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पानी के नाम पर कागजी घोड़े दौड़ाने में माहिर पीएचई धरातल पर शून्य

कोलारस विधानसभा में पानी के लिए मचा हा-हाकार, वर्षों से बंद हैं नलजल योजनाएं

कोलारस। जनता के हित के लिए आने वाले करोड़ों के बजट को किस तरह से ठिकाने लगाया जाता है इसका जीता जागता नमूना पीएचई कोलारस द्वारा पेश किया गया है। कोलारस विधानसभा में पीएचई विभाग में 23 नल जल योजनाएं संचालित हो रही है, जिनमें से विभाग के अनुसार अधिकांश संचालित हैं, लेकिन हकीकत तो यह है कि एक-दो योजनाओं को छोड़ दिया जाए तो कहीं भी यह योजनाएं संचालित नहीं हो रही है। कई ग्रामों में तो स्थिति यह है कि जब से पानी की टंकियाँ बनी हैं उनमें आज दिनांक तक पानी नहीं भरा गया है। जब हमारे समाचार प्रतिनिधि द्वारा जब इस मामले कि तह तक जाने कि कोशिश कि तो पीएचई विभाग कि सच्चाई का पर्दाफास हो गया। ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर देखा तो 23 जल नल योजनाओं में करीब 60 प्रतिशत जल नल योजनाऐं वर्षो से बंद पड़ी मिली।
अल्पवर्षा के कारण क्षेत्र में पानी का संकट गहराता जा रहा है। गर्मी के बढ़ते पारे के साथ कोलारस विधानसभा में बिजली, पानी की समस्या ने भी क्षेत्र में दस्तक दे दी है। आए दिन नगर सहित गांवों में पानी कि शिकायतं प्राप्त हो रही है। जिससे पानी के लिए क्षेत्र में त्राहि-त्राहि मचना शुरू हो गई है। गांवो में हालत दिन व दिन पानी के लिए बदतर होते जा रहे है। लोग गांवो में दो से तीन किलोमीटर से पानी लाने को मजबूर है। गांवो में नल जल योजनाऐं ठप पड़ी है। लोग वाहनों और साईकिलंो से अपना काम छोड़कर दिन रात पानी के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।

पीएचई प्रभारी की झूठ का खुलासा

जब पीएचई विभाग द्वारा कोलारस विधानसभा में संचालित नलजल योजनाओं के बारी जानकारी माँगी गई तो उन्होंने गांवों में संचालित नलजल योजनाओं के नाम गिनाए जिनमें उन्होंने डेहरबारा, तेंदुआ गाँव में नलजल योजना को संचालित होना बताया जबकि हमारी टीम द्वारा इन गाँव में पहुँचकर जमीनी हकीकत जानी तो पता चला कि इन गाँवों में नल जल योजना एक दो दिन से बंद नहीं है, बल्कि वर्षों से बंद है और ग्रामीणा दूर-दराज से निजी बोरों से पानी लाने को मजबूर हैं।

पानी की समस्या ग्रामीणों की मुँहजुबानी

करन सिंह, डेरवारा-मोटरसाइकिल से पानी भरकर ले जा रहे हैं। गाँव में पानी नहीं है, नलजल योजना भी बंद है। हैंडपंप खराब हैं, हैंडपंप सही करने वाला भी गलत आदमी हैं। हैंडपंप में पानी तो है वह सुधारते नहीं। नलजल योजना की टंकी में अभी तक पानी नहीं भरा गया। सीएम हेल्पलाइन सहित अन्य जगह शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं। तीन किमी. दूर से जब तक लाइट आती है सभी गांव के लोग पानी भरते हैं।

हरिओम धाकड़, डेहरवारा-दो-तीन किमी. से पानी लाते हैं कोई मोटरसाइकिल, कोई साइकिल से तो कोई ट्रेक्टर से पानी ला रहा है। नल जल योजना की टंकी बने पाँच साल हो गए, लेकिन आज तक टंकी में पानी नहीं आया है। ट्यूबबैलों से पानी भरकर ले जा रहे हैं। जिनके पास वाहन नहीं है उनके घरों में रात्रि में औरतें पानी भरने के लिए जाती हैं।

हरिकिशन धाकड़, तेंदुआ-पानी के बात बुरे हालात हैं। करीबन तीन साल से नल जल योजना ठप्प है। चार टंकियां हैं एक में भी पानी नहीं है। प्राइवेट बोरों से पानी लाते हैं। पीएचई विभाग में शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं है। एक सरकारी बोर लगा है, लेकिन उसमें डीपी नहीं है इसलिए वह चालू नहीं है। दो ढाई महीने पहले बोर लगा था, लेकिन चालू नहीं है।

किशन धाकड़, खरई-कुछ डाबर, घोंघाई से पानी लाते हैं। नलजल योजना ठप्प है। दो वर्षों से बंद हैं। दो टंकियां हैं। नई टंकी जब से बनी है तब से चालू ही नहीं हुई है।

जानें क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी

  1. 23 नल जल योजना कोलारस विधानसभा में है और 23 बदरवास विधानसभा में है इस प्रकार 46 हैं। 46 में से लगभग 40 से अधिक योजनाएं चालू हैं। एकाध रह गई हैं उन्हें हम शीघ्र चालू कर रहे हैं। जल स्तर नीचे चला गया है, ट्यूबबैल खनन भी कर रहे हैं, जहाँ पानी कम हो गया है, वहां सिंगल फीस मोटर डालकर उन्हें चालू कर रहे हैं कुछ कर दी हैं। सेसई सड़क, लुकवासा, डेरवारा, खरई तेंदुआ, दीगोद चालू हैं आदि चालू हैं जहां थ्री फेस मोटर नहीं चल पा रही है वहां सिंगल फेस मोटरसाइकिल चालू कर रहे हैं।

हार्डी गर्ग, पीएचई प्रभारी
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