खनियांधाना से सचिन मोदी की रिपोर्ट

खनियांधाना, नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगं. जैन बड़ा मंदिर मैं पिछले तीन माह से विराजमान आचार्यश्री विद्यासागर महाराज की शिष्या आर्यिका रत्न पूर्णमति माताजी का आज खनियांधाना से मंगल विहार हो गया । आज सोमवार सुबह 5:30 बजे जब आर्यिका संघ के मंगल विहार की घोषणा हुई तो वहां जैन समाज के सैकड़ों महिला-पुरुष एकत्रित हो गए तथा सभी की आंखों में इस विदाई के अवसर पर सभी की आंखे नम हो गईं । इस अवसर पर माताजी ने सभी धर्मप्रेमी बंधुओं को इसी प्रकार देव- शास्त्र -गुरु की उपासना निरंतर करते रहने की बात कही और मंगल विहार शुरू कर दिया । नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए पिछोर रोड पर बड़ी दूर तक सैकड़ों महिला-पुरुष नंगे पांव माताजी को विदाई देने के लिए पैदल गए ।
इन तीन माह के प्रवास के दौरान खनियाधाना सहित आसपास की जैन समाज ने पहली बार जिन धर्म के उन रहस्यों को प्रवचन के माध्यम से आत्म चिंतन किया जिसके बारे में आज तक नहीं जाना था थे । ग्रंथादिराज समयसार पर हुई ग्रीष्मकालीन वाचना के माध्यम से आगम के गूढ़ रहस्यों को समझा तथा कई विधान हुए । साथ ही आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के जीवन काल पर लिखित माँ पूर्णमति माता जी द्वारा रचित ज्ञानधारा का वाचन माताजी के द्वारा हुआ ऐसे बहुत ऐसे कई कार्यक्रम हुए जो खनियाधाना के इतिहास में पहली बार हुए जिनमें आचार्यश्री के 50 वें दीक्षा दिवस की स्मृति में भव्य कीर्ति स्तंभ का निर्माण , नगर के प्राचीन श्री बड़ा दिगंबर जैन मंदिर के नव निर्माण का शिलान्यास तथा ख़िरकीट जैन मंदिर के नवीन बेदी पर जिन प्रतिमाओं की स्थापना और बामोर खुर्द जैन मंदिर पर विशाल शिखर पर कलशारोण के कार्यक्रम संपन्न हुए तथा महावीर जयंती के अवसर पर सम्पूर्ण जैन समाज को एकता के सूत्र में पिरोकर भव्य आयोजन हुआ जिसकी स्मृति आने वाले कई वर्षों तक चिर स्थाई रहेगी ।
ग्राम औंडी में हुई आहार चर्या
खनियाधाना से मंगल विहार करने के पश्चात आर्यिका संघ का गमन गौशाला रोड से होते हुए पिछोर की दिशा में हुआ जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि उनका अगला संभावित चातुर्मास झांसी अथवा शिवपुरी में हो सकता है जिसके लिए झांसी एवं शिबपुरी की जैन समाज के सैकड़ों लोग माताजी के समक्ष पिछले कई दिनों से निवेदन प्रस्तुत कर रहे थे ।
आज पूरे संघ की आहार चर्या खनियांधाना से 7 किलोमीटर दूर ग्राम ओंडी में संपन्न हुई जिसके बाद संघ डविया कला की ओर प्रस्थान कर गया जहां रात्रि विश्राम होगा ।






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