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अमर शहीद तात्याटोपे ने स्वयं फांसी के फंदे को किया था वरण: नागर

तात्याटोपे के बलिदान दिवस पर उन्हें दी गई भावभीनी श्रृद्धांजलि 

शिवपुरी। देश की आजादी के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले अमर शहीद तात्याटोपे को अंग्रेजो ने फांसी नहीं दी थी। तात्याटोपे इतने बहादुर थे कि उन्होंने निडरतापूर्वक स्वयं फांसी के फंदे पर झूले थे और उन्होंने मृत्यु को वरण किया था। उक्त उदगार स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रेमनारायण नागर ने आज तात्याटोपे  समाधि स्थल पर उनके बलिदान दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता की हैसियत से व्यक्त किए। इस अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से कलेक्टर तरूण राठी ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रेमनारायण नागर का शॉल, श्रीफल और माल्यार्पण कर स्वागत किया। बलिदान दिवस पर ध्वजारोहण की रस्म कलेक्टर तरूण राठी ने निर्वहन की। 
अमर शहीद तात्याटोपे के बलिदान दिवस पर आज अनेक लोग उनके समाधि स्थल पर उन्हें श्रृद्धांजलि अर्पित करने के लिए पहुंचे। बलिदान दिवस पर सबसे पहले पहुंचने वालों में कैबिनेट मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया थी जिन्होंने सुबह-सुबह जाकर तात्याटोपे के समाधि स्थल को नमन किया और उनके चित्र पर माल्यार्पण किया। इस अवसर पर उनके साथ विधायक प्रहलाद भारती भी थे। पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद यशोधरा राजे सिंधिया समाधि स्थल से रवाना हुईं और इसके बाद कलेक्टर ने ध्वजारोहण किया। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता प्रेमनारायण नागर ने स्व. तात्याटोपे को श्रृद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि लंबी गुलामी के बाद देश को जो आजादी मिली है वह बहुत बहुमूल्य है, क्योंकि शहीदों के खून से सींचकर इसे प्राप्त किया गया है। इस आजादी को बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है। साथ ही हमें आजादी दिलाने वाले रणबाकुंरो के मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए। श्री नागर ने कहा कि देश के प्रति सम्मान और समर्पण की भावना हमें जापानियों से सीखना चाहिए जहां एक चोर इसलिए पकड़ा गया, क्योंकि चोरी करते समय राष्ट्रगीत बजने लगा और राष्ट्रगीत के सम्मान में वह खड़ा रहा तथा गिरफ्तार हो गया, लेकिन राष्ट्रीयता की भावना के कारण उसे माफ कर दिया गया। संगोष्ठी में विधायक प्रहलाद भारती ने तात्याटोपे के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वह गुरिल्ला युद्ध में माहिर थे। संघ से जुड़े पुरूषोत्तम गौतम ने शहीद तात्याटोपे के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला और उन्होंने अपने संबोधनों में वीर सावरकर से जुड़ी कई घटनाओं को उपस्थित श्रोताओं को बताया। संगोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद भार्गव ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन गिरीश मिश्रा और हेमलता चौधरी ने संयुक्त रूप से किया। 
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