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नाटक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन 12 से 19 मई के मध्य

-रंगकर्म में रुचि रखने वाले युवा कलाकार अवश्य भाग लें: अरुण अपेक्षित

शिवपुरी। सिद्धेश्वर सांस्कृतिक समिति के तत्वावधान में एक नाटक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन 12 मई से 19 मई 2018 के मध्य, प्रतिदिन प्रात: 8 से 11 बजे तक गुरु गोरखनाथ मंदिर के सभागार में आयोजित किया जा रहा है। इसमें नगर के इच्छुक रंगकर्मियों को निषुल्क नाटक के सैद्धान्तिक पक्षों, अभिनय की बारीकियों के साथ रंग-मंच और उससे जुड़ी तमाम विधाओं का प्रायोगिक व सैद्धान्तिक ज्ञान कराया जायेगा। इच्छुक प्रतिभागी रंगकर्मी कार्यशाला में सहभागिता के लिये अपने नाम आयोजन समिति के सदस्यों के अलावा सिद्धेष्वर सांस्कृतिक समिति के सचिव अरुण अपेक्षित व सिद्धेष्वर मंदिर के प्रबंधक गिरीश मिश्रा को अपने नाम दे सकते हैं।

गत दिवस नाटक प्रषिक्षण कार्यशाला के आयोजन के संबंध में एक बैठक गुरु गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित की गई। इस बैठक में सिद्धेष्वर सांस्कृतिक समिति के सचिव अरुण अपेक्षित व सिद्धेष्वर मंदिर के प्रबंधक गिरीष मिश्रा के अलावा नगर के वरिष्ठ रंगकर्मी सर्वश्री दिनेष वषिष्ठ, विजय भार्गव, ब्रजेष अग्निहोत्री, राजेष ठाकुर, अखलाक खान ने सहभागिता की और आयोजन के संबंध में उपयोगी चर्चा की। बैठक में वरिष्ठ रंगकर्मी,कवि और कलाकार अरुण अपेक्षित ने कहा कि नगर में अनेक वर्षों से रंगमंच लगभग नष्ट हो गया है। स्कूलों,कॉलिजों और युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित युवा उत्सव में या तो नाटक आते ही नहीं है और अगर आते भी हैं तो इतने स्तरहीन होते हैं कि उनकी प्रस्तुति को कहीं भी सराहना नहीं मिलती है। अपेक्षित ने बताया ऐसे वातावरण में नगर के वरिष्ठ, अनुभवी रंगकर्मियों का यह दायित्व बनता है कि वे आने वाली नई पीढ़ी को अपने अनुभव और ज्ञान का लाभ दें।

वरिष्ठ रंगकर्मी दिनेश वशिष्ठ ने बताया कि प्राचीनकाल की स्थापित रंग विधायें भी लगभग विलुप्त हो चुकी हैं। आज नौटंकी,रासलीला,रामलीलाये ंतो होनी बंद हो ही गई हैं उस विधा को जानने वाले कलाकार भी दुनिया में न के बराबर शेष हैं। आज के नाटक ने एक लम्बी यात्रा तय की है। युवा पीढ़ी को परम्परागत नाटक के अलावा नाटक की विभिन्न शैलियों का ज्ञान कराना आवष्यक है। विजय भार्गव ने कहा कि नाटक एक सम्पूर्ण कला है जिसमें अभिनय के साथ साहित्य,संगीत, रूप-सज्जा, वेषभूषा, रंगसज्जा, मंचसज्जा, प्रकाष एवं ध्वनि सभी का समावेष होता है। उन्होंने कहा कि अनेक कलाकार जो मंच पर आते हैं उन्हें तो ठीक से माइक पर संवाद बोलना, रंगमंच पर खड़ा होना भी नहीं आता। उनके अभिनय में प्रषिक्षण का अभाव स्पष्ट दिखाई पड़ता है।

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