हो गए हैं। तेल-मील वाले पप्पू जी और मूंगफली-मील वाले जैन साहब के अलावा खान साहब और कुशवाह भाभी जी के नाम तेजी से गली-गली में चुनाव चौपाल के विषय बन गए हैं। तेल मील के पप्पू जी के विषय में विचार किया जाए तो पप्पू जी की प्रसिद्धि और प्रभाव के बारे में सभी अच्छी तरह से जानते है। सम्पन्नता के साथ-साथ गम्भीरता, उदारता और दूरदर्शिता के स्वामी पप्पू जी को पर्याप्त अनुभवों का भी स्वामी माना जाता है, लेकिन के.सी.सी. या जे.सी.सी. की ओर से पप्पू जी को रुकावटें मिल सकती हैं। इस प्रकार कुछ क्षेत्रीय धुरन्धर भी पप्पू जी को परेशानियां प्रदान कर सकते हैं। यदि मूंगफली मील वाले जैन साहब का विवरण देखें तो जैन साहब को पिछली पराजय के कारण सहानुभूति तो पर्याप्त मिलेगी, लेकिन सिर्फ  सहानुभूति के सहारे चुनावी जंग जीतना संभव नहीं है। भितरघातियों के कारण ही जैन साहब पहले भी परेशान हुए थे। अब आगे भी परेशान रहेंगे या नहीं यह तो चुनावी युद्ध के समय ही मालूम पड़ेगा । पिछले काफी समय से कुशवाह भाभी जी का नाम भी जनचर्चाओं का विषय बना हुआ है। नरवर की बेटी पूर्व कांग्रसी नेता स्व. भोला बाबा की बहू तथा युवा लाला जी की पत्नी कुशवाह भाभी जी के विषय में यदि उल्लेख किया जाए तो कुशवाह समाज के साथ-साथ अन्य समाजों में भी काफी प्रसिद्धि एवं सहयोग की स्थिति स्पष्ट दिखाई दे रही है क्योंकि कुशवाह भाभी जी के पतिदेव यानि कि लालाजी पिछले कई वर्षों से जनसेवा में समर्पित रहकर तन मन धन से सभी की समस्याएं सुलझाने और मदद करने में सक्रिय हैं इसलिए यदि कुशवाह भाभी जी की उम्मीदवारी और जीत को मजबूत माना जाए तो कदापि अनुचित नहीं होगा। 

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