शिवपुरी। अभी तक कोलारस उपचुनाव से दूरी बनाकर चल रहीं प्रदेश सरकार की कैबिनेट मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया की नाराजी सूत्रों के अनुसार अब दूर हो गई है और पार्टी ने उन्हें कोलारस उपचुनाव में फ्री हैण्ड देने का निर्णय लिया है। बताया जाता है कि दो तीन दिन में इसकी घोषणा हो जाएगी और यशोधरा राजे की प्रत्याशी चयन से लेकर चुनावी रणनीति बनाने में मुख्य भूमिका होगी।
कोलारस उपचुनाव की घोषणा दो दिन पहले ही हुई है, लेकिन इसके पहले लगभग डेढ़ माह से भाजपा ने चुनाव में पूरी ताकत फूंक दी थी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कोलारस के छह दौरे हो चुके हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान, संगठन महामंत्री सुहास भगत आदि के भी अनेक दौरे हो चुके हैं। प्रदेश सरकार के अनेक कैबिनेट मंत्री, राज्यसभा सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा, प्रदेश उपाध्यक्ष रामेश्वर शर्मा कोलारस में डेरा डाले हुए है, लेकिन यशोधरा राजे सिंधिया का अभी तक कोलारस में कोई दौरा नहीं हुआ। यहां तक कि वह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यक्रमों में भी शामिल नहीं हुई। यशोधरा राजे के कोलारस न आने को उनकी नाराजगी से जोड़ा जा रहा है। बताया जाता है कि यशोधरा राजे सिंधिया कोलारस उपचुनाव में फ्री हैण्ड चाहती थीं और पार्टी द्वारा उनकी इस शर्त को न मानने से उन्होंने कोलारस उपचुनाव से दूरी बना ली, लेकिन भाजपा ने डेढ़ माह में जो कसरत कोलारस में की उससे पार्टी को इतना तो एहसास हो गया कि यशोधरा राजे के बिना कोलारस का चुनाव जीतना उनके लिए आसान नहीं होगा। उधर सूत्र बताते हैं कि टिकट के दावेदार देवेंद्र जैन ने भी पार्टी से कह दिया था कि यदि यशोधरा राजे कोलारस में प्रचार के लिए नहीं आईं तो उनकी चुनाव लडऩे में कोई दिलचस्पी नहीं है। इन कारणों से पार्टी में यशोधरा राजे की मान मनोबल शुरू हो गई और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लुकवासा के दौरे के दौरान इस तरह के संकेत मिले कि यशोधरा राजे सिंधिया उनके साथ लुकवासा आएंगी, परंतु लुकवासा मुख्यमंत्री तो आए, लेकिन यशोधरा राजे नहीं आईं। अब सूत्रों की खबर है कि यशोधरा राजे सिंधिया को मना लिया गया है और भाजपा टिकट के एक दावेदार ने अपना नाम न छापने की शर्त पर इसकी पुष्टि भी की है।
कांटे से कांटा निकालने की रणनीति पर भाजपा!
