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माह के अंत तक कांग्रेस घोषित कर सकती है 70 उम्मीदवारों के नाम, केपी सिंह और महेन्द्र के नाम की संभावना

 

शिवपुरी। प्रदेश के 2018 के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों की घोषणा में कांग्रेस भाजपा पर बढ़त हासिल कर सकती है। कांग्रेस सूत्रों ने स्पष्ट किया कि इस माह के अंत तक पार्टी 230 में से कम से कम 70 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा करेगी। इनमें अधिकांशत: वे वर्तमान विधायक है जिन्हें पार्टी 2018 में पुन: चुनाव लड़ाना चाहती है। बताया जाता है कि पहली लिस्ट में पिछोर से विधायक केपी सिंह और कोलारस से तीन माह पहले जीते महेन्द्र यादव के नाम शामिल हैं। जिले की पांच विधानसभा सीटों में से 2013 के चुनाव में कांग्रेस ने 3 सीटों पर विजयश्री प्राप्त की थी, लेकिन बताया जाता है कि करैरा की विधायक शकुन्तला खटीक के नाम पर अभी संशय बना हुआ है। जबकि शिवपुरी और पोहरी विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस भाजपा उम्मीदवारों की घोषणा के बाद उम्मीदवारी तय करेगी ऐसा सूत्रों का कथन है। दोनों विधानसभा क्षेत्रों में काफी लम्बे समय से कांग्रेस को जीत का इंतजार है। 
प्राप्त जानकारी के अनुसार आगामी विधानसभा चुनाव कांग्रेस, बसपा और सपा गठबंधन के साथ चुनाव लडऩे की तैयारी कर रही है। शिवपुरी जिले में समाजवादी का प्रभाव अधिक नहीं है जबकि बहुजन समाज पार्टी का करैरा, पोहरी और कोलारस में अच्छा प्रभाव है। 2003 के विधानसभा चुनाव में करैरा से बसपा प्रत्याशी लाखन सिंह बघेल विजयी हुए थे और 2008 के विधानसभा चुनाव में बसपा उम्मीदवार प्रागीलाल जीत तो नहीं पाए, लेकिन उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार बाबूरामनरेश को तीसरे स्थान पर धकेलकर दूसरा स्थान प्राप्त किया। 2013 के विधानसभा चुनाव में बसपा को करैरा से 49 हजार से अधिक मत मिले, लेकिन वह दूसरा स्थान प्राप्त करने में कुछ हजार मतों से भाजपा उम्मीदवार ओमप्रकाश खटीक से पिछड़ गए। 2013 में करैरा से कांग्रेस प्रत्याशी शकुन्तला खटीक ने जीत हासिल की थी। पोहरी में भी बसपा का प्रदर्शन 2008 के विधानसभा चुनाव में काफी दमदार रहा था। उस चुनाव में बसपा उम्मीद्वार हरिबल्लभ शुक्ला चुनाव तो नहीं जीत पाए, लेकिन उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी एनपी शर्मा को तीसरे स्थान पर धकेल दिया था। 2013 के विधानसभा चुनाव में पोहरी से बसपा प्रत्याशी लाखन सिंह बघेल तीसरे स्थान पर रहे। कोलारस से भी बसपा उम्मीदवार चंद्रभान सिंह यादव ने तीसरा स्थान प्राप्त किया था और विजेता बने थे कांग्रेस प्रत्याशी स्व. रामसिंह यादव। कांग्रेस और बसपा से गठबंधन की चर्चाओं के बीच इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि तीन विधानसभा क्षेत्रों में अच्छा प्रभाव रखने के बावजूद भी बसपा को शिवपुरी जिले में से शायद एक भी सीट न मिले, क्योंकि गठबंधन का जो फार्मूला तय किया जा रहा है उसके अनुसार जिन विधानसभा क्षेत्रों में बसपा के विधायक हैं वहां उन्हें गठबंधन का उम्मीदवार बनाया जाएगा तथा जिन विधानसभा क्षेत्रों में बसपा उम्मीदवारों