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हम ज्यादा से ज्यादा जागरुक हों तभी दुर्घटनाएं रुकेंगी: पुलिस अधीक्षक पांडे

सम्मान समारोह के साथ यातायात सप्ताह का हुआ समापन

(केदार सिंह गोलिया) शिवपुरी। वाहन चालकों को यातायात नियमों की सीख और स

मझाइश देने के लिए 23 अप्रैल से आयोजित यातायात सप्ताह का समापन पुलिस लाइन स्थित कम्युनिटी हॉल में समारोह के साथ किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार पांडे ने कहा हम ज्यादा से ज्यादा जागरुक हों तभी दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि विगत दिनों शादी समारोह के लिए जा रहे कुछ लोग ट्रॉली के पीछे के हिस्से में बैठे हुए थे जब ट्रेक्टर चालक ने ओवर टेक किया तो वह चार लोग गिर गए और उनकी मौत हो गई। अब यदि पुलिस इनको रोक ले तो फिर कहेंगे कि जगह-जगह अपराध हो रहा है और हमें आप रोक रहे हैं। श्री पांडे ने कहा कि लोगों में यह एक आम धारणा बन गई है कि ट्रेफिक वाले तो हेलमेट चैकिंग के अलावा और कुछ करते ही नहीं। शहर में यदि ट्रेफिक जाम है तो आपकी जान को कोई खतरा नहीं हो सकता है यदि आप 30 मिनट में पहुंचने वाले हो तो 45 मिनट में पहुँचेंगे जिससे सिर्फ समय का नुकसान होगा। आज सबसे ज्यादा एक्सीडेंट रोड पर हो रहे हैं। पुलिस अधीक्षक श्री पांडे ने कहा कि यातायात के प्रति लोगों को जागरुक करने में मीडिया का भी अहम रोल है। 

कार्यक्रम के प्रारंभ में यातायात प्रभारी धर्मसिंह कुशवाह द्वारा पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में की गई सातों दिन की गतिविधियों पर संक्षिप्त प्रकाश डाला। इसके बाद एसडीओपी जीडी शर्मा ने कहा कि पूर्व में टे्रफिक जैसी कोई समस्या नहीं होती थी, इसलिए हमारे धर्मग्रंथों में इसका कोई उल्लेख नहीं है, जिस चीज की आवश्यकता महसूस होती है वह समय के साथ-साथ धर्मग्रंथ बन जाता है। श्री शर्मा ने कहा कि माँ-बाप बच्चों के लिए महंगे-महंगे खिलौने लाते हैं क्योंकि वह उनसे बहुत प्यार करते हैं, भाई बहन होमवर्क करवाते हैं उनके कामों में हाथ बंटाते हैं क्योंकि उन्हें बहुत प्यार करते हैं, लेकिन यही माँ-बाप जब बेटा-बेटी, भाई-बहन घर से निकलते हैं तो कोई नहीं पूछता कि भैया हेलमेट पहना है क्या?, ट्रेफिक नियमों का पता है क्या? सड़क पर कैसे चलें? कब लाल बत्ती पर रुकना है और हरी बत्ती पर चलना है? मेरा मानना है कि यदि हम अपने परिजनों को प्यार करते हैं तो उनकी आवश्यकता को भले ही नजर अंदाज कर दो, लेकिन उसके जीवन को देखते हुए क्योंकि उनका जीवन हमारे लिए महत्वपूर्ण है उन्हें यातायात नियम अवश्य बताएं। 
मानव अधिकार आयोग के जिला संयोजक आलोक एम इंदौरिया ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जब तक हम स्वयं जागरुक नहीं होंगे, हम स्वयं यातायात के नियमों को नहीं समझेंगे जब दुर्घटनाएं नहीं रुकेंगी। आज जिस तरह से छोटे बच्चे बाइक चला रहे हैं और बाइकों पर स्टंट कर रहे हैं इस पुलिस रोक नहीं लगाएगी इस पर रोक लगाएंगे माता-पिता। उन्हें देखना होगा कि उनका बच्चा क्या कर रहा है। कानों में ऐयर फोन लगाकर गाड़ी चलना बेहद खतरनाक है क्योंकि इसकी बजह से कौन होर्न बजा रहा है तो इसका पता नहीं चलता। मंच का सफल संचालन गिरीश मिश्रा मामा द्वारा किया गया। इस मौके पर डीएसपी धर्मेन्द्र तोमर, कोतवाली टीआई संजय मिश्रा, देहात टीआई सतीश चौहान, फिजीकल प्रभारी विकास यादव, यातायात थाना प्रभारी धर्मसिंह कुशवाह, सूबेदार रणवीर सिंह यादव, मुकेश चौहान, अब्दुल रफीक अप्पल, वनबारी धाकरे, वहीं पत्रकार बंधुओं में विजय शर्मा बिंदास, नेपाल बघेल, नरेंद्र शर्मा, केदार सिंह गोलिया उपस्थित रहे।

उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए किया सम्मानित

यातायात सप्ताह के दौरान यातायात संबंधी चित्रकला प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन कने वाले स्कूली बच्चों को पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रथम, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वालों को शील्ड और प्रमाण देकर सम्मानित किया गया, वहीं अन्य बच्चों को प्रमाण पत्र दिए। इसके अलावा यातायात समाप्त के दौरान सहयोग करने वालों में  मानव अधिकार आयोग सदस्य आलोक एम. इंदौरिया, ट्रक यूनियन के अब्दुल रफीक खान अप्पल, स्कूल संचालक राम गुप्ता, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष मुकेश चौहान, भरत अग्रवाल आदि को सम्मानित किया गया। 
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