
शिवपुरी। नगर के जाने माने राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक व साहित्यकार हरि उपमन्यु (84) का गुरुवार की रात 8 बजे निधन हो गया। उनके निधन की खबर से नगर में शोक की लहर दौड़ गई है। आज उनकी अंतिम यात्रा पुरानी शिवपुरी स्थित घर से मुक्तिधाम पहुंची, जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, समाजसेवी, पत्रकार बंधु, साहित्यकार आदि उपस्थित रहे। सन 1934 को नरवर में जन्में शिक्षक हरि उपमन्यु को पर्यटन और साहित्य से खासा लगाव रहा। यही कारण रहा कि वे जिले के दूरस्थ ग्रामों में बाइक पर सवार होकर नित नई खोज किया करते थे। जानकारों की मानें तो जिला प्रशासन को इतिहास से जुड़ी कई अहम जानकारियां उन्हीं ने उपलब्ध करवाई। वे तीन साल तक आयोग मित्र भी रहे, जबकि साल 1990 में उन्हें उल्लेखनीय कार्यों के लिए राष्ट्रपति वेंकट रमन के हाथों राष्ट्रपति पुरस्कार से भी नवाजा गया। उन्होंने नगर के फिजीकल स्थित तात्याटोपे शासकीय स्कूल को एक अलग पहचान भी दी वे उसकी देखभाल अपने निजी स्कूल की तर्ज पर किया करते थे। खास बात यह है, कि 15 जुलाई को उनकी पुस्तक विश्वास नहीं होता का विमोचन हुआ था। इस पुस्तक का संपादन एवं प्रकाशन नई गजल के बैनर तले डॉ. महेन्द्र अग्रवाल द्वारा स्वयं के व्यय पर करवाया था क्योंकि वे बीते एक साल से बिस्तर पर थे और पुस्तक प्रकाशित नहीं हो सकी थी।







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