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आज के बच्चों ने पाश्चात्य संस्कृति के बाबजूद भी भारतीय संस्कृति को रखा है जीवित : डीआईजी आर के शाह | Shivpuri News

बाल शिक्षा निकेतन विद्यालय के वार्षिकोत्सव कार्यक्रम ‘भूले बिसरेÓ यादों पर दी रंगारंग प्रस्तुतियां
शिवपुरी- आज के पाश्चात्य संस्कृति के दौर में भारतीय संस्कृति को कैसे जीवित रखा जाये, इस हेतु विद्यालय के कार्यक्रम की काफी सराहना की। संस्कृत भाषा में प्रस्तुति नाटक अभिज्ञान शाकुन्तलम् की तारीफ करते हुए मुख्य अतिथि ने कहा कि आज जहां एक ओर हर वर्ग कई प्रकार के प्रदूषणों का शिकार है इस माहौल में छात्रों की धारा प्रवाह संस्कृत में दी गई प्रस्तुतियां काबिले तारीफ है एवं समाज के लिए अच्छा उदाहरण है। इसके लिए विद्यालय परिवार भी बधाई का पात्र है। उक्त उद्गार कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रकट किए डीआईजी आरके शाह ने जो स्थानीय बाल शिक्षा निकेतन विद्यालय के वार्षिकोत्सव कार्यक्रम को मुख्य अतिथि की आसंदी से संबोधित कर रहे थे। गत दिवस अशाकसीय बाल शिक्षा निकेतन विद्यालय के वार्षिकोत्सव समारोह के अवसर पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा अपनी बचपन की पुरानी यादों पर आधारित थीम ‘भूले बिसरेÓ शीर्षक पर प्रस्तुतियां दी। इस दौरान मुख्य अतिथि आर.के.शाह (डीआईजी आईटीबीपी) रहे जनके समक्ष रंगारंग एवं मनमोहक प्रस्तुतियां देकर बच्चो ने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथि एवं अभिभावकों को मंत्र मुग्ध कर दिया। इस अवसर पर बचपन, सपने, रामकथा, अभिज्ञान शाकुन्तलम एवं कई क्षेत्रीय लोकनृत्यों की शानदार प्रस्तुतियां दी गई। इस अवसर पर जिला संयोजक मानव अधिकार आयोग आलोक एम.इंदौरिया, लायन प्रांतपाल अशोक ठाकुर, डॉ.शैलेन्द्र गुप्ता, डॉ.एस.के.वर्मा, महिपाल अरोरा आदि सहित विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी व सदस्यगण एवं गणमान्य नागरिक मौजूद थे। कार्यक्रम में विद्यालय प्राचार्य डॉ.श्रीमती कामिनी सक्सैना द्वारा वार्षिक प्रतिवेदन दिया गया जबकि कार्यक्रम समापन पर विद्यालय पर संचालिका श्रीमती बिन्दु छिब्बर ने सभी अतिथियों का आभारव्यक्त किया। इस अवसर पर विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्य, संचालक एवं समाजसेवी उपस्थित थे। 
कार्यक्रमों ने मोहा मन, लोकगीतों ने बांधा समां
बाल शिक्षा निकेतन विद्यालय के वार्षिकोत्सव समारोह में मुख्य आकर्षण का केन्द्र कई रंगारंग और सांस्कृतिक कार्यक्रम रहे तो वहीं दूसरी ओर कार्यक्रम में लवकुश की रामकथा देख दर्शकों की आंखें भर आई तो वहीं भूले बिसरे खेल और आज की मोबाईल फोन संस्कृति के सटीक व्यंग्य को भी सराहना मिली। कार्यक्रम में आयुषी जैन, एकादशी भार्गव, जतिन गोयल, नमन राठौर एवं खुशी सेन ने अपने द्वारा गाए लोकगीतों के माध्यम से कार्यक्रम में समां बांध दिया। कार्यक्रम का संचालन दिव्या भागवानी और वंशिका दुबे ने बेहद काव्यात्मक ढंग से किया जिसे सभी उपस्थितजनों द्वारा सराहा गया। 
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