

एक दिन स्कूल नहीं आने पर सुनाया फरमान

(संजय चिड़ार) शिवपुरी। शहर के प्रतिष्ठित सेंट बेनेडिक्ट स्कूल प्रबंधन में आज सुबह पनिशमेंट के तौर पर छात्र-छात्राओं को कक्षाओं में एंट्री नहीं दी और स्कूल परिसर से बाहर सड़क पर धूप में खड़ा होने का अजीबोगरीब फरमान सुना दिया। स्कूल प्रबंधन के फरमान के आगे मजबूर छात्र-छात्रा सड़क किनारे खड़े रहे। जब इस बात की भनक मीडिया को लगी तो कुछ मीडियाकर्मी मौके पर पहुँचे छात्र-छात्राओं से इस संबंध में जानकारी जुटाना प्रारंभ की, लेकिन जैसे ही स्कूल प्रबंधन को इस बात की भनक लगी तो उन्होंने तुरंत ही छात्र-छात्राओं को अंदर बुला लिया। बताया जा रहा है कि शनिवार को कक्षा 12 वीं के छात्र-छात्रा किसी कारणवश स्कूल में नहीं आते थे और इसी कारण सोमवार को स्कूल प्रबंधन ने दो दर्जन से अधिक छात्र-छात्राओं को स्कूल के बार सड़क पर खड़ा रहने का फरमान सुना दिया। अब यहां सवाल यह उठता है कि यदि समय पर मीडिया नहीं पहुँचती तो स्कूल प्रबंधन इन छात्र-छात्राओं को इस चिलचिलाती धूप में कब तक खड़ा किये रहता है और यदि किसी छात्र-छात्र को धूप के कारण चक्कर आ जाते है या कुछ हो जाता तो इसका जिम्मेदार कौन होता है। यहां बताना होगा कि इससे पूर्व ही स्कूल परिसर में एक एक्सीडेंट हुआ था इसके बाद स्कूल प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी से बचते नजर आए थे।

डमी प्रवेश के नाम पर ऐंठते हैं दुगुनी और तीगुनी फीस
शहर के अधिकांश स्कूलों में डमी प्रवेश दिया जाता है और इसके नाम पर स्कूलों में छात्र-छात्राओं से दुगुनी और तीगुनी मोटी फसी वसूली की जाती है जो कि गैरकानूनी है। सीबीएसई और पीएसईबी द्वारा डमी एडमिशनों पर प्रतिबंध होने के बावजूद भी शहर के कई स्कूलों की कक्षाओं ग्यारहवीं और बारहवीं के लिए छात्रों को डमी प्रवेश दिया जा रहा है। अधिकांश स्कूलों में मात्र नाम के दाखिले लेकर स्टूडेंट इंजीनियङ्क्षरग और मेडिकल की तैयारी करने पर ध्यान देते हैं। जिसके लिए क्लास से अधिक कोङ्क्षचग सेंटरों पर ध्यान देते हैं। स्कूलों और अभिभावकों की आपसी सहमति से चल रहे इस तरह के डमी एडमिशन पर शिक्षा विभाग द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जाती है। अधिकांश स्टूडेंट मेडिकल व इंजीनियङ्क्षरग की पढ़ाई करने के लिए स्कूल से डमी एडमिशन लेकर दूसरे शहरों में जाकर कोङ्क्षचग कर अन्य प्रवेश परीक्षाओं के लिए तैयारी करते हैं।






Be First to Comment