छोटे गांवों के होनहारों की बड़ी उड़ान
अध्यापक का बेटा बना नायब तहसीलदार तो शिक्षक का आरटीओ सब इस्पेक्टर
शिवपुरी। आर्थिक संपन्नता और महानगरीय सुख-सुविधाओं की प्रतिभा व योग्यता मोहताज नहीं होती। यह बात समय-समय पर शिवपुरी जिले के होनहार सिद्ध कर चुके हैं। बीते रोज घोषित मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी प्रशासनिक प्रतियोगी परीक्षा एमपीपीएससी के परिणामों से एक बार फिर जिले का गौरव बढ़ा है। इस परीक्षा में जिले के दो छोटे-छोटे गांव में रहकर प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने वाले दो होनहारों ने चयन पाया है। ये दोनों ही होनहार शिक्षकों के बेटे हैं। एक बदरवास के छोेटे से गांव विजरौनी के रहने वाले अध्यापक राजभान यादव का बेटा भारतेंदु यादव है जिसका चयन नायब तहसीलदार के पद पर हुआ है तो दूसरा होनहार बैराड़ के छोटे से गांव ऊंची बरोद का मूल निवासी है जिसके पिता भी शिक्षक हैं और उनके होनहार बेटे कुलदीप भार्गव ने आरटीओ सब इस्पेक्टर के पद पर चयनित होकर गौरवान्वित किया है।
भाईयों के बाद कुलदीप ने भी बढ़ाया मान
बैराड़ के ऊंची बरोद में रहने वाले भार्गव परिवार में सिर्फ सब इस्पेक्टर के पद पर चयनित कुलदीप ही होनहार नहीं है बल्कि उनके बड़े भाई भी ऊंचे ओदे पर हैं। कुलदीप के दादाजी गणेशलाल भार्गव पांडित्य कर्म परिवार का पालन पोषण करते थे। उनके बेटे महेश भार्गव शिक्षक हैं तो वहीं कुलदीप के बड़े भाई विजय भार्गव कैंसर में डीएम हैं। दूसरा भाई सतीश भार्गव दंत चिकित्सक हैं तो उनके छोटे भाई हेमंत भार्गव का चयन पीएससी परीक्षा के माध्यम से फोरेस्ट में रेंजर के पद पर हो चुका है। ऐसे में पूरे परिवार प्रतिभाओं की खान कही जा सकती है।
नहीं हारा हौसला, तीसरी बार में मिली सफलता
कुलदीप ने चर्चा में बताया कि उनका ध्येय इंजीनियरिंग करने के बाद से ही प्रशासनिक सेवा में जाने का था और दो बार पीएससी परीक्षा दी लेकिन प्रारंभिक परीक्षा में ही सफलता नहीं मिली। इस नाकामयाबी के बावजूद उन्होंने हौसला नहीं हारा और तीसरी बार परीक्षा दी तो तीनों चरणों में कामयाब होकर सब इस्पेक्टर के पद पर चयनित हो गए। कुलदीप कहते हैं कि ये उनका अंतिम लक्ष्य नहीं है वे आगे भी तैयारी जारी रखेंगे और पीएससी के सबसे बड़े पद डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित होना उनका ध्येय है।
पिता अध्यापक, बेटा बना नायब तहसीलदार
बदरवास के विजरौनी गांव के रहने वाले राजभान यादव सहायक अध्यापक हैं। घर में भारतेंदु के अलावा दो बेटियां हैं। भारतेंदु ने बीएससी गणित से की, उसके बाद लक्ष्य बनाया कि उन्हें पीएससी की तैयारी करनी है। इस तैयारी के लिए वे किसी महानगर की बड़ी कोचिंग में जाने की बजाए गुना गए और वहां तैयारी की। पहली ही बार में उन्हें सफलता मिली और प्रदेश मे 38वीं रैंक हासिल कर नायब तहसीलदार के पद पर चयनित हो गए। बेटे की इस उपलब्धि पर अध्यापक पिता व बहनों की खुशी का ठिकाना नहीं है। छोटी बेटी भी पीएससी की तैयारी कर रही है और से उम्मीद है कि उसे भी जरुर कामयाबी मिलेगी। वहीं भारदेंतु भी सिर्फ यहीं ठहरना नहीं चाहते, वे भी अपनी तैयारी जारी रखेंगे।






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