कर्मचारी कांग्रेस के जिलाध्यक्ष पिपलौदा के निवास पर किया हमले का प्रयास
शिवपुरी।
पीएस होटल के पीछे स्थित न्यू शिव कॉलोनी में कल रात शराब के नशे में
धुत्त पुलिसकर्मियों ने जमकर दहशत मचाई। कोतवाली में पदस्थ आरक्षक छोटू
चौहान, राजकमल, रूद्रप्रताप सिंह सहित दो अन्य पुलिसकर्मियों ने लाठियों से
लैस होकर कर्मचारी कांग्रेस के जिलाध्यक्ष राजेंद्र पिपलौदा के निवास
स्थान पर धावा बोला और जमकर गाली गलौच की तथा जान से मारने की धमकी दी।
मोहल्ले में मनीष शाक्य के निवास स्थान पर भी उस पर हमला करने की कोशिश की।
बताया जाता है कि आरोपी घातक हथियारों से लेस थे। यह तो अच्छा हुआ कि
हमलावरों के डर से पिपलौदा और श्री शाक्य ने मकान का दरवाजा नहीं
खोला। घटना की सूचना तुरंत पुलिस अधीक्षक राजेश हिंगणकर को दी गई और
उन्होंने मोहल्ले में पुलिस भेजी। जिससे मोहल्लेवासियों ने राहत की सांस ली
और घटनास्थल से ही छोटू चौहान और रूद्रप्रताप सिंह को पकड़ लिया गया, लेकिन
बताया जाता है कि रास्ते में रूद्रप्रताप सिंह को छोड़ दिया गया। घटना से
आशंकित मोहल्ले वालों ने कोतवाली पहुंचकर रिपोर्ट लिखाई, लेकिन उनकी
रिपोर्ट नहीं लिखी गई। इस घटना से मोहल्ले में आतंक का वातावरण व्याप्त
है।
पीएस होटल के पीछे स्थित न्यू शिव कॉलोनी में कल रात शराब के नशे में
धुत्त पुलिसकर्मियों ने जमकर दहशत मचाई। कोतवाली में पदस्थ आरक्षक छोटू
चौहान, राजकमल, रूद्रप्रताप सिंह सहित दो अन्य पुलिसकर्मियों ने लाठियों से
लैस होकर कर्मचारी कांग्रेस के जिलाध्यक्ष राजेंद्र पिपलौदा के निवास
स्थान पर धावा बोला और जमकर गाली गलौच की तथा जान से मारने की धमकी दी।
मोहल्ले में मनीष शाक्य के निवास स्थान पर भी उस पर हमला करने की कोशिश की।
बताया जाता है कि आरोपी घातक हथियारों से लेस थे। यह तो अच्छा हुआ कि
हमलावरों के डर से पिपलौदा और श्री शाक्य ने मकान का दरवाजा नहीं
खोला। घटना की सूचना तुरंत पुलिस अधीक्षक राजेश हिंगणकर को दी गई और
उन्होंने मोहल्ले में पुलिस भेजी। जिससे मोहल्लेवासियों ने राहत की सांस ली
और घटनास्थल से ही छोटू चौहान और रूद्रप्रताप सिंह को पकड़ लिया गया, लेकिन
बताया जाता है कि रास्ते में रूद्रप्रताप सिंह को छोड़ दिया गया। घटना से
आशंकित मोहल्ले वालों ने कोतवाली पहुंचकर रिपोर्ट लिखाई, लेकिन उनकी
रिपोर्ट नहीं लिखी गई। इस घटना से मोहल्ले में आतंक का वातावरण व्याप्त
है।
बताया जाता है कि न्यू शिव कॉलोनी में मनीष शिवहरे निवास
करता है उसी के मकान में किराए से छोटू चौहान आरक्षक रहता है। आरोप है कि
मनीष शिवहरे के मकान में आसामाजिक गतिविधियां चलती हैं। मोहल्ले वालों ने
पहले भी पुलिस को शिकायत की थी कि शिवहरे के मकान में आए दिन लड़कियां लाकर
अय्याशी की जाती है जिससे मोहल्ले का वातावरण विषाक्त हो रहा है और मोहल्ले
को शराब का अड्डा बना रखा है इसी बात पर मनोज शिवहरे का पड़ौसी हरीश शाक्य
से विवाद चलता है। कल रात बताया जाता है कि इसी विवाद के चलते आरक्षक छोटू
चौहान ने मनीष शिवहरे के कहने से शराब के नशे में हरीश शाक्य को गालियां
देना शुरू की। इसका विरोध वहां रह रहे कर्मचारी कांग्रेस के जिलाध्यक्ष
राजेंद्र पिपलौदा ने किया। उन्होंने और मोहल्ले वालों ने इक_ा होकर आरक्षक
छोटू चौहान को वहां से रवाना कर दिया। उस समय तो मामला रफा दफा हो गया,
लेकिन आध घंटे बाद बताया जाता है कि छोटू चौहान अपने साथ तीन अन्य
पुलिसकर्मियों को लेकर मोहल्ले में पहुंचा जिनमें एक रूद्रप्रताप सिंह था।
उस समय तक पिपलौदा और हरीश शाक्य अपने अपने मकान के दरवाजे बंद कर सोने की
तैयारी कर रहे थे। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने दोनों के मकान पर धावा बोला
और किवाड़ खोलने के लिए कहा। लाठियों से दरवाजे पीटे गए, मकान की तोड़फोड़ भी
हुई, लेकिन डर से दरवाजे नहीं खोले गए, परंतु मोहल्ले वाले आशंकित होकर
