
पोहरी। पोहरी विधानसभा में भाजपा की सक्रिय राजनीति में एक और उम्मीदवार ने लोगों के दिलों पर छाप छोड़ी है। उन्होंने अपनी ईमानदार, साफ-स्वच्छ छवि, मेहनत और मिलनसार व्यक्तित्व के दम पर अपना एक अलग ही मुकाम हासिल किया है। वह और कोई नहीं बल्कि किरार समाज के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. गुलाब सिंह किरार हैं जिनका पिछले 10 वर्षों से पोहरी की जनता से पारिवारिक जुड़ाव है। डॉ. गुलाब सिंह ने जब से भाजपा की सदस्यता ग्रहण की तब से लेकर आज तक वह पार्टी में लगातार सक्रिय हैं और अपनी कार्यशैली और जुझारू रवैए ने आज उन्हें पार्टी का एक कर्मठ कार्यकर्ता बना दिया है।

खासबात यह है कि पोहरी की राजनीति जिन दो वर्ग धाकड़ और ब्राह्मण के इर्द-गिर्द घूमती है इनमें से डॉ. गुलाब सिंह धाकड़ बाहुल्य से आते हैं और समाज के लोगों में उनके प्रति खासा लगाब भी देखने को मिलता है जब वह किरार समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे तभी से क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता बढऩा शुरू हो गई थी और पार्टी के इशारे पर डॉ. किरार ने 2008 से ही पोहरी विधानसभा में सक्रियता बढ़ा दी थी। पिछले 10 वर्षों में उनकी मेहनत और लगन से उनकी लोकप्रियता ने एक चट्टान का रूप धारण कर लिया है। आज यदि भाजपा अपने प्रत्याशी के रूप में चेहरा बदलती है तो उसके पास विकल्पों की कमी नहीं है उन विकल्पों में डॉ. गुलाब सिंह किरार एक हैं।
वहीं यदि बात कांग्रेस की करें तो पोहरी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस ने 1993 के बाद जीत का स्वाद नहीं चखा है। 1998, 2003, 2008 और 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को शिवपुरी जिले की जातिगत राजनीति की प्रतीक इस सीट से लगातार पराजय हासिल हो रही है। इन चार विधानसभा चुनावों में एक बार वर्ष 2008 में तो कांग्रेस प्रत्याशी को जमानत से भी हाथ धोना पड़ा था। 2003 के चुनाव में इस सीट से समानता दल के उम्मीद्वार को जीत हासिल हुई थी और भाजपा प्रत्याशी की जमानत जप्त हुई थी तथा शेष तीन विधानसभा चुनावों में भाजपा ने जीत का वरण किया था। आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो यहां भाजपा का पलड़ा भारी दिखता है और भाजपा में भी धाकड़ उम्मीदवार। पिछले दो बार से धाकड़ बाहुल्य से प्रहलाद भारती जीतते आए हैं। इस यदि भाजपा नया चेहरा मैदान में उतारती हैं तो गुलाब सिंह किरार जैसे मजबूत प्रत्याशी भाजपा के पास हैं जो कांग्रेस प्रत्याशी को टक्कर देने की बजूद रखते हैं।






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