
रात के अंधेरे में निकाले जाते हैं कट्टू वाहन
जल्द बड़े नेता का नाम उजागर जिसकी दम पर चल रहा है बैरियर
सुनील रजक शिवपुरी। कोटा-झांसी फोरलेन स्थित खरई यातायात चौकी पर राजस्थान से होकर आने वाले कट्टू वाहनों की निकासी यहां आम बात है। राजस्थान से पशुओं को अवैध रूप से भरकर लाने वाले वाहनों को बैरियर से रात के अंधेरे में निकाला जाता है। जिले के खरई बैरियर पर बड़े पैमाने पर मवेशी तस्करी का धंधा चल रहा है। इसमें मवेशी तस्करों का बड़ा गिरोह काम कर रहा है। जानवरों की तस्करी का यह धंधा रात के अंधेरे में संचालित हो रहा है जो कुछ लोगों की कमाई का बड़ा स्त्रोत बना हुआ है। आरोप तो यहां है कि जानवर तस्करों से वसूली जानेवाली राशि में अच्छा-खासा हिस्सा बड़े नेताओं तक भी पहुंचता है। एक अनुमान के मुताबिक तस्कर एक ट्रक पर प्रतिदिन 50 हजार रुपये घूस में खर्च करते हैं।
चंद महीनों में लाखों में खेल रहे तस्कर
कुछ लोगों की आर्थिक स्थिति पर नजर डालें तो इनके पास ओढऩे-पहनने के भी लाले थे, लेकिन सूत्रों की मानें तो जब से इनके द्वारा मवेशी तस्करी में एंट्री मारी है तब से इनके बारे-न्यारे हो गए हैं। अब यह लाखों में खेल रहे हैं यहां तक की लग्जरी वाहनों में शान से घूमते देखे जा सकते हैं। बताया जाता है कि इनके द्वारा बैरियर स्टाफ को दबाव में लेकर अपने कार्य को भलीभांति अंदाज दिया जा रहा है।
वाहनों से अवैध वसूली के लिए भी बदनाम है खरई बैरियर
खरई बैरियर की बात करें तो यह न केवल मवेशियों की तस्करी के लिए बदनाम है, बल्कि यहां से गुजरने वाले वाहनों से अवैध वसूली के लिए भी बदनाम है। यहां पर खुलेआम प्राइवेट लोगों की मदद से वसूली को अंजाम दिया जाता है। इस खेल में नीचे से लेकर ऊपर तक हिस्सा पहुंचाने की बात सामने आती रहती है।






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