ने दूसरा स्थान प्राप्त कर कांग्रेस को तीसरे स्थान पर धकेला है वहां बसपा टिकट का दावा कर सकती है। जिले के आंकड़ों से स्पष्ट है कि पिछले विधानसभा चुनाव में पांचों सीटों में से बसपा ने किसी सीट पर विजय प्राप्त नहीं की और किसी भी विधानसभा क्षेत्र में उसका स्थान दूसरा नहीं रहा। इसी आधार पर बताया जा रहा है कि कांग्रेस जिले में अपने उम्मीदवारों को तय करने में लगी है। पिछोर विधानसभा क्षेत्र में विधायक केपी सिंह के टिकट पर कोई संकट नहीं है। श्री सिंह 1993 से पिछोर से लगातार चुनाव जीत रहे हैं और वह पांच बार जीत चुके हंै। बताया जाता है कि उनका नाम पहली लिस्ट में आना बिल्कुल तय है। कोलारस के कांग्रेस विधायक महेन्द्र सिंह यादव तीन माह पहले ही विधायक बने हैं और पार्टी उनका टिकट काटने के लिए इच्छुक नजर नहीं आ रही इसलिए उम्मीद है कि उनका नाम भी पहली लिस्ट में आ जाएगा। करैरा विधायक शकुन्तला खटीक के टिकट पर अवश्य संकट बना हुआ है। उन्हें टिकट दिए जाने के बारे में पार्टी दुविधा की स्थिति में है, लेकिन फिर भी उन्हें टिकट मिलने की 50 प्रतिशत संभावना बनी हुई है। एक तो वह महिला हैं और दूसरे अनुसूचित जाति वर्ग की हैं यह उनका सकारात्मक पक्ष है। पार्टी को सबसे अधिक पोहरी विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार चुनने में दिक्कत महसूस हो रही है। पिछले दो विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने ब्राह्मण उम्मीदवार को भाजपा के किरार उम्मीदवार के मुकाबले टिकट दिया। इस विधानसभा क्षेत्र में 30 हजार धाकड़ मतदाता हैं और कांग्रेस की ब्राह्मण उम्मीदवारों को टिकट देने की रणनीति काम नहीं आई और दोनों विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार 2008 की तुलना में सम्मानजनक रही और महज तीन साढ़े तीन हजार मतों से कांग्रेस उम्मीदवार हरिबल्लभ शुक्ला को मात खानी पड़ी। 2008 के विधानसभा चुनाव में भी हरिबल्लभ उस समय बसपा उम्मीदवार थे और दूसरे स्थान पर रहे थे। जहां तक कांग्रेस टिकट का सवाल है तो हरिबल्लभ का टिकट का दावा तो बनता है। कांग्रेस ने ब्राह्मण उम्मीद्वार उतारने का तय किया तो पैनल में हरिबल्लभ का नाम सबसे आगे आ सकता है। ब्राह्मण उम्मीद्वार के रूप में हालांकि कांग्रेस से राजेन्द्र पिपलौदा, पूर्व विधायक गणेश गौतम, विजय शर्मा और एनपी शर्मा भी टिकट मांग रहे हैं, लेकिन यदि कांग्रेस ने धाकड़ उम्मीदवार को टिकट देने का तय किया तो पार्टी किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सुरेश राठखेड़ा तथा युवा विनोद धाकड़ एडवोकेट के नाम पर विचार कर सकती है। हालांकि वरिष्ठ कांग्रेस नेता केशव सिंह तोमर भी टिकट के इच्छुक हैं। शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र से राकेश गुप्ता और सिद्धार्थ लढ़ा की उम्मीदवारी उभर रही है, लेकिन चर्चा है कि जीवाजी विश्वविद्यालय में प्राध्यापक एपीएस चौहान भी टिकट की महत्वाकांक्षा पाले हैं। एक ओर जहां राकेश गुप्ता और सिद्धार्थ लढ़ा सिंधिया समर्थक हैं वहीं एपीएस को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का समर्थक माना जाता है। 

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