
अखिल भारतीय मुशायरा सम्पन्न
शिवपुरी। म.प्र. उर्दू अकादमी संस्.कृति विभाग की ओर सेे स्थानीय दुर्गा मठ विष्णु मंदिर- पुरानी शिवपुरी रोड पर रफीक इशरत ग्वालियरी की अध्यक्षता, असलम राशिद के कुशल संचालन व अ.भा. साहित्य परिषद के प्रान्तीय संगठन मंत्री जगदीश गुप्त के मुख्य आतिथ्य में अखिल भारतीय मुशायरा सम्पन्न हुआ। प्रदीप अवस्थी द्वारा मुशायरे का आग़ाज करने के बाद मुबीन अहमद मुबीन ने अपनी गजल पेश की।
सुभाष पाठक जिय़ा ने रुमानी गजलें पढ़ते हुए श्रोताओं को गुदगुदाया। शकील नश्तर ने विज्ञान के दुरुह विषयों को दोहों में पिरोया। याकूब साबिर ने सामाजिक सरोकारों से तुड़े हुए शेर कहे।
मेधावी शायर सुकून शिवपुरी ने आतंकवाद से इस्लाम को जोडऩे की निंदा करते हुए एक नज़्म पढ़ी। नई गजल के शायर डॉ. महेन्द्र अग्रवाल ने माहौल में नया रंग बिखेरते हुए कहा-किताबों में नहीं मिलती बड़े बूढ़ों की ये बातें, जो आड़े वक्त पर उनकी हिदायत बोल देती है। डॉ.लखन लाल खरे ने व्यंग्य करते हुए कहा-बुद्धिजीवी सब इक_े हो गये हैं, देश में अब और रट्टे हो गये हैं।

असलम राशिद गुना और मनीष जैन ‘रोशन’, ने मुसलसल गजलें पढ़ते हुए मुशायरे को नई बुलन्दियों तक पहुंचाया.आमिर फारुकी ग्वालियर ने धार्मिक विसंगतियों पर चोट करती हुई मानवतावादी नज़्म पढ़ी। दीपक जैन गुना एवं सुश्री राना ज़ेबा के बातरन्नुम गीतों गजलों के बाद खुर्शीद हैदर मुजफरनगर ने कहा-हमारी मौत पर बस इतना कहके सब्र कर लेना,कि पक जाने पे पेड़ों से समर गिर जाया करते हैं .मुशायरे में मदन मोहन दानिश ग्वालियर ने फरमाया-जिन्दगी से भरोसा करो टूटकर, मौत का काम दुश्वार करते रहो। उसके बाद समय की कमी को देखते हुए नुसरत मेहदी साहिबा, ने रस्म अदायगी की ताकि श्रोता मशहूर शायर ताहिर फराज रामपुर, को जी भर कर सुन सकें। फराज साहब ने अपने नाम और प्रतिष्ठा के अनुरुप प्रदर्शन करते हुए अपने कलाम से श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा तथा श्रोताओं की विशेष फरमाइश पर नई पीढ़ी को अपने अतीत व विरासत से अवगत कराने वाला ताजा गीत पढ़ा-वो भी क्या दिन थे हम अपने देश में रहते थे, अपनी मिट्टी की खुशबू के परिवेश में रहते थे। कार्यक्रम के अंत में म.प्र. उर्दू अकादमी की सचिव नुसरत मेहदी ने उपस्थित नगर के सभी साहित्य प्रेमियों, रसिक श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।







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