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शिक्षा विभाग की एक और नाकामी उजागर, बिना मान्यता के संचालित मिले स्कूल, आखिर कब तक चलेगा ठेके पर पढ़ाई का डर्रा

शिक्षा विभाग की एक और नाकामी उजागर, बिना मान्यता के संचालित मिले स्कूल, आखिर कब तक चलेगा ठेके पर पढ़ाई का डर्रा

सिर्फ निरीक्षण तक ही सिमटकर रह जाती है अधिकारियों की कार्रवाई
शिवपुरी। शिक्षा माफियाओं द्वारा पैसा कमाने के लिए न सिर्फ बिना मान्यता के स्कूलों का संचालन किया जा रहा है, बल्कि बच्चों को ठेके पर उठाकर शिक्षा का मजाक उड़ाया जा रहा है। पैसा कमाने की इस अंधाधुंध होड़ में आगे निकलने के लिए स्कूल संचालक भ्रामक प्रचार-प्रसार के माध्यम से लोगों को गुमराह कर उनके साथ धोखाधड़ी करने से भी नहीं चूक रहे हैं। स्कूलों में यह गोरखधंधा अंचलों के अलावा जिला मुख्यालय पर शिक्षा विभाग एवं प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे खुलेआम अंजाम दिया जा रहा है। इसे शिक्षा विभाग की नाकामी ही कहा जा सकता है कि विभाग कार्रवाई के नाम पर सिर्फ निरीक्षणों तक सिमटकर रह जाता है। इसके बाद यह निरीक्षण ठंडे बस्ते में डाल दिए जाते हैं। यही कारण है कि इस तरह के स्कूल संचालकों के हौंसले बुलंद हैं। हाल ही में डीपीसी शिरोमणी दुबे के कोलारस क्षेत्र के निजी स्कूलों का निरीक्षण के दौरान फर्जीवाड़े और जालसाजी के हैरान करने वाले मामले उजागर हुए हैं। खतौरा गांव में एक नहीं बल्कि तीन स्कूल ऐसे मिले जहां स्कूलों पर मान्यता आठवीं या 10 वीं तक की थी, लेकिन इन स्कूलों ने मान्यता से अधिक कक्षाओं में बच्चों को प्रवेश दे रखा था। अधिकारी अब इस मामले में इन स्कूलों पर मान्यता समाप्त सहित कड़ी वैधानिक कार्रवाई की बात कह रहे हैं।

कृष्णा कॉन्वेंट, संस्कार और अफसर पब्लिक स्कूल की खुली पोल

डीपीसी जब खतौरा के कृष्णा कॉन्वेंट स्कूल पर पहुंचे तो मुख्य द्वार पर ही हाईस्कूल का बोर्ड लगा था। इसके अलावा दीवार पर एक पंपलेट भी हाईस्कूल का चस्पा था। मान्यता तलब की तो महज आठवीं तक की मिली। जबकि यहां एक कक्षा में 9वीं व 10वीं के बच्चे अध्ययनरत मिले। हैरान करने वाला दूसरा मामला भी खतौरा के ही एक अन्य निजी स्कूल संस्कार में सामने आया। यहां स्कूल पर मान्यता तो आठवीं तक की थी, लेकिन जब दस्तावेज खंगाले गए तो 12वीं तक के बच्चों के नाम रजिस्टर में दर्ज मिले। इतना ही नहीं इन बच्चों का चाइल्ड आईडी जन्मतिथि सहित पूरा रिकार्ड भी संधारित मिला। ऐसा ही मामला खतौरा के ही अफसर पब्लिक स्कूल में सामने आया यहां स्कूल पर मान्यता तो 10वीं तक की है लेकिन 11वीं व 12वीं के बच्चे दर्ज किए गए। स्कूल के बाहर बाकायदा एक फ्लेक्स भी प्रचार के लिए टंगा मिला जिसमें कक्षा 12वीं में टॉपर छात्रों के फोटो छपे थे। इन सभी स्कूलों में संचालक मान्यता से अधिक कक्षाओं के संचालन को लेकर सकारात्मक जबाव नहीं दे सके।

पूर्व में पकड़े गए स्कूलों की अभी तक नहीं की गई मान्यता समाप्त

पिछले सत्र में भी तत्कालीन कलेक्टर तरुण राठी के निर्देश पर निजी स्कूलों की मान्यता की जांच कराई गई थी जिसमें शहर के 11 स्कूल मान्यता से अधिक तक संचालित पाए गए थे। जांच में इस बात का खुलासा भी हुआ कि स्कूल संचालक मान्यता न होने के बाद भी बड़ी कक्षाएं का संचालन कर रहे हैं। तत्समय इन स्कूल संचालकों पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे, साथ ही यह बात भी सामने आ रही थी आगामी सत्र में इनकी मान्यता समाप्त की जाएगी। अभी तक न तो इन स्कूल संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई और न ही इनकी समाप्ति जैसी कार्रवाई सामने आई है। सामने आया है तो इन स्कूलों द्वारा फिर से वहीं फर्जीवाड़ा करने का मामला जो बच्चों को धड़ल्ले से प्रवेश दे रहे हैं।

इस तरह दिया जाता है फर्जीवाड़े को अंजाम

विभागीय सूत्रों की मानें तो मान्यता से अधिक प्रवेश देने का यह खेल अंचल भर में फैला हुआ है। अधिकांश निजी स्कूलों पर मान्यता 8वीं तक की है लेकिन वे 12वीं तक के बच्चों को प्रवेश दे देते हैं और परीक्षा के दौरान इन बच्चों के नाम किसी अन्य मान्यता वाले स्कूल के मार्फत दर्ज करा दिए जाते हैं। पिछले साल भी इसी तरह के मामले सामने आए थे जब मान्यता न होने के चलते कई छात्रों के फार्म नहीं भर पाए थे और खासा हंगामा हुआ था।
इनका कहना है
मामले में प्रतिवेदन आने के बाद दोषियों के खिलाफ  उचित कार्रवाई की जाएगी।
आरए प्रजापति
प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी


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