कोलारस उपचुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया के मुकाबले उनकी बुआ यशोधरा राजे सिंधिया को सामने खड़ा कर सूत्र बताते हैं कि भाजपा कांटे से कांटा निकालने की रणनीति पर काम कर रही है, क्योंकि चुनाव में कोई भी जीते और कोई भी हारे, लेकिन कहीं न कहीं महल अवश्य कमजोर होगा। भाजपा के लिए वैसे भी 2018 के आमचुनाव को देखते हुए सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को कोलारस में आईना दिखाना जरूरी है, क्योंकि यह उपचुनाव प्रत्याशियों से ऊपर उठकर एक मायने में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच माना जा रहा है।
अब कई नाम चर्चा में आए
राजनैतिक हल्कों में यशोधरा राजे सिंधिया को कोलारस उपचुनाव की कमान मिलने की खबर से उम्मीदवारी की दौड़ में अब कई नाम चर्चा में आए हैं। अभी तक पार्टी टिकट के लिए मुख्य रूप से पूर्व विधायक देवेंद्र जैन, वीरेंद्र रघुवंशी और भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील रघुवंशी का नाम लिया जा रहा था, लेकिन अब इन नामों में यशोधरा राजे सिंधिया के नजदीकी आलोक बिंदल, रामस्वरूप रावत रिझारी आदि का नाम भी जुड़ गया है।
अनुशासित और निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में पहचाने जाते हैं आलोक बिंदल
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| आलोक बिंदल |
कोलारस में जन्मे आलोक बिंदल ने वैसे तो छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय हो गए थे, लेकिन 1986 में वे भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में पार्टी में शामिल हो गए। इसके बाद वह से उन्होंने भाजपा के अनुशासित एवं निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 1988 में भाजयुमो मंडल कोलारस के अध्यक्ष का कार्यभार संभाला, वर्ष 1989 में अम्मामहाराज के लोकसभा चुनाव में कोलारस नगर में सफल चुनाव संचालन किया, इसके बाद 1990 में भाजयुमो जिला शिवपुरी के उपाध्यक्ष का दायित्व मिला। श्री बिंदल राजनीति उन्हें परिवार से मिली। उनके ताऊजी राजाराम गुप्ता सांसद प्रतिनिधि, कोलारस विधानसभा से जनसंघ एवं भाजपा का 36 वर्षों तक चुनाव संचालक के रूप में कार्य किया। श्री बिंदल के पिताजी डॉ. बृजराज शरण कोलारस नप में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, भाजपा के स्थापना वर्ष 1980 से 1998 तक भाजपा नगर अध्यक्ष के रूप में कार्य कर चुके हैं। श्री बिंदल के जेष्ठ भ्राता डॉ. प्रमोद बिंदल, लघु भ्राता भास्कर बिंदल, धर्मपत्नी श्रीमती राज बिंदल भी सक्रिय हैं और वह राजनीति तथा समाजसेवी संस्थाओं में अपनी भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। श्री बिंदल निर्भीकता, दृढ संकल्पित कार्य शैली, साथ लेकर चलने और जोडऩे की कला के लिए जाने जाते हैं। आलोक बिंदल यशोधरानिष्ठ के रूप पहचाने जाते हैं और यशोधरा राजे को कोलारस उपचुनाव में फ्री हैंड मिलने की चर्चा के बाद आलोक बिंदल टिकिट पाने वालों की दौड़ में एकदम ऊपर आ गए हैं।
रामस्वरूप रिझारी हैं भाजपा के ऊर्जावान कार्यकर्ता
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| रामस्वरूप रिझारी |
रामस्वरूप रिझारी वर्षों से भाजपा की राजनीति में कोलारस विधानसभा क्षेत्र से सक्रिय हैं और उन्हें भाजपा के ऊर्जावान कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता है। यशोधरा को कमान मिलने की खबरों के बाद से रामस्वरूप रिझारी का नाम उपचुनाव में टिकिट पाने वाले उम्मीदवारों की श्रेणी में ऊपर उठकर आया है। क्योंकि रामस्वरूप रिझारी को यशोधरानिष्ठ माना जाता है। श्री रिझारी जिला पंचायत चुनाव में भी सक्रिय रहे थे और वर्तमान में उनके परिवार से जिला पंचायत में सदस्य भी हैं। श्री रिझारी की ग्रामीण क्षेत्र में मजबूत पकड़ हैं क्योंकि वह ग्रामीणों की दुख, दर्द में हमेशा उनके साथ रहते हैं।
महल विरोधियों के मंसूबों पर फिरा पानी
यशोधरा राजे के कोलारस उपचुनाव से लगातार दूरियों बनाने के बाद महल विरोधियों ने टिकिट पाने के मंसूबे पाल रखे थे और टिकिट की दौड़ में सबसे आगे नाम लिया जा रहा था, लेकिन अब जैसे ही यशोधरा राजे को कोलारस उपचुनाव में फ्रीहैंड मिलने के कयास सामने आने लगे तो महल विरोधियों के मंसूबों पर पानी फिरता दिखाई दे रहा है। वहीं महल समर्थक और यशोधरानिष्ठ नेताओं की खुशी का ठिकाना नहीं है। अब यशोधरानिष्ठ माने जाने वाले आलोक बिंदल और रामस्वरूप रिझारी का नाम एकदम उभरकर सामने आया है।








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