विवेक व्यास, कोलारस-निर्वाचन कार्यालय भोपाल से लेकर दिल्ली तक कोलारस विधानसभा उपचुनाव का निर्वाचन नामावली में गड़बड़ी को लेकर की गईं शिकायत अभी भी अधिकारियों के गले की फॉन बनी हुई है।
चुकि उक्त शिकायत का मामला कांग्रेस के सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में उठाया गया इस कारण भी निर्वाचन आयोग द्वारा इसे गंभीरता से लेते हुए चुनावी समय मे ही जांच की जद में लेते हुए शक्ति शाली कार्यवाही की।
आचार संहिता के दौरान अशोकनगर कलेक्टर को हटा दिया गया। इनके उपरांत मुख्य निर्वाचन अधिकारी सलीना सिंह द्वारा शिवपुरी कलेक्टर तरुण राठी के विरूद्ध भी कार्याही के लिये लिखा।शीघ्र ही उनका स्तान्तरण कर दिया गया । वही इसकी गाज कोलारस sdm प्रजापति पर भी गिरी और चुनाव वाद उनका भी कोलारस से स्तान्तरण कर दिया गया।
इस पूरे अभियान को अंजाम देने वाली मुख्य निर्वाचन अधिकारी सलीना सिंह को भी 2 दिन पूर्व अपने पद से हटा दिया गया। हालांकि उन्होंने पारदर्षिता से अपने पद का निर्वहन किया और राजनैतिक आक्रोश का शिकार वन गई।
उनके स्थान पर आए Vl कांता राव की कार्यप्रणाली भी बहुत शानदार है। जहां तक मे उनके पूर्व में संपर्क में रहा हूँ उससे ऐसा लगता है कि अब निर्वाचन का डंडा अधिकारी अमले पर और अधिक ताकत से चलेगा।
वो जिस विभाग में जाते है उसमें अमूल चूल परविर्तन होता है ।उनकी श्रीमती जी भी आईएएस लॉबी में है और दोनों के काम करने का नजरिया शानदार है।
कोलारस में निर्वाचन नामावली में शुधार का क्रम जारी है। जिला कलेक्टर सहित मुख्य निर्वाचन कार्यालय दिल्ली से भी प्रतिनधि आकर यहां प्रशानिक अमले को निर्देश दे चुके है।
कोलारस के हालात यह है कि अब यहां जो भी अधिकारी आता है उसे निर्वाचन का सिर दर्द सीट पर बैठते के साथ ही सताता रहता है। यहां काम करने में कोई रुचि नही दिखा रहा है।
निर्वाचन के काम के बहाने आफिस से 4-4 दिन गोल रहना अधिकारी अमले के लिए आम हो गया है। 7- दिन अधिकारी मीटिंग के नाम पर मौज कर रहे है ओर किसी को जिला कलेक्टर द्वारा प्रभार भी नही दिया जाना घोर प्रश्ननिक अव्यवस्था का परिचायक है। अधिकारी स्तर से जनता की अशुनवाई जारी है। ये भाजपा के लिए घातक है।
अभी भी निर्वाचन में लगा अमला कोलारस में काम करने में रुचि नहीं दिखा रहा है। उपचुनाव से लेकर अब तक न्यायालयीन प्रकरणो की हालत वेहद खराब है अधिकारी ध्यान नही दे पा रहे और बाबु जनता के शोषण में लगें है 1 -1 साल पुराने जमीन संबंधित मामलों में शुरु आती प्रिक्रिया भी संपादित नही हो रही है।
तय समय सीमा में प्रकरणो का निराकरण और t l वैठक मात्र समय पास करना साबित हो रही है।
अब देखना यह है कि निर्वाचन के नाम पर जनता के शोषण को रोकने के लिए कौन आगे बढ़ता है।







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