जिले में 84 हजार से अधिक परिवारों को मिले गैस कनेक्शन
शिवपुरी-ग्राम स्वराज अभियान के तहत आज ग्रामीण क्षेत्रों में उज्जवला दिवस के अवसर पर उज्ज्वला चौपाल का कार्यक्रम आयोजित किए गए। कलेक्टर श्री तरूण राठी ने शिवपुरी जनपद पंचायत के ग्राम कोटा में लगभग 100 गरीब महिलाओं को नि:शुल्क गैस कनेक्शन प्रदाय कर उन्हें गैस चूल्हें दिए। कार्यक्रम में पूर्व में लाभांवित महिला हितग्राहियों द्वारा भी योजना के संबंध में अपने अनुभवों से भी अवगत कराया।
कलेक्टर श्री राठी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री जी की सोच के कारण आज ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर बदल रही है। प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में भी गरीब परिवारों की महिलाओं को भी नि:शुल्क गैस कनेक्शन मिलने पर महिलाओं को खाना बनाते वक्त निकलने वाले धूंए से निजात मिलेगी। जिससे उनके स्वास्थ्य के साथ-साथ आंखों की बीमारियां भी नहीं होंगी। श्री राठी ने कहा कि केन्द्र सरकार ने इस योजना का विस्तार किया है। इस योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को गैस कनेक्शन प्रदाय कर धूंआ से मुक्ति दिलाना है।
श्री राठी ने गैस कनेक्शन प्राप्त करने वाले महिलाओं से आग्रह किया कि जो गैस कनेक्शन दिए जा रहे है, उसका उपयोग वे अपने परिवार का खाना बनाने में करें और गैस सिलेण्डरों की भी नियमित रूप से रिफलिंग कराए। इसके लिए परिवार के पुरूषों को भी प्रेरित करें। कार्यक्रम में महिलाओं को एलपीजी गैस का उपयोग करते वक्त बरती जाने वाली सावधानियों की भी जानकारी दी।
कार्यक्रम के शुरू में जिला आपूर्ति अधिकारी एल.के.शर्मा ने योजना के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गरीब परिवार की महिलाओं को 2011 की आर्थिक सामाजिक जनगणना के आधार पर मई 2016 से गैस कनेक्शन प्रदाय करने की कार्यवाही की गई थी। जिले में एक लाख 45 हजार परिवारों को गैस कनेक्शन प्रदाय किए जाने है, जिसमें से 84 हजार से अधिक परिवारों को गैस कनेक्शन प्रदाय किए जा चुक है। इस योजना के तहत अंत्योदय योजना के हितग्राही के साथ-साथ, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के बीपीएल परिवार, प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही, वनाधिकार पत्र प्राप्त हितग्राहियों को भी गैस कनेक्शन दिए जाएगें।
गैस पर खाना बनाने से धूंए से मिली निजात
कार्यक्रम में गांव की श्रीमती सुरमा एवं श्रीमती कला आदिवासी ने अपने विचार रखते हुए बताया कि उन्हें गैस मिलने से पहले लकड़ी हेतु महीने में तीन से चार दिन जंगलों में जाना पड़ता था और 150 रूपए से 200 रूपए तक की मजदूरी भी छोडऩा पड़ती थी और लकड़ी से खाना बनाने में जहां स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता था, वहीं मकान की छतें भी काली हो जाती थी। जबकि एलपीजी गैस का उपयोग करने से इन सब चीजों से निजात मिल गई है। कार्यक्रम का संचालन गिरीश मिश्रा ने किया। इस अवसर पर राहुल गोयल, ईश्वर इंडियन कंपनी सहित अन्य गैस कंपनियों के पदाधिकारीगण उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में गांव के श्री मनीष मल्होत्रा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।






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