Press "Enter" to skip to content

50 रुपए में रजिस्ट्रेशन की घोषणा, लग रही डेढ़ सौ रुपए से ज्यादा फीस ! Indore News

Image result for admission
इंदौर। मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री ने प्रदेश के कॉलेजों में 50 रुपए रजिस्ट्रेशन शुल्क में एडमिशन की घोषणा भले ही कर दी हो लेकिन हकीकत इससे उलट है। ऑनलाइन एडमिशन प्रक्रिया में शामिल होने वाले छात्र को न्यूनतम 154 रुपए फीस चुकाना ही पड़ रही है। घर बैठे आवेदन करने पर भी छात्र के खाते से पोर्टल की फीस काटी जा रही है। प्रवेश प्रक्रिया शुरू हुए अभी दो दिन ही बीते हैं लेकिन कई खामियां सामने आ चुकी हैं। छात्र और कॉलेज वाले शिकायत कर रहे हैं लेकिन उच्च शिक्षा विभाग बेपरवाह है। 
10 जून से ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन पोर्टल की लिंक खुली है। प्रक्रिया शुरू होने से पहले उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने घोषणा की थी कि ऑनलाइन एडमिशन के लिए रजिस्ट्रेशन शुल्क के तौर पर छात्रों को 50 रुपए, जबकि छात्राओं के लिए प्रक्रिया निशुल्क होगी। इसमें छात्राओं वाली घोषणा पर ही अमल हो पाया है। छात्रों से 100 रुपए रजिस्ट्रेशन फीस के अलावा एमपी ऑनलाइन को पोर्टल फीस के रूप में 50 रुपए अलग से देने पड़ रहे हैं। पोर्टल का यह शुल्क उन छात्रों पर भी लागू हो रहा है जो घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर रहे हैं। पोर्टल फीस 50 रुपए के साथ चार रुपए जीएसटी के रूप में छात्रों के खाते से कट रहे हैं।
एमपी ऑनलाइन के कियोस्क पर आवेदन भरने वालों से कियोस्क वाले अतिरिक्त सौ से डेढ़ सौ रुपए वसूल रहे हैं। मंत्री की घोषणा के बावजूद उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी कबूल भी रहे हैं कि सामान्य स्थिति में छात्र को कम से कम 150 रुपए आवेदन के साथ शुल्क चुकाना पड़ रहा है। मंत्री की घोषणा पर अमल क्यों नहीं हुआ, इस पर विभाग के अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं है। अतिरिक्त संचालक (उच्च शिक्षा) प्रो. केएन चतुर्वेदी के मुताबिक ऑनलाइन प्रवेश के लिए 100 रुपए रजिस्ट्रेशन शुल्क छात्रों से लिया जा रहा है, नियमावली में इसका उल्लेख है।
कोर्स के कोड ही नहीं आए
कॉलेज वाले शिकायत कर रहे हैं कि दो दिन में ही ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया में तमाम गड़बड़ियां सामने आ चुकी हैं। बीसीए कोर्स का कोड ही पोर्टल पर नहीं डाला गया है। जिन कॉलेजों में यह कोर्स चल रहा है, वहां एडमिशन करवाने के लिए परेशानी आ रही है। विभाग ने घोषणा कर दी थी कि एमपी बोर्ड से 12वीं करने वाले छात्रों को दस्तावेज के भौतिक सत्यापन की जरूरत नहीं होगी। यदि वे एसीसी, एनएसएस या खेल का अधिभार नहीं लेते। हालांकि एडमिशन पोर्टल से एमपी बोर्ड का रिकॉर्ड लिंक नहीं हो पाया है। आधे छात्रों का तो ऑनलाइन सत्यापन हो रहा है लेकिन आधे विद्यार्थियों को सत्यापन के लिए कॉलेजों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
सत्यापन में मनमानी
एडमिशन के लिए दस्तावेज सत्यापन के नाम पर भी सरकारी कॉलेज मनमानी कर रहे हैं। सभी सरकारी कॉलेजों को दस्तावेज सत्यापन के लिए हेल्प डेस्क लगाने का आदेश दिया गया है। शहर के दोनों सरकारी गर्ल्स कॉलेजों ने घोषणा कर दी है कि वे सिर्फ छात्राओं के ही दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे। वहीं न्यू साइंस कॉलेज ने घोषणा की है कि सिर्फ साइंस के कोर्स में प्रवेश लेने वालों के दस्तावेज उनके कॉलेज में सत्यापित होंगे। सिर्फ होलकर साइंस कॉलेज और ऑर्ट एंड कॉमर्स कॉलेज में बिना कोर्स और लिंग के भेदभाव के सत्यापन की प्रक्रिया हो रही है। हजारों छात्रों को दस्तावेजों का सत्यापन करवाना है और बोझ इन दो कॉलेजों पर आ गया है।
More from Fast SamacharMore posts in Fast Samachar »

Be First to Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!