कांपते रहे। मकान के भीतर से ही राजेंद्र पिपलौदा ने पुलिस अधीक्षक को फोन
कर पूरी घटना की जानकारी और एसपी के निर्देश पर गाड़ी से दो पुलिसकर्मी वहां
पहुुंचे। पुलिसकर्मियों को देखकर मोहल्ले वालों की हिम्मत बढ़ी और वे बाहर
निकलकर आए तथा उन्हाने छोटू चौहान और रूद्रप्रताप सिंह को पकड़ लिया।
आरोपियों के पास से मोटरसाइकिल और लोहे का डंडा भी बरामद किया गया है,
लेकिन समाचार लिखे जाने तक पुलिस ने इस मामले में अभी तक कोई कार्यवाही
नहीं की है न तो आरोपियों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज की गई है और न ही
पुलिसकर्मियों के विरूद्ध कोई विभागीय कार्यवाही की गई है।
करता है उसी के मकान में किराए से छोटू चौहान आरक्षक रहता है। आरोप है कि
मनीष शिवहरे के मकान में आसामाजिक गतिविधियां चलती हैं। मोहल्ले वालों ने
पहले भी पुलिस को शिकायत की थी कि शिवहरे के मकान में आए दिन लड़कियां लाकर
अय्याशी की जाती है जिससे मोहल्ले का वातावरण विषाक्त हो रहा है और मोहल्ले
को शराब का अड्डा बना रखा है इसी बात पर मनोज शिवहरे का पड़ौसी हरीश शाक्य
से विवाद चलता है। कल रात बताया जाता है कि इसी विवाद के चलते आरक्षक छोटू
चौहान ने मनीष शिवहरे के कहने से शराब के नशे में हरीश शाक्य को गालियां
देना शुरू की। इसका विरोध वहां रह रहे कर्मचारी कांग्रेस के जिलाध्यक्ष
राजेंद्र पिपलौदा ने किया। उन्होंने और मोहल्ले वालों ने इक_ा होकर आरक्षक
छोटू चौहान को वहां से रवाना कर दिया। उस समय तो मामला रफा दफा हो गया,
लेकिन आध घंटे बाद बताया जाता है कि छोटू चौहान अपने साथ तीन अन्य
पुलिसकर्मियों को लेकर मोहल्ले में पहुंचा जिनमें एक रूद्रप्रताप सिंह था।
उस समय तक पिपलौदा और हरीश शाक्य अपने अपने मकान के दरवाजे बंद कर सोने की
तैयारी कर रहे थे। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने दोनों के मकान पर धावा बोला
और किवाड़ खोलने के लिए कहा। लाठियों से दरवाजे पीटे गए, मकान की तोड़फोड़ भी
हुई, लेकिन डर से दरवाजे नहीं खोले गए, परंतु मोहल्ले वाले आशंकित होकर
कांपते रहे। मकान के भीतर से ही राजेंद्र पिपलौदा ने पुलिस अधीक्षक को फोन
कर पूरी घटना की जानकारी और एसपी के निर्देश पर गाड़ी से दो पुलिसकर्मी वहां
पहुुंचे। पुलिसकर्मियों को देखकर मोहल्ले वालों की हिम्मत बढ़ी और वे बाहर
निकलकर आए तथा उन्हाने छोटू चौहान और रूद्रप्रताप सिंह को पकड़ लिया।
आरोपियों के पास से मोटरसाइकिल और लोहे का डंडा भी बरामद किया गया है,
लेकिन समाचार लिखे जाने तक पुलिस ने इस मामले में अभी तक कोई कार्यवाही
नहीं की है न तो आरोपियों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज की गई है और न ही
पुलिसकर्मियों के विरूद्ध कोई विभागीय कार्यवाही की गई है।
मैं घर से बाहर निकलता तो आरोपी मुझे जान से मार देते : पिपलौदा
कर्मचारी
कांग्रेस के जिलाध्यक्ष राजेंद्र पिपलौदा ने बताया कि पुलिसकर्मी हथियारों
से लैस थे उनके पास लोहे के डंडे थे। जिसे बरामद भी किया गया है यदि वह
अपने मकान से बाहर निकलते तो आरोपी उन्हें जान से मार देते। मोहल्ले वालों
ने भी ऐसी आशंका जाहिर की है, लेकिन इसके बाद भी पुलिस द्वारा अभी तक मामले
में संज्ञान न लेना पुलिसिया कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा करता है।
कांग्रेस के जिलाध्यक्ष राजेंद्र पिपलौदा ने बताया कि पुलिसकर्मी हथियारों
से लैस थे उनके पास लोहे के डंडे थे। जिसे बरामद भी किया गया है यदि वह
अपने मकान से बाहर निकलते तो आरोपी उन्हें जान से मार देते। मोहल्ले वालों
ने भी ऐसी आशंका जाहिर की है, लेकिन इसके बाद भी पुलिस द्वारा अभी तक मामले
में संज्ञान न लेना पुलिसिया कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा करता है।






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