
सोसायटियों एवं बाजारों से गाबय यूरिया ब्लैक में बेचा जा रहा
शिवपुरी। बदरवास में यूरिया की कमी से किसान परेशान हैं। दुकानों पर रखा रहने वाला यूरिया भी नहीं मिल रहा। यूरिया अखिर कहां गायब हो गया किसानों की समझ से बाहर है। जिन किसानों को चुनावों के दौरान राजनीतिक पार्टियां अन्नदाता के नाम से पुकारती है और उन्ही किसानों को दलाल एवं व्यापारी किस तरह लूटते है इसकी बानगी छोटे किसानों से जाकर पूछा जाए तो हकीकत सामने आ जाएगी कि किसानों के साथ बीज, खाद, दवाईयों के नाम पर विचौलिए बिना लाइसेंस के अवैध रूप से विक्री कर किसानों को लूट रहे हैं। जब किसानों को डीएपी की आवश्यकता थी तो उन्हें डीएपी 1450 तक दिया गया। यानि किसानों के साथ डीएपी में जमकर लूट की गई। उसके बाद जब किसानों को बीज की आवश्यकता पड़ी तो उचित मूल्य की दुकानों पर विकने बाला गरीबों का गेहूं खरीद कर उसे साफ कर फर्जी बीज तैयार कर कट्टे में भरकर एक रुपए किलो गरीबों को मिलने वाला गेहूं बीज के नाम पर 3000 से लेकर 6000 तक किसानों को बेचा गया। यही हाल दवाईयों का है।
किसानों को जिस समय फसल में दवाओं की आवश्यकता होती है विचौलिए दवा को दवा कर ब्लैक में बेचते है। इन सब के बाद अब हम बात करते हैं किसानों के द्वारा मंडियों में बिकने वाले माल की तो चाहे टमाटर हो, चाहे उड़द हो या सोयावीन किसानों को दोगुने दामों पर बीज बेचने बाले व्यापारी उसी फसल को आधी कीमत में खरीद रहे हैं। उड़द जिसकी पैदावार कम हुई है तथा अतिवृष्टि से उड़द की फसल खराब हुई है। उसे व्यापारियों द्वारा 1500 से 2000 हजार में खरीदा जा रहा है। बड़े किसान तो फायदा भी अधिक कमाते है और घाटा भी झेल जाते है किन्तु मरता वह किसान है जिसके पास जमीन या पैदावार कम होती है। उसके सामने 6 माह का जीवन यापन करने का संकट पैदा हो जाता है। जिसके चलते किसान या तो कर्ज में डूब जाता है या फिर कर्ज न मिलने पर आत्म हत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर हो जाता है।
150 रुपए ब्लैक में खुलेआम बिक रह है गोदामों पर यूरिया
विगत कई दिनों से किसानों को रबी सीजन की फसलों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए डीएपी के बाद यूरिया खाद की आवश्यकता पड़ रही है किंतु सोसायटियों पर यूरिया उपलब्ध नहीं है और बजार में बिकने बाला यूरिया गायब हो चुका है। दुकानों से गायब हुआ यूरिया दलालों ने गोदामों मे भंडारण कर रखा है। और दलालों के माध्यम से 260,270 रुपए में विकने वाला यूरिया 400 से लेकर 450 रुपए तक किसानों को ब्लैक मे बेचा जा रहा है। कुल मिलाकर पहले बीज उसके बाद डीएपी अब यूरिया के नाम पर किसानों को के साथ दलाल खुले आम लूट कर रहे हैं।
बदरवास, खतौरा सहित ग्रामीण अंचल के गोदामों में अवैध रुप से भरा है यूरिया
खाद माफिया दुकानों एवं सोसायटियों के माध्यम से बिकने वाला यूरिया खाद प्राईवेट गोदामों से अवैध रुप भंडारण कई माह पूर्व से किए हुए हैं। और किसानों को यूरिया पर 150 रुपए तक अधिक कीमत में यूरिया की बिक्री दलालों के माध्यम से किसानों को की जा रही है। अमानक बीज के बाद बजार से यूरिया गायब कर प्राईवेट गोदामों पर किसानों को बुलाकर खलेआम लूट रहे हैं।






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