
- राजस्थान की कोटा-बूंदी लोकसभा सीट से सांसद हैं ओम बिड़ला
- ओम तीन बार विधायक चुने गए हैं, वे 2014 में भी कोटा-बूंदी से सांसद चुने गए थे
नई दिल्ली. भाजपा सांसद ओम बिड़ला 17वीं लोकसभा के अध्यक्ष बनाए जा सकते हैं। वे राजस्थान की कोटा-बूंदी लोकसभा सीट से सांसद चुने गए हैं। उन्होंने कांग्रेस के रामनारायण मीणा को 2,79,677 वाटों से हराया था। उन्हें कुल 8,00,051 वोट मिले थे। इस सीट से वे 2014 में भी सांसद बने थे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ओम बिड़ला आज नामांकन दाखिल करेंगे।
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह समेत कई नेताओं ने लोकसभा स्पीकर के लिए ओम बिड़ला का नाम प्रस्तावित किया था। बीजू जनता दल (बीजद), शिवसेना, नेशनल पीपुल्स पार्टी, मिजो नेशनल फ्रंट, अकाली दल, लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा), वाईएसआर कांग्रेस, जदयू, अन्नाद्रमुक और अपना दल ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिया है। हमने कांग्रेस से बात की है, उन्होंने अभी तक प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किया है। हालांकि, वे इसका विरोध नहीं करेंगे।
ओम की पत्नी ने कहा- हमारे लिए खुशी का पल
ओम की पत्नी अमिता बिड़ला ने मंगलवार को कहा कि यह हमारे लिए बेहद गर्व और खुशी का पल है। उन्हें चुने जाने के लिए हम कैबिनेट के बहुत आभारी हैं। ओम मंगलवार को भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलने पहुंचे थे। लोकसभा अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर उन्होंने कहा कि मुझे इसके बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है। एक कार्यकर्ता के रूप में मैं सिर्फ कार्यकारी अध्यक्ष से मिलने गया था।
2004-08 तक राजस्थान सरकार में संसदीय सचिव रहे
ओम बिड़ला का जन्म 4 दिसंबर 1962 को कोटा में हुआ था। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्रसंघ चुनाव से की। बिड़ला 2003, 2008 और 2013 यानी तीन बार राजस्थान विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं। 2004 से 2008 तक राजस्थान सरकार में संसदीय सचिव रहे। वह छह साल तक अखिल भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और फिर भारतीय जनता युवा मोर्चा राजस्थान प्रदेश के प्रदेशाध्यक्ष रहे।
16वीं लोकसभा में सुमित्रा महाजन स्पीकर थीं
सोमवार को ही टीकमगढ़ के सांसद वीरेंद्र कुमार को प्रोटेम स्पीकर बनाया गया था। इससे पहले सुमित्रा महाजन लोकसभा की अध्यक्ष थीं। महाजन इंदौर लोकसभा सीट से आठ बार सांसद रह चुकीं हैं। इस बार उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया था।





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