नए सत्र में फिर से अभिभावकों के साथ धोखाधड़ी करने की जुगत में स्कूल संचालक
(संजय चिड़ार) शिवपुरी। वर्तमान दौर में शिक्षा एक बड़े कारोबार का रूप ले चुकी है। निजी स्कूलों में मोटी फीस वसूलकर शिक्षा देने का चलन तो जारी है ही, इन सबके बीच शिवपुरी शहर से लेकर ग्रामीण अंचल में 100 से अधिक ऐसे स्कूल हैं, जहां बच्चों और अभिभावकों के साथ धोखा किया जा रहा है। इन स्कूलों पर जिस कक्षा तक संचालन की मान्यता है, उससे बड़ी कक्षाएं यहां संचालित की जा रही हैं। बाकायदा इसका प्रचार प्रसार कर बच्चों को धोखे में रखकर प्रवेश भी दिया जा रहा है।
स्कूल संचालकों द्वारा की जा रही इस धोखाधड़ी का मामला मीडिया में उछलने के बाद जिला परियोजना समन्वयक शिरोमणि दुबे द्वारा की गई जाँच में खुलासा हुआ कि शहर में संचालित 11 निजी स्कूलों द्वारा बच्चों और अभिभावकों के साथ धोखाधड़ी कर आठवीं तक की मान्यता पर 10वीं और 12वीं तक की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इस मामले को लेकर कार्रवाई की गेंद कलेक्टर के पाले में थी। कलेक्टर तरुण राठी ने धोखाधड़ी के इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इन सभी 11 स्कूलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश जिला शिक्षा अधिकारी परमजीतसिंह गिल को दिए हैं, लेकिन कलेक्टर के आदेश को भी गुजरे तीन महीने से अधिक समय हो गया, लेकिन आज तक शिक्षा विभाग के हिटलरशाही अफसरों ने एफआईआर दर्ज नहीं कराई। जाँच में दोषी पाए जाने के बाद कोई कार्यवाही नहीं होने से इन 11 स्कूल संचालकों के हौंसले तो बुलंद हैं ही, साथ ही अन्य तमाम स्कूल संचालक भी अब नए सत्र में बेखौफ होकर अपने कृत्य को अंजाम देने में जुट गए हैं।
आरटीई एक्ट के उल्लंघन और धारा 420 के तहत होना थी एफआईआर
तत्समय जिला शिक्षा अधिकारी परमजीतसिंह गिल ने बताया कि कलेक्टर के निर्देश के बाद वे सोमवार को इन सभी स्कूलों की जांच रिपोर्ट प्रतिवेदन के आधार पर पुलिस प्राथमिकी दर्ज कराएंगे। बकौल डीईओ इस मामले में आरटीई एक्ट का उल्लंघन तो हुआ ही है, साथ ही बच्चों व अभिभावकों के साथ धोखाधड़ी भी की गई है। ऐसे में आईपीसी की धारा 420 के तहत भी प्रकरण दर्ज कराएंगे। इस मामले में विधिक सलाह के आधार पर धाराओं में और इजाफा भी किया जा सकता है, लेकिन आज तक इस मामले में कार्यवाही के नाम पर कोई प्रोग्रेस सामने नहीं आई।
ऐसे चलता था धोखाधड़ी का खेल
जिले में संचालित निजी स्कूलों द्वारा धोखाधड़ी का यह खेल पूरी तरह नियोजित ढंग से चलाया जा रहा है। जांच में भले ही तत्समय 11 स्कूल जद में आए थे, लेकिन अब भी ऐसे और स्कूल भी संचालित हैं, जिन पर मान्यता 5वीं या फिर 8वीं कक्षा तक की ही है, लेकिन स्कूल संचालक 10वीं और 12वीं तक के बच्चों को प्रवेश दे रहे हैं। ये लोग अभिभावकों को अंधेरे में रखकर मान्यता से उच्च कक्षाओं में प्रवेश दे देते हैं। किसी और मान्यता प्राप्त स्कूल से साठगांठ कर परीक्षा में इनके नाम इन स्कूलों की मान्यता के जरिए भेज दिए जाते हैं। इसके अलावा ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जहां स्कूलों ने भ्रामक विज्ञापन व होर्डिंग भी लगाए हैं। इनमें स्कूल पर मान्यता किसी और बोर्ड की है और विज्ञापन में हवाला दूसरे बोर्ड का दिया गया है